ट्रंप के टैरिफ का जवाब! RBI गवर्नर बोले - भारत की बुनियाद अटूट, चिंता की कोई बात नहीं

वाशिंगटन डीसी में IMF-विश्व बैंक की वार्षिक बैठक के दौरान RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अमेरिका के 50% टैरिफ को लेकर भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का भरोसा दिलाया और कहा कि घरेलू मांग के कारण प्रभाव सीमित रहेगा।

Sonal Girhepunje
Published on: 16 Oct 2025 9:31 AM IST
ट्रंप के टैरिफ का जवाब! RBI गवर्नर बोले - भारत की बुनियाद अटूट, चिंता की कोई बात नहीं
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RBI Governor Dismisses Trade Fears: अगस्त 2025 में अमेरिका ने भारत पर अपने टैरिफ को 50% तक बढ़ा दिया था। इस फैसले से भारत के व्यापार और निर्यात उद्योग में कई सवाल और चिंताएं पैदा हो गईं। व्यापार जगत में डर था कि अमेरिकी टैरिफ से भारतीय कंपनियों की आमदनी और निर्यात पर बड़ा असर पड़ सकता है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया है कि यह टैरिफ भारत के लिए कोई बड़ी चिंता का विषय नहीं है। उनका कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत और आत्मनिर्भर है। घरेलू मांग पर आधारित यह अर्थव्यवस्था बाहरी दबावों का आसानी से सामना कर सकती है। इसलिए अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव सीमित ही रहेगा और भारतीय बाजार स्थिर रहेंगे।

भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, टैरिफ चिंता नहीं

IMF और विश्व बैंक की सालाना बैठक में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से घरेलू मांग पर निर्भर है। इसका मतलब है कि भारत के लोग और घरेलू बाजार अर्थव्यवस्था को चलाते हैं। उन्होंने कहा, "हमें थोड़ी प्रभावितता हो सकती है, लेकिन यह कोई बड़ी समस्या नहीं है।"

गवर्नर ने यह भी बताया कि भारत की वित्तीय व्यवस्था मजबूत है और बाजार की आत्मनिर्भरता इसे अंतरराष्ट्रीय आर्थिक दबावों से सुरक्षित रखती है। इसका मतलब है कि अमेरिकी टैरिफ या वैश्विक आर्थिक मुश्किलों का असर भारत पर बहुत ज्यादा नहीं पड़ेगा। इस तरह भारत की अर्थव्यवस्था स्थिर और मजबूत बनी हुई है।

अमेरिकी टैरिफ का असर - कुछ उद्योग प्रभावित, कुछ सुरक्षित

अमेरिकी टैरिफ से भारत के कई उद्योग प्रभावित हुए हैं। सबसे ज्यादा असर पड़ा वस्त्र उद्योग पर, जो हर साल लगभग 10.3 बिलियन डॉलर का निर्यात अमेरिका करता है। इसके अलावा रत्न और आभूषण उद्योग और समुद्री खाद्य उद्योग को भी चुनौती मिली।

लेकिन कुछ उद्योग टैरिफ से सुरक्षित रहे। इनमें फार्मास्यूटिकल्स, सेमीकंडक्टर और जरूरी खनिज शामिल हैं। ये उद्योग भारत की निर्यात आय में बहुत मदद करते हैं। इसलिए अमेरिकी टैरिफ के बावजूद ये क्षेत्र मजबूती से काम कर रहे हैं।

MPC ने रेपो रेट 5.5% पर रखा स्थिर

RBI गवर्नर ने रुपये में आई अस्थिरता के बारे में कहा कि बाजार खुद तय करेगा कि सही स्तर क्या होना चाहिए। उनका उद्देश्य यह है कि रुपये में अचानक या असामान्य उतार-चढ़ाव न आए।

इसके साथ ही, मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो रेट को 5.5% पर स्थिर रखने का फैसला किया है। MPC ने बताया कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत में घरेलू मुद्रास्फीति नियंत्रित है। इसका मतलब है कि कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हो रही और अर्थव्यवस्था संतुलित बनी हुई है।

भारत ने टैरिफ का सामना करने की तैयारी की

भारत सरकार और RBI ने अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव से निपटने के लिए कई रणनीतिक कदम उठाए हैं। निर्यात को विविध बनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि भारत अलग-अलग देशों में अपने उत्पाद बेच सके और किसी एक बाजार पर निर्भर न रहे। साथ ही, पीएलआई (Production Linked Incentive) योजना को मजबूत किया जा रहा है, जिससे घरेलू उत्पादन बढ़े और नई कंपनियों को प्रोत्साहन मिले। इसके अलावा, घरेलू विनिर्माण और निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत और आत्मनिर्भर बनी रहे। इन कदमों से भारत अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक आर्थिक दबावों का प्रभाव कम कर सकता है।

अमेरिकी टैरिफ के बावजूद भारत की आर्थिक ताकत कायम

विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी टैरिफ से भारत की GDP पर 0.3-0.8% तक असर पड़ सकता है। RBI ने GDP अनुमान 6.7% से घटाकर 6.5% किया है।

हालांकि, गवर्नर संजय मल्होत्रा का कहना है कि भारत की आर्थिक बुनियाद बहुत मजबूत है। पहले छमाही में अमेरिका को भारत का निर्यात 45.82 बिलियन डॉलर रहा, जो पिछले साल से 13.3% अधिक है।

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Sonal Girhepunje

Former Senior Writer Mail ID - sonalgirhepunje23@gmail.com

Sonal Girhepunje is a Former Senior Writer at Newstrack.com.

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