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SIP Returns Calculation: एसआईपी में 5,000 रुपये हर महीने डालने से 20 साल में कितना पैसा बन सकता है?
SIP Returns Calculation: हर महीने ₹5,000 की SIP 20 साल में कितनी रकम बना सकती है? 10%, 12% और 15% रिटर्न के अनुमान के साथ जानिए ₹12 लाख निवेश से ₹50 लाख तक पहुंचने का पूरा गणित।
SIP Returns Calculation
SIP Returns Calculation: हर महीने 5,000 रुपये अलग रखना बहुत बड़ी रकम नहीं लगता। किसी के लिए यह महीने में कुछ दिन बाहर खाने के खर्च के बराबर हो सकता है, किसी के लिए खरीदारी का बजट और किसी के लिए छोटी-सी बचत। लेकिन अगर यही 5,000 रुपये हर महीने बिना रुके 20 साल तक निवेश किए जाएं तो कहानी काफी बदल जाती है। कंपाउंडिंग की ताकत की वजह से आपकी छोटी-छोटी मासिक रकम समय के साथ एक बड़ा फंड बना सकती है।
मिसाल के तौर पर अगर 12 प्रतिशत सालाना औसत रिटर्न मानें तो 5,000 रुपये की मासिक एसआईपी (SIP) 20 साल में करीब 50 लाख रुपये का फंड बना सकती है। इसमें आपका कुल निवेश सिर्फ 12 लाख रुपये होगा, जबकि बाकी करीब 38 लाख रुपये बाजार से मिले रिटर्न और उस रिटर्न पर आगे मिलने वाली कमाई का असर होगा। लेकिन यहां शुरुआत में ही एक बात साफ कर देना जरूरी है कि 12 प्रतिशत कोई गारंटीड रिटर्न नहीं है। म्यूचुअल फंड (mutual fund) में रिटर्न बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करता है और वास्तविक नतीजा इससे कम या ज्यादा हो सकता है।
20 साल में आपकी जेब से कितना पैसा जाएगा?
गणित बहुत सीधा है। हर महीने 5,000 रुपये निवेश करने हैं। एक साल में 12 महीने होते हैं, इसलिए साल भर में 60,000 रुपये निवेश होंगे। 20 साल में 60,000 रुपये को 20 से गुणा करें तो कुल रकम 12 लाख रुपये होती है। यानी 20 साल की पूरी अवधि में आपने अपनी जेब से सिर्फ 12 लाख रुपये लगाए।
अब मान लीजिए इस निवेश (investment) पर औसतन 12 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिलता रहा। तब कंपाउंडिंग (compouding) की वजह से आपका फंड करीब 50 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। यानी करीब 38 लाख रुपये का अंतर आपके मूल निवेश और अंतिम रकम के बीच होगा। यही वह जगह है जहां एसआईपी (SIP) का असली खेल शुरू होता है। आपने हर महीने सिर्फ 5,000 रुपये लगाए, लेकिन समय ने उस रकम को बार-बार बढ़ने का मौका दिया।
कंपाउंडिंग आखिर करती क्या है?
कंपाउंडिंग को आसान भाषा में समझें तो यह ‘कमाई पर भी कमाई’ का खेल है। मान लीजिए आपने 1 लाख रुपये लगाए और एक साल में उस पर 10,000 रुपये की कमाई हुई। अब अगले साल अगर आपकी रकम 1.10 लाख रुपये है और उस पर फिर 10 प्रतिशत रिटर्न मिलता है तो कमाई सिर्फ शुरुआती 1 लाख पर नहीं, बल्कि बढ़ी हुई रकम पर होगी। एसआईपी में भी यही प्रक्रिया लंबे समय तक चलती रहती है। हर महीने नई रकम निवेश होती है और पुरानी रकम से हुई कमाई भी आगे कमाने लगती है। शुरुआती कुछ वर्षों में यह असर बहुत बड़ा नहीं दिखाई देता। लेकिन 10, 15 और 20 साल के बाद यही कंपाउंडिंग काफी बड़ा अंतर पैदा कर सकती है। इसीलिए निवेश में समय बहुत महत्वपूर्ण है।
अगर रिटर्न 10 प्रतिशत रहा तो?
