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टाटा ग्रुप में संकट - सरकार ने टाटा ट्रस्ट से कहा, 'स्थिरता बहाल करें'
टाटा ग्रुप में नेतृत्व को लेकर उठ रहे मतभेद अब केवल कंपनियों तक सीमित नहीं हैं। सरकार ने टाटा संस के संचालन में स्थिरता बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाने का निर्देश दिया है।
Tata Group Conflict: देश के सबसे बड़े और प्रसिद्ध कारोबारी घरानों में से एक टाटा ग्रुप में इन दिनों आंतरिक मतभेदों की खबरें सामने आई हैं। यह मामला इतना गंभीर माना जा रहा है कि सरकार ने भी इसे अपनी निगरानी में लिया है। इस विवाद के चलते टाटा ग्रुप की स्थिरता और नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं। सरकार ने इस मामले को गंभीरता से देखने के लिए गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक बैठक बुलाई। इस बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और टाटा ग्रुप के शीर्ष अधिकारी भी मौजूद थे। सरकार ने टाटा नेतृत्व से इस मतभेद को जल्द और प्रभावी ढंग से सुलझाने का निर्देश दिया ताकि समूह की कार्यप्रणाली और देश की आर्थिक सुरक्षा पर कोई असर न पड़े।
टाटा ट्रस्ट में दो गुट और बोर्ड विवाद
टाटा ट्रस्ट के भीतर दो अलग-अलग गुट बन गए हैं। पहला गुट नोएल टाटा, वेणु श्रीनिवासन और कुछ अन्य सदस्य का है, जो वर्तमान व्यवस्था को बनाए रखने का पक्षधर है। दूसरा गुट मेहली मिस्त्री, प्रमित झावेरी, जहांगीर एचसी जहांगीर और डेरियस खंबाटा का है, जो बदलाव चाहते हैं। इस गुटबाजी ने टाटा संस के बोर्ड में सीट आवंटन और शासन संरचना को प्रभावित किया है।
यह विवाद रतन टाटा के निधन के ठीक एक साल बाद सामने आया है। रतन टाटा का समूह पर अत्यधिक प्रभाव था, और उनके जाने के बाद नेतृत्व और निर्णयों में असहमति उभर रही है।
सरकार की बैठक और आदेश
सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर लगभग एक घंटे चली इस बैठक में टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा, वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन, टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन और ट्रस्टी डेरियस खंबाटा शामिल हुए।
इस बैठक में सरकार ने टाटा समूह के नेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए कि समूह के अंदर चल रहे मतभेद किसी भी हालत में टाटा संस के शासन और प्रबंधन पर असर न डालें। साथ ही, इस विवाद को जल्दी और प्रभावी तरीके से सुलझाया जाए। अगर आवश्यक हो तो ऐसे ट्रस्टी को हटाया जाए जो समूह की स्थिरता और कामकाज को प्रभावित कर रहे हों।
सरकार की चिंता और टाटा ग्रुप की स्थिति
सरकार को चिंता है कि ट्रस्टियों के बीच मतभेद टाटा समूह के कामकाज और देश की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। इसलिए सरकार ने टाटा नेतृत्व को स्पष्ट आदेश दिया है कि वे इस विवाद को शांतिपूर्ण और बिना किसी तनाव के हल करें।
बैठक के बाद, टाटा ग्रुप के शीर्ष अधिकारी मुंबई लौटने से पहले एक छोटी आंतरिक चर्चा भी कर चुके हैं। माना जा रहा है कि वे रतन टाटा की पहली पुण्यतिथि पर आयोजित होने वाले स्मरण समारोह में भी हिस्सा लेंगे।
टाटा ग्रुप का महत्व
टाटा ग्रुप की स्थापना 1868 में हुई थी और यह देश के कई उद्योग क्षेत्रों में अग्रणी है। इसकी प्रमुख कंपनियां हैं: टीसीएस, टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, इंडियन होटल्स ग्रुप और एअर इंडिया। इनका देश और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ा प्रभाव है। समूह की स्थिरता और नेतृत्व में एकरूपता व्यवसाय और देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।


