SEBI Buyback Rules 2026: कॉर्पोरेट जगत के लिए बड़ी राहत, SEBI ने शेयर बायबैक और निवेश नियमों में किए अहम बदलाव

SEBI Buyback Rules 2026: SEBI के नए फैसले के मुताबिक, 1 अगस्त से कंपनियां स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से अपने शेयरों का बायबैक फिर से शुरू कर सकेंगी।

Priya Singh Bisen
Published on: 20 Jun 2026 12:00 PM IST
SEBI Buyback Rules 2026
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SEBI Buyback Rules 2026

SEBI Buyback Rules 2026: इंडियन शेयर मार्केट को लेकर एक बड़ा रेगुलेटरी अपडेट सामने आया है। मार्केट रेगुलेटर SEBI (Securities and Exchange Board of India) ने बीते शुक्रवार को कई बड़े और अहम फैसले लेते हुए कॉर्पोरेट और निवेश जगत के लिए नए नियमों का बड़ा ऐलान किया है। इनमें सबसे बड़ा परिवर्तन ओपन मार्केट शेयर बायबैक से जुड़े नियमों में हो सकता है , जिसके अंतर्गत कंपनियों को अब ज्यादा फ्लेसिबिलिटी मिलेगी।

SEBI के नए फैसले के मुताबिक, 1 अगस्त से कंपनियां स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से अपने शेयरों का बायबैक फिर से शुरू कर सकेंगी। इसके लिए 66 वर्किंग डेज की समय-सीमा तय की गई है। अब कंपनियां बिना किसी विशेष बायबैक विंडो के सीधे रेगुलर ट्रेडिंग सिस्टम के ज़रिये से अपने शेयर वापस खरीद सकेंगी। इससे प्रक्रिया न केवल आसान होगी, बल्कि कागजी कार्रवाई भी कम हो जाएगी।

बायबैक नियमों में बड़ा परिवर्तन

SEBI ने पहले 2025 में ओपन-मार्केट बायबैक सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया था। उस वक़्त यह कदम शेयरहोल्डर्स के बीच असमान व्यवहार और टैक्स से जुड़ी अनियमितताओं की चिंताओं के कारण उठाया गया था। लेकिन अब नए ढांचे में पारदर्शिता और दक्षता को ध्यान में रखते हुए इसे फिर से शुरू किया गया है।

नए नियमों का उद्देश्य कंपनियों को पूंजी आवंटन (capital allocation) के एक प्रभावी साधन के रूप में बायबैक को और ज्यादा आकर्षक बनाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बाजार में लिक्विडिटी बढ़ेगी और कंपनियों को अपने अतिरिक्त कैश का बेहतर प्रयोग करने का मौका मिलेगा।

बायबैक क्या है और क्यों है अहम?

शेयर बायबैक वह प्रक्रिया है जिसमें कोई कंपनी अपने ही शेयर बाजार से वापस खरीदती है। इससे बाजार में उपलब्ध कुल शेयरों की संख्या कम हो जाती है। कंपनियां आमतौर पर यह कदम तब उठाती हैं जब उनके पास अतिरिक्त नकदी होती है या उन्हें लगता है कि उनके शेयर का मूल्य कम आंका गया है।

बायबैक से निवेशकों का विश्वास बढ़ता है, प्रति शेयर आय (EPS) में सुधार होता है और कई बार शेयर की कीमतों को भी समर्थन मिलता है। यही वजह है कि इसे कॉर्पोरेट फाइनेंस का एक महत्वपूर्ण टूल माना जाता है।

अन्य वित्तीय क्षेत्रों में भी बड़े सुधार

SEBI ने केवल बायबैक ही नहीं, बल्कि कई अन्य वित्तीय क्षेत्रों में भी अहम सुधारों को मंजूरी दी है। इनमें म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज ट्रांसफर और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) से जुड़े नियम शामिल हैं।

