TRENDING TAGS :
UPI Charges: UPI पर लगेगा चार्ज? अशनीर ग्रोवर के बाद ये दिग्गज भी भड़के, बोले- ‘टाटा, बाय-बाय’
UPI Charges: 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से ज्यादा के कुछ P2M भुगतान पर 0.4% MDR लागू होगा। अशनीर ग्रोवर, नितिन कामथ और दीपक शेनॉय ने इसके असर पर सवाल उठाए हैं।
UPI Charges: 0.4% MDR From October 15, Ashneer Grover and Nithin Kamath Raise Concerns
UPI Charges: यूपीआई के नियमों में बदलाव को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है। इस नए बदलाव को लेकर पक्ष के साथ ही साथ असहमति के सुर बुलंद हो रहे हैं। वजह है 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ व्यापारी भुगतान पर लगने वाला मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR। इस मुद्दे पर भारतपे के पूर्व को-फाउंडर अशनीर ग्रोवर ने सरकार की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर UPI पर शुल्क लगना शुरू हुआ तो लोग फिर से कैश की तरफ जा सकते हैं। उनके अलावा Zerodha के को-फाउंडर नितिन कामथ, Capitalmind के फाउंडर दीपक शेनॉय और कारोबारी संगठनों ने भी अलग-अलग वजहों से इस व्यवस्था पर चिंता जताई है।
15 अक्टूबर से क्या बदलने वाला है?
नई व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के पात्र Person-to-Merchant यानी P2M UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है। वहीं छोटे व्यापारियों की एक श्रेणी, जिसके UPI के जरिए मासिक कलेक्शन 1 लाख रुपये से कम है, उसे अनिवार्य शून्य MDR की सुविधा दी गई है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि यह शुल्क सीधे ग्राहक से लेने के लिए नहीं है। व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P भुगतान भी इस MDR के दायरे से बाहर रहेगा। कुछ खास क्षेत्रों, जैसे रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और ईंधन आदि के लिए अलग फ्लैट शुल्क का प्रावधान किया गया है।
अशनीर ग्रोवर बोले- ‘टाटा, बाय-बाय’ कह दीजिए
इस व्यवस्था पर अशनीर ग्रोवर की प्रतिक्रिया सबसे ज्यादा चर्चा में है। उन्होंने टीवी इंटरव्यू में सवाल उठाया कि जो सिस्टम पहले से तेजी से चल रहा है, उसमें शुल्क लगाने की जरूरत क्यों पड़ी। उनका कहना है कि UPI की सबसे बड़ी ताकत उसका आसान और मुफ्त होना है।
ग्रोवर ने यह भी तर्क दिया कि 2,000 रुपये की सीमा से ऊपर के भुगतान संख्या के लिहाज से कम हो सकते हैं, लेकिन कुल भुगतान मूल्य में उनकी हिस्सेदारी काफी बड़ी है। उनके मुताबिक व्यापारी पर आने वाला खर्च आखिरकार किसी न किसी रूप में ग्राहक तक पहुंच सकता है।
उन्होंने यह आशंका भी जताई कि व्यापारी ग्राहकों को छोटे-छोटे भुगतान करने के लिए कह सकते हैं या कुछ मामलों में कैश को प्राथमिकता दे सकते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि अगर UPI के लिए पैसे लेने की शुरुआत हