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Shravan Kumar Vishwakarma: टेम्पो ड्राइवर से करोड़पति एयरलाइन मालिक! श्रवण कुमार की अनसुनी कहानी
Shravan Kumar Vishwakarma Wiki in Hindi: श्रवण कुमार विश्वकर्मा का जन्म कानपुर के एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। घर की आर्थिक हालत बहुत मजबूत नहीं थी।
Shankh Air Shravan Kumar Vishwakarma Wikipedia
Shravan Kumar Vishwakarma Wiki in Hindi: कहते हैं ना… अगर इरादे आसमान छूने के हों… तो छोटी गलियां भी रनवे बन जाती हैं… आज की कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं… ये कहानी है उत्तर प्रदेश के कानपुर के उस लड़के की… जो कभी सड़कों पर टेम्पो चलाता था… लोगों का सामान ढोता था… कंधों पर बोरे उठाता था… और आज… वही लड़का भारत की नई एयरलाइन लॉन्च करने जा रहा है। नाम है — श्रवण कुमार विश्वकर्मा। और उनकी एयरलाइन का नाम है — शंख एयर। एक ऐसा शख्स… जिसने गरीबी देखी… संघर्ष देखा… लेकिन सपने देखना कभी नहीं छोड़ा। और आज… कानपुर की गलियों से निकलकर… वो भारत के एविएशन सेक्टर में अपनी पहचान बनाने जा रहा है। ये सिर्फ एक बिजनेस स्टोरी नहीं है… ये उन करोड़ों युवाओं की कहानी है… जो छोटे शहरों से आते हैं… जिनके पास बड़े कॉलेज नहीं होते… अंग्रेजी नहीं होती… बैकग्राउंड नहीं होता… लेकिन सपना होता है। और जब सपना बड़ा हो तो टेम्पो का हैंडल पकड़ने वाला हाथ भी… एक दिन एयरलाइन का कंट्रोल संभाल सकता है।
श्रवण कुमार विश्वकर्मा का जन्म कानपुर के एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। घर की आर्थिक हालत बहुत मजबूत नहीं थी। ना कोई बिजनेस बैकग्राउंड… ना कोई करोड़ों की प्रॉपर्टी… ना कोई राजनीतिक पहुंच। बस एक आम परिवार… श्रवण का पढ़ाई में ज्यादा मन नहीं लगता था। उन्होंने खुद कई इंटरव्यू में कहा है कि उनका असली स्कूल सड़कें थीं। बसें… ट्रेनें… टेम्पो… ट्रक… यही उनकी यूनिवर्सिटी थी। बहुत कम उम्र में उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी। घर चलाने के लिए काम करना पड़ा। और यहीं से शुरू हुआ उनका असली संघर्ष। उन्होंने कानपुर की सड़कों पर टेम्पो चलाया। मजदूरी की। कई बार ऐसा हुआ कि पूरे दिन मेहनत के बाद भी जेब में बहुत कम पैसे आते थे। लेकिन एक चीज हमेशा उनके अंदर थी — कुछ बड़ा करना है…
हर संघर्ष करने वाले इंसान की जिंदगी में एक समय ऐसा आता है… जब लोग उसका मजाक उड़ाते हैं। श्रवण के साथ भी ऐसा हुआ। जब वो छोटे-मोटे काम करते थे… लोग कहते थे — ये क्या बड़ा करेगा? टेम्पो चलाने वाला क्या बिजनेस करेगा? लेकिन जिंदगी की सबसे बड़ी बात क्या है पता है? कई बार वही लोग… जो आपको देखकर हंसते हैं… एक दिन आपकी सफलता देखकर तालियां बजाते हैं। अब कहानी यहां से और दिलचस्प होती है। श्रवण ने सिर्फ नौकरी या टेम्पो चलाने तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने छोटे-छोटे बिजनेस शुरू करने की कोशिश की। लेकिन शुरुआती दौर में ज्यादातर काम फेल हो गए। पैसा डूबा। नुकसान हुआ। लोगों ने ताने मारे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। क्योंकि वो समझ चुके थे — असफलता आखिर नहीं होती… वो सिर्फ अगली कोशिश की तैयारी होती है।
फिर आया साल 2014। यही वो समय था… जब श्रवण ने सीमेंट के व्यापार में कदम रखा। यहीं से उनकी जिंदगी बदलनी शुरू हुई। उन्होंने मेहनत की… नेटवर्क बनाया… सप्लाई चेन समझी… और धीरे-धीरे बिजनेस बढ़ने लगा। इसके बाद उन्होंने TMT सरिया, माइनिंग और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में एंट्री की। धीरे-धीरे उनके पास ट्रकों का बड़ा बेड़ा तैयार हो गया। आज रिपोर्ट्स के मुताबिक उनके पास 400 से ज्यादा ट्रक हैं। यहीं से श्रवण सिर्फ “टेम्पो चालक” नहीं रहे… बल्कि एक बड़े कारोबारी बनते चले गए। कई लोग पैसा कमाकर रुक जाते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं… जो जिंदगी में कुछ ऐसा करना चाहते हैं… जिसे दुनिया याद रखे। श्रवण भी उन्हीं लोगों में से एक थे। उन्होंने सोचना शुरू किया — भारत में हवाई यात्रा इतनी महंगी क्यों है? मिडिल क्लास आदमी फ्लाइट से डरता क्यों है? एयरपोर्ट सिर्फ अमीरों की जगह क्यों मानी जाती है? और यहीं से पैदा हुआ — शंख एयर का सपना।
अब सोचिए… एक आदमी जिसने टेम्पो चलाया हो… वो एयरलाइन शुरू करने का सपना देख रहा है। ये आसान नहीं था। श्रवण ने करीब चार साल तक एविएशन सेक्टर को समझा।
NOC कैसे मिलता है?
