Petrol Diesel Price: पेट्रोल-डीजल के दाम होंगे आधे? ट्रंप ने किया बड़ा दावा, जानें भारत में कितनी घट सकती है कीमत

Petrol Diesel Price: Donald Trump ने ईरान युद्ध खत्म होने के बाद US गैसोलीन के $2 प्रति गैलन से नीचे जाने का दावा किया है। जानें भारत में इसका कितना असर हो सकता है।

Jyotsana Singh
Published on: 8 Sept 2026 9:52 AM IST (Updated on: 8 Sept 2026 9:53 AM IST)
Petrol Diesel Price: Could Fuel Prices Halve? Trump’s Oil Claim Sparks Debate
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Petrol Diesel Price: Could Fuel Prices Halve? Trump’s Oil Claim Sparks Debate

Petrol Diesel Price: अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग के बीच कच्चे तेल की कीमतों को लेकर दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईंधन की कीमतों को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका की जीत के बाद तेल की कीमतें तेजी से नीचे आएंगी। उन्होंने अमेरिकी गैसोलीन की कीमत करीब 3 डॉलर प्रति गैलन और आगे चलकर 2 डॉलर प्रति गैलन से भी नीचे जाने की बात कही है। उनके इस बयान के बाद यह कयास लगाए जाने लगे हैं कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता हुआ तो क्या भारत में भी पेट्रोल-डीजल के दाम आधे हो सकते हैं।

ट्रंप ने तेल की कीमतों को लेकर क्या कहा?

डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार 8 सितंबर को कहा कि ईरान के साथ युद्ध खत्म होने के बाद तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिल सकती है। उनका कहना है कि अमेरिकी गैसोलीन की कीमत पहले 3 डॉलर प्रति गैलन तक आएगी और बाद में यह 2 डॉलर प्रति गैलन से भी नीचे जा सकती है। ट्रंप ने यह भी कहा कि कीमतों में यह बदलाव बहुत तेजी से देखने को मिल सकता है। यहां यह समझना जरूरी है कि ट्रंप जिस 2 डॉलर प्रति गैलन की बात कर रहे हैं, वह अमेरिकी गैसोलीन की कीमत है। इसमें क्रूड ऑयल की कीमत 2 डॉलर प्रति बैरल होने के तौर पर बात नहीं कही गई है।

अभी कच्चे तेल की कीमतों में क्या बदलाव हो रहा है?

ट्रंप के दावे के बावजूद फिलहाल अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कीमतों पर दबाव बना हुआ है। अमेरिका-ईरान संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को लेकर चिंता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। 8 सितंबर को ब्रेंट क्रूड करीब 97 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी WTI करीब 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। बाजार की चिंता यह है कि अगर मध्य पूर्व में संघर्ष लंबा चलता है तो तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है और इससे कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।

होर्मुज स्ट्रेट इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। फारस की खाड़ी से निकलने वाले बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और दूसरे पेट्रोलियम उत्पाद इसी समुद्री रास्ते से दुनिया के बाजारों तक पहुंचते हैं। ऐसे में यहां तनाव बढ़ने या जहाजों की आवाजाही रुकने से वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों पर सीधा असर दिखाई देता है।

ट्रंप पहले भी होर्मुज स्ट्रेट को लेकर कई बड़े दावे कर चुके हैं। उन्होंने हाल में इसका नाम बदलकर 'ट्रंप स्ट्रेट' रखने का सुझाव भी दिया था। वहीं एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस तरह के राजनीतिक बयानों से अलग तेल बाजार के लिए सबसे बड़ा मुद्दा इस रास्ते से होने वाली वास्तविक सप्लाई और जहाजों की आवाजाही है।

अमेरिकी सेना ने 94 जहाजों को लेकर क्या कार्रवाई की?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने भी होर्मुज क्षेत्र में अपनी कार्रवाई को लेकर जानकारी दी है। CENTCOM के मुताबिक 7 सितंबर तक अमेरिकी सेनाओं ने ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को लागू कराने के दौरान 94 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला। इसके अलावा तीन जहाजों को क्षतिग्रस्त किया गया और दो जहाजों पर कब्जा किया गया। अमेरिकी सेना के मुताबिक USS George H.W. Bush भी अरब सागर में इस अभियान में मदद कर रहा था। इन कार्रवाइयों को अमेरिकी राष्ट्रपति के आदेशों को लागू कराने का हिस्सा बताया गया है।

क्या भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत आधी हो जाएगी?

ट्रंप के बयान के बाद भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर बात करें तो सिर्फ कच्चे तेल की कीमत कम होने से भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम उसी अनुपात में कम नहीं होंगे। भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत तय करने में अंतरराष्ट्रीय क्रूड की कीमत के साथ डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, रिफाइनिंग लागत, परिवहन खर्च, डीलर कमीशन और केंद्र व राज्य सरकारों के टैक्स जैसे कई कारक शामिल होते हैं। यानी अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमत 20 या 30 फीसदी तक गिर भी जाती है तो जरूरी नहीं कि पेट्रोल-डीजल की कीमत भी उतने ही प्रतिशत कम हो जाए। इसके लिए घरेलू टैक्स और तेल कंपनियों की कीमत तय करने की नीति भी महत्वपूर्ण होती है।

भारत को क्रूड सस्ता होने का फायदा कैसे मिलेगा?

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता है। इसलिए जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड सस्ता होता है तो भारतीय तेल कंपनियों की कच्चा तेल खरीदने की लागत घटती है। इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी की गुंजाइश बनती है। इसके अलावा सस्ता क्रूड देश के आयात बिल और महंगाई पर भी सकारात्मक असर डाल सकता है। वहीं, इसका फायदा उपभोक्ताओं तक कितना पहुंचेगा, यह सरकार की टैक्स नीति और तेल कंपनियों के मूल्य निर्धारण पर निर्भर करेगा।

ट्रंप के दावे से भारत में कितनी उम्मीद?

अगर अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म होता है, होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही सामान्य होती है और मध्य पूर्व से तेल की सप्लाई बिना रुकावट जारी रहती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। ऐसी स्थिति भारत के लिए राहत देने वाली होगी। इससे तेल आयात की लागत घट सकती है और आगे चलकर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी की संभावना बन सकती है। लेकिन ट्रंप का 2 डॉलर प्रति गैलन वाला बयान अमेरिकी गैसोलीन की संभावित कीमत को लेकर है। इसे भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत आधी होने की घोषणा के तौर पर नहीं समझा जा सकता। आने वाले दिनों में क्रूड की कीमत, होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति और अमेरिका-ईरान संघर्ष का रुख ही तय करेगा कि भारत में ईंधन की कीमतों पर कितनी राहत मिलती है।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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