म्यूचुअल फंड्स को राहत

नए नियमों के अंतर्गत म्यूचुअल फंड्स को अब इंट्रा-डे उधार लेने की अनुमति दी गई है। इससे फंड मैनेजर्स को कैश फ्लो और लिक्विडिटी मैनेजमेंट में ज्यादा लचीलापन मिलेगा। यह सुविधा विशेषकर सेटलमेंट, विदेशी मुद्रा देनदारियों और डेरिवेटिव पेमेंट से जुड़ी टाइमिंग समस्याओं को दूर करने में सहायता करेगी।

SEBI के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे के मुताबिक, यह कदम फंड मैनेजर्स को दैनिक लिक्विडिटी मिसमैच को बेहतर तरीके से संभालने में मदद करेगा। हालांकि, यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि दिन के अंत तक सभी उधार चुका दिए जाएं।

सिक्योरिटीज ट्रांसफर प्रक्रिया आसान

SEBI ने निवेशकों की मृत्यु के बाद सिक्योरिटीज ट्रांसफर (ट्रांसमिशन) प्रक्रिया को भी सरल बना दिया है। इसके अंतर्गत नॉमिनी और कानूनी वारिसों के लिए वित्तीय संपत्तियों पर दावा करना अब आसान और तेज होगा।

कम मूल्य वाले दावों के लिए ‘क्विक ट्रांसमिशन प्रोसेसिंग (QTP)’ नामक नई व्यवस्था शुरू की गई है। इसके अंतर्गत फिजिकल सिक्योरिटीज के लिए 10,000 रुपये तक और डीमैट सिक्योरिटीज के लिए 30,000 रुपये तक के मामलों में तेज निपटान किया जाएगा।

इसके अलावा, दस्तावेजी प्रक्रिया को आसान बनाते हुए ट्रांसमिशन की सीमा को बढ़ा दिया गया है, अब फिजिकल होल्डिंग्स के लिए 10 लाख रुपये और डीमैट होल्डिंग्स के लिए 30 लाख रुपये तक की प्रक्रिया सरल नियमों के तहत पूरी की जा सकेगी।

AIF सेक्टर को मिलेगा बढ़ावा

SEBI ने अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) के लिए ‘GARUDA’ नामक नया ग्रीन-चैनल सिस्टम भी मंजूर किया है। इसका सब से बड़ा मकसद फंड लॉन्च प्रक्रिया को तेज करना है। अब योग्य AIF स्कीम सिर्फ 10 वर्किंग डेज में फंड जुटाना शुरू कर सकेंगी, जबकि पहले इसमें लगभग 30 दिन लगते थे।

31 मार्च 2026 तक भारत में 1,849 AIF रजिस्टर्ड थे, जिनका कुल निवेश कमिटमेंट 15.74 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका था। नए नियमों से इस सेक्टर में पूंजी प्रवाह और निवेश गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है।

बाजार पर क्या होगा प्रभाव ?

विशेषज्ञों का मानना है कि SEBI के ये निर्णय भारतीय शेयर बाजार को अधिक पारदर्शी, तेज और निवेशक-अनुकूल बनाएंगे। बायबैक नियमों में ढील से कंपनियों को पूंजी प्रबंधन में सहायता मिलेगी, जबकि म्यूचुअल फंड और AIF सेक्टर में सुधार निवेशकों के लिए नए अवसर पैदा करेंगे।

कुल मिलाकर, SEBI के ये कदम भारतीय वित्तीय बाजार को आधुनिक और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माने जा रहे हैं।

Priya Singh Bisen
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Priya Singh Bisen

Priya Singh Bisen is a journalist with over five years of experience in the news and digital media industry. She covers a wide range of topics, including weather, lifestyle, health, politics, and international affairs. In addition to news writing, Priya has experience in news script writing, voice-overs, anchoring, field reporting, and social media management. She holds a Bachelor's degree in Mass Communication and a Master's degree in Advertising and Public Relations. Priya also enjoys writing, traveling, and playing sports, pursuits that reflect her curiosity and passion for exploring new perspectives.

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