DGCA के नियम क्या हैं?
एयरक्राफ्ट लीज कैसे होते हैं?
रूट परमिशन कैसे मिलती है?
उन्होंने हर चीज सीखी। और यही चीज उन्हें बाकी लोगों से अलग बनाती है। क्योंकि सपना देखना आसान है… लेकिन सपने के पीछे सालों तक मेहनत करना मुश्किल है।
फिर आया वो दिन… जब भारत सरकार ने शंख एयर को NOC यानी No Objection Certificate दे दिया। और यहीं से… कानपुर के लड़के का सपना… हकीकत में बदलना शुरू हो गया। देश में नई एयरलाइंस को मंजूरी मिली… लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा हुई — शंख एयर की। क्योंकि लोग एयरलाइन से ज्यादा… उस इंसान की कहानी सुन रहे थे… जो कभी टेम्पो चलाता था। अब बात करते हैं शंख एयर की। शुरुआत में कंपनी तीन Airbus A320 विमानों के साथ उड़ान शुरू करेगी। लखनऊ को दिल्ली… मुंबई… बेंगलुरु जैसे शहरों से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा यूपी के अंदरूनी शहर जैसे — गोरखपुर, वाराणसी, अयोध्या, चित्रकूट इन रूट्स पर भी फोकस रहेगा। श्रवण का विजन साफ है — हवाई यात्रा लग्जरी नहीं… जरूरत बननी चाहिए। आज एयरलाइन कंपनियां त्योहारों में टिकट के दाम आसमान पर पहुंचा देती हैं। लेकिन श्रवण का दावा है कि वो मिडिल क्लास को ध्यान में रखकर काम करेंगे। यानी… जो आदमी आज बस या ट्रेन से सफर करता है… वो भी फ्लाइट में बैठ सके। और शायद यही सोच… शंख एयर को बाकी कंपनियों से अलग बनाती है।
अब सवाल आता है… जो आदमी कभी टेम्पो चलाता था… आज उसकी लाइफ कैसी है? आज श्रवण करोड़ों के बिजनेसमैन हैं। रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर उनकी लाइफस्टाइल काफी चर्चा में रहती है। उनके पास लग्जरी गाड़ियां हैं… 21 से 22 लग्ज़री कारें है. उनके गैरेज में लेम्बोर्गिनी जैसी सुपरकार सहित कई अन्य हाई-एंड गाड़ियां मौजूद हैं...बड़ा बंगला है… बिजनेस नेटवर्क है… और अब अपनी एयरलाइन भी। लेकिन सबसे खास बात क्या है पता है? वो आज भी खुद को “कानपुर का लड़का” कहलाना पसंद करते हैं। यानी… सफलता आने के बाद भी उन्होंने अपनी जड़ें नहीं छोड़ीं। अब एक दिलचस्प बात। एयरलाइन का नाम “शंख एयर” क्यों रखा गया? श्रवण ने बताया कि उनके पिता रोज शंख बजाते थे। और उनकी पुरानी ट्रेडिंग फर्म का नाम भी “शंख” था। यानी इस एयरलाइन में सिर्फ बिजनेस नहीं… भावनाएं भी जुड़ी हैं।
श्रवण बार-बार एक बात कहते हैं — विमान बस एक ट्रांसपोर्ट है… जैसे बस… ट्रेन… या टेम्पो। सोचिए… एक आदमी जिसने खुद टेम्पो चलाया हो… वो हवाई जहाज को भी आम आदमी का साधन बनाना चाहता है। यही उनकी सोच उन्हें अलग बनाती है। कंपनी का प्लान है कि आने वाले 2-3 साल में 15 से 25 विमान फ्लीट में शामिल किए जाएं। और 2028-29 तक इंटरनेशनल रूट्स भी शुरू हो सकते हैं। यानी… कानपुर से शुरू हुआ सपना… अब दुनिया तक पहुंचने वाला है। श्रवण कुमार विश्वकर्मा की कहानी सिर्फ एक आदमी की सफलता नहीं है। ये कहानी बताती है कि — अगर आपके पास डिग्री नहीं है… तो भी आप सफल हो सकते हैं। अगर आपके पास पैसा नहीं है… तो भी आप आगे बढ़ सकते हैं। अगर लोग आपका मजाक उड़ाते हैं… तो भी आप जीत सकते हैं। बस… हार नहीं माननी चाहिए। कानपुर की गलियों में टेम्पो चलाने वाला वो लड़का… आज हजारों लोगों को आसमान में उड़ाने की तैयारी कर रहा है। ये सिर्फ श्रवण कुमार विश्वकर्मा की कहानी नहीं है… ये उस भारत की कहानी है जहां छोटे शहरों के बच्चे अब सिर्फ नौकरी नहीं… पूरी इंडस्ट्री बदलने का सपना देख रहे हैं। और शायद… यही नए भारत की सबसे बड़ी ताकत है। क्योंकि सपने बड़े शहरों में नहीं पैदा होते… सपने पैदा होते हैं हौसले में।


