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Noel Tata Salary:₹5 करोड़ बनाम ₹155 करोड़! नोएल टाटा और चंद्रशेखरन की कमाई में इतना बड़ा फर्क क्यों?
Noel Tata Salary: नोएल टाटा की बोर्ड फीस और कमीशन चंद्रशेखरन के एग्जीक्यूटिव पैकेज से इतने अलग क्यों हैं? जानें दोनों की कमाई और भूमिका।
Noel Tata Salary: Why Is There Such a Huge Difference in Pay With N Chandrasekaran?
Noel Tata Salary: टाटा समूह में इस समय चेयरमैन पद को लेकर चल रहा विवाद सिर्फ बोर्डरूम तक सीमित नहीं है। एन चंद्रशेखरन को टाटा संस के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर तीसरे पांच साल के कार्यकाल के लिए फिर नियुक्त किया गया है। इस फैसले का टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने विरोध किया है। ट्रस्ट्स ने इस नियुक्ति को लेकर कानूनी आपत्ति भी जताई है।
इसी घटनाक्रम के बीच दोनों दिग्गजों की कमाई को लेकर भी चर्चा तेज है।आइए जानते हैं इन दोनों दिग्गजों की सैलरी से जुड़े बड़े अंतर के पीछे की वजह के बारे में विस्तार से -
नोएल टाटा कौन हैं और उनकी भूमिका क्या है?
नोएल टाटा, रतन टाटा के सौतेले भाई हैं और लंबे समय से टाटा समूह से जुड़े हुए हैं। वह टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन हैं और कई टाटा कंपनियों के बोर्ड में गैर-कार्यकारी भूमिका निभाते हैं। इनमें ट्रेंट, टाटा इंटरनेशनल, वोल्टास, टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन, टाटा स्टील और टाइटन जैसी कंपनियां शामिल हैं।
यानी नोएल टाटा की भूमिका किसी एक कंपनी के रोजाना के संचालन वाली नौकरी जैसी नहीं है। उनकी कमाई का एक हिस्सा अलग-अलग कंपनियों में बोर्ड फीस और बोर्ड द्वारा मंजूर कमीशन से आता है।
नोएल टाटा को कितनी सैलरी मिलती है?
नोएल टाटा के लिए एक निश्चित मासिक 'सैलरी' का आंकड़ा बताना सही नहीं होगा। कंपनियों की वार्षिक रिपोर्ट में उनका पारिश्रमिक आमतौर पर सिटिंग फीस और बोर्ड-अप्रूव्ड कमीशन के रूप में दर्ज होता है।
टाटा संस की FY2024-25 रिपोर्ट में नोएल टाटा का कमीशन ₹1.42 करोड़ दर्ज है। वहीं टाटा स्टील की FY2025-26 रिपोर्ट में उन्हें ₹1.786 करोड़ का पारिश्रमिक दिखाया गया है।
वोल्टास की रिपोर्ट में भी उनके लिए कमीशन और बोर्ड मीटिंग फीस का प्रावधान दर्ज है। इसलिए अलग-अलग कंपनियों से मिलने वाले भुगतान को जोड़कर ही उनकी कुल कॉर्पोरेट कमाई का अनुमान लगाया जा सकता है।
नोएल टाटा की नेटवर्थ कितनी है?
नोएल टाटा की व्यक्तिगत संपत्ति का कोई आधिकारिक और नियमित सार्वजनिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में उनकी नेटवर्थ करीब 1.5 अरब डॉलर यानी लगभग ₹12,000-12,600 करोड़ आंकी गई है।
एन चंद्रशेखरन की कमाई कितनी है?
एन चंद्रशेखरन की स्थिति इससे काफी अलग है। वह टाटा संस के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन हैं। इसलिए उनके पारिश्रमिक में फिक्स्ड सैलरी के साथ कंपनी के प्रदर्शन से जुड़ा कमीशन भी शामिल होता है।
टाटा संस की FY2024-25 वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, चंद्रशेखरन को ₹14.52 करोड़ ग्रॉस सैलरी, जबकि ₹140.69 करोड़ कमीशन मिला। अन्य मदों को जोड़ने पर उनका कुल पारिश्रमिक ₹155.81 करोड़ रहा।
यानी उनकी कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा सिर्फ बेसिक सैलरी नहीं, बल्कि प्रदर्शन से जुड़े कमीशन से आया।
दोनों की कमाई में इतना अंतर क्यों?
यहां असली अंतर दोनों के पद और जिम्मेदारियों का है। चंद्रशेखरन टाटा संस के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन हैं और समूह की होल्डिंग कंपनी के रोजमर्रा के बड़े कारोबारी और रणनीतिक फैसलों में उनकी सीधी जिम्मेदारी है। इसी वजह से उनका पारिश्रमिक एक एग्जीक्यूटिव पैकेज के तौर पर तय होता है।
दूसरी ओर, नोएल टाटा मुख्य रूप से गैर-कार्यकारी बोर्ड भूमिकाओं में हैं। उन्हें अलग-अलग कंपनियों से बोर्ड फीस और कमीशन मिलता है। इसलिए उनकी कमाई को चंद्रशेखरन के पूरे एग्जीक्यूटिव पैकेज से सीधे 'सैलरी बनाम सैलरी' के रूप में देखना भ्रामक हो सकता है।
फिलहाल टाटा ग्रुप में विवाद क्या है?
17 सितंबर 2026 को टाटा संस बोर्ड ने चंद्रशेखरन को पांच साल का एक और कार्यकाल देने को मंजूरी दी। नोएल टाटा ने इसका विरोध किया। टाटा ट्रस्ट्स ने बाद में इस प्रस्ताव की वैधता पर भी सवाल उठाया और कहा कि ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों की सहमति से जुड़े प्रावधानों का पालन नहीं हुआ।
इसलिए अभी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों की कमाई के आंकड़े अलग-अलग तरह के पारिश्रमिक को दर्शाते हैं। चंद्रशेखरन का ₹155.81 करोड़ का FY2024-25 पैकेज आधिकारिक टाटा संस रिकॉर्ड में दर्ज है, जबकि नोएल टाटा को विभिन्न कंपनियों से मिलने वाली बोर्ड फीस और कमीशन अलग-अलग वार्षिक रिपोर्ट में दिखाई देती है। यही वजह है कि नोएल टाटा की कुल सालाना कमाई का कोई एक आधिकारिक आंकड़ा बताना फिलहाल उचित नहीं होगा।