12 प्रतिशत का अनुमान सिर्फ एक उदाहरण है। असल बाजार में हर साल एक जैसा रिटर्न नहीं मिलता। इसलिए अलग-अलग रिटर्न मानकर देखना ज्यादा सही है। अगर 5,000 रुपये की मासिक एसआईपी पर 20 साल तक औसतन 10 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिलता है तो अंतिम फंड करीब 38 लाख रुपये के आसपास हो सकता है। आपने फिर भी अपनी जेब से 12 लाख रुपये ही लगाए होंगे। बाकी करीब 26 लाख रुपये निवेश से हुई कमाई होगी। यानी 10 प्रतिशत और 12 प्रतिशत के बीच सिर्फ 2 प्रतिशत का अंतर है, लेकिन 20 साल की लंबी अवधि में अंतिम रकम में करीब 12 लाख रुपये का अंतर पैदा हो सकता है। यही वजह है कि लंबी अवधि में रिटर्न की दर छोटी दिखने वाली चीज नहीं होती।
15 प्रतिशत रिटर्न मिला तो क्या होगा?
अब थोड़ा ज्यादा रिटर्न मानकर देखें। अगर 20 साल तक औसतन 15 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिलता है तो 5,000 रुपये की मासिक एसआईपी से करीब 75 लाख रुपये के आसपास का फंड बन सकता है। यहां भी आपका कुल निवेश सिर्फ 12 लाख रुपये है। यानी 63 लाख रुपये के आसपास की रकम निवेश से मिलने वाली कमाई और कंपाउंडिंग से बन सकती है। लेकिन यहां सावधानी बहुत जरूरी है। 15 प्रतिशत रिटर्न को पक्का मानना गलत होगा। बाजार आधारित निवेश में ऐसा रिटर्न मिल भी सकता है और नहीं भी। किसी एक साल में बहुत ज्यादा रिटर्न मिल सकता है, तो किसी दूसरे साल बाजार गिर सकता है। इसलिए एसआईपी का हिसाब हमेशा अनुमान के तौर पर देखना चाहिए, गारंटी के तौर पर नहीं।
5,000 रुपये की एसआईपी में समय सबसे बड़ा हथियार क्यों है?
अब मान लीजिए दो लोग हैं। एक व्यक्ति 25 साल की उम्र में हर महीने 5,000 रुपये निवेश करना शुरू करता है और दूसरा 35 साल की उम्र में यही काम शुरू करता है। दोनों की मासिक एसआईपी समान है। दोनों को समान औसत रिटर्न भी मिलता है। लेकिन 25 साल वाला व्यक्ति 10 साल ज्यादा निवेश करता है। इन 10 वर्षों में सिर्फ नई रकम ही नहीं जुड़ती, पुरानी रकम को भी बढ़ने का ज्यादा समय मिलता है। यही वजह है कि निवेश की दुनिया में अक्सर कहा जाता है कि “समय बाजार में रहने का” बहुत महत्वपूर्ण है। छोटी रकम को लंबा समय देना कई बार बड़ी रकम को कम समय देने से ज्यादा असरदार हो सकता है।
अगर एसआईपी हर साल बढ़ा दी जाए तो?
मान लीजिए आज आप 5,000 रुपये महीना निवेश कर सकते हैं। लेकिन आपकी आय हर साल बढ़ रही है। तो क्या जरूरी है कि आप अगले 20 साल तक भी सिर्फ 5,000 रुपये ही निवेश करते रहें? ऐसा कतई नहीं है। आप हर साल एसआईपी को कुछ प्रतिशत बढ़ा सकते हैं। इसे स्टेप-अप एसआईपी कहा जाता है। मान लीजिए आप हर साल अपनी एसआईपी 10 प्रतिशत बढ़ाते हैं। शुरुआत 5,000 रुपये से होगी। अगले साल यह 5,500 रुपये हो जाएगी। उसके बाद 6,050 रुपये। फिर 6,655 रुपये। यानी निवेश धीरे-धीरे आपकी आय के साथ बढ़ता जाएगा। अगर ऐसी एसआईपी पर लंबे समय तक अच्छा औसत रिटर्न मिलता है तो अंतिम रकम सामान्य 5,000 रुपये की स्थिर एसआईपी से काफी ज्यादा हो सकती है। उदाहरण के लिए 12 प्रतिशत औसत रिटर्न और हर साल 10 प्रतिशत एसआईपी बढ़ाने पर 20 साल में फंड लगभग 1 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच सकता है। वास्तविक रकम निवेश की तारीख, गणना पद्धति और रिटर्न के आधार पर अलग हो सकती है। यहां एक बात बहुत महत्वपूर्ण है, इस स्थिति में आपका कुल निवेश भी 12 लाख रुपये नहीं रहेगा, क्योंकि हर साल आप निवेश की रकम बढ़ा रहे हैं। यानी बड़ा फंड सिर्फ कंपाउंडिंग से नहीं, बल्कि बढ़ते निवेश से भी बनेगा।
20 साल बाद 50 लाख रुपये की आज के समय में कितनी कीमत होगी?
मान लीजिए आपने 20 साल बाद 50 लाख रुपये का फंड बना लिया। सुनने में यह बहुत बड़ी रकम है। लेकिन 20 साल बाद 50 लाख रुपये की खरीदने की ताकत आज के 50 लाख रुपये जैसी नहीं होगी। इसका कारण महंगाई है। अगर महंगाई लंबे समय तक औसतन 6 प्रतिशत रही तो चीजों की कीमतें काफी बढ़ जाएंगी। आज जिस चीज के लिए 100 रुपये लगते हैं, 20 साल बाद उसके लिए काफी ज्यादा पैसे देने पड़ सकते हैं। इसलिए निवेश का लक्ष्य सिर्फ कितने रुपये बनेंगे नहीं होना चाहिए। यह भी देखना चाहिए कि उस समय उन पैसों से कितना खरीदा जा सकेगा। यही वजह है कि रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई या घर खरीदने जैसे लंबे लक्ष्य के लिए सिर्फ वर्तमान रकम को देखकर निवेश तय करना सही नहीं है।
क्या 5,000 रुपये की एसआईपी से करोड़पति बन सकते हैं?
सिर्फ 5,000 रुपये की स्थिर मासिक एसआईपी से बहुत लंबी अवधि में बड़ा फंड बन सकता है, लेकिन 20 साल में 1 करोड़ रुपये तक पहुंचने के लिए रिटर्न काफी ऊंचा होना पड़ेगा। इसके बजाय अगर व्यक्ति हर साल अपनी एसआईपी बढ़ाता रहे तो 1 करोड़ रुपये का लक्ष्य ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है। यानी करोड़पति बनने का रास्ता सिर्फ ज्यादा रिटर्न खोजने से नहीं निकलता। निवेश की रकम को धीरे-धीरे बढ़ाना भी बहुत महत्वपूर्ण है। मान लीजिए आपकी आय हर साल 8-10 प्रतिशत बढ़ती है। तो अपनी एसआईपी भी उसी अनुपात में बढ़ाने की कोशिश की जा सकती है। शुरुआत 5,000 रुपये से हुई है तो कुछ वर्षों बाद यह 8,000, 10,000 या 15,000 रुपये महीना हो सकती है। इसी तरह आपका निवेश भी आपकी आय के साथ बढ़ता रहेगा।
क्या एसआईपी में हर महीने पैसा डालना जरूरी है?
एसआईपी का फायदा नियमित निवेश में है। आप हर महीने एक तय रकम निवेश करते हैं। बाजार ऊपर हो या नीचे, निवेश चलता रहता है। जब बाजार नीचे होता है तो उसी रकम से आपको ज्यादा यूनिट मिल सकती हैं। जब बाजार ऊपर होता है तो कम यूनिट मिलती हैं। लंबे समय तक ऐसा करते रहने से खरीदारी अलग-अलग कीमतों पर होती रहती है। इसे आम तौर पर रुपये की औसत लागत का फायदा कहा जाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि एसआईपी बाजार गिरने पर नुकसान से बचा लेती है। म्यूचुअल फंड बाजार से जुड़े निवेश हैं और नुकसान की संभावना रहती है। एसआईपी सिर्फ निवेश करने का तरीका है, कोई गारंटीड रिटर्न देने वाला उत्पाद नहीं।
क्या 20 साल तक एसआईपी चलाना आसान है?
कागज पर यह बहुत आसान लगता है, हर महीने 5,000 रुपये डालिए और भूल जाइए। असल जिंदगी में सबसे बड़ी चुनौती बाजार नहीं, इंसान का व्यवहार होता है। बाजार तेजी से बढ़ता है तो लोग ज्यादा पैसा लगाने के बारे में सोचते हैं। बाजार गिरता है तो कई लोग डरकर एसआईपी बंद कर देते हैं। लेकिन लंबी अवधि के निवेश में उतार-चढ़ाव सामान्य है। अगर आपका लक्ष्य 15-20 साल दूर है तो बीच के कुछ महीनों या एक-दो साल की गिरावट को देखकर पूरी रणनीति बदल देना नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए एसआईपी शुरू करने से ज्यादा जरूरी है उसे लंबे समय तक जारी रखने की क्षमता।
5,000 रुपये की एसआईपी का असली फायदा क्या है?
अगर कोई व्यक्ति हर महीने 5,000 रुपये निवेश करता है तो 20 साल में उसकी जेब से 12 लाख रुपये निकलेंगे। 10 प्रतिशत के आसपास औसत रिटर्न मिलने पर यह रकम करीब 38 लाख रुपये हो सकती है। 12 प्रतिशत के अनुमान पर करीब 50 लाख रुपये और 15 प्रतिशत पर करीब 75 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। लेकिन इन आंकड़ों को देखकर सबसे महत्वपूर्ण सीख यह नहीं है कि 12 प्रतिशत रिटर्न पर 50 लाख मिलेंगे। असल सीख यह है कि समय और नियमित निवेश छोटी रकम को बड़ा बना सकते हैं। अगर आप 5,000 रुपये महीना निवेश कर सकते हैं तो शुरुआत करने के लिए किसी बड़ी रकम का इंतजार जरूरी नहीं है। बाद में आय बढ़ने के साथ निवेश भी बढ़ाया जा सकता है। 20 साल में आपकी कुल जमा रकम 12 लाख रुपये हो सकती है, लेकिन कंपाउंडिंग उस रकम को कई गुना बड़ा करने की कोशिश करती है। और अगर आप हर साल अपनी एसआईपी बढ़ाते रहें तो यही तस्वीर और बदल सकती है। इसलिए एसआईपी में सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि “मैं हर महीने कितने रुपये से शुरुआत करूं?”बड़ा सवाल यह है कि मैं कितने साल तक लगातार निवेश कर सकता हूं और अपनी बढ़ती आय के साथ इस रकम को कितना बढ़ा सकता हूं? क्योंकि निवेश में बड़ी रकम बनाने का सबसे आसान रास्ता अक्सर एक ही दिन में बहुत पैसा लगाना नहीं होता। छोटी रकम से शुरुआत, लंबा समय और लगातार बढ़ता निवेश - यही कंपाउंडिंग का असली खेल है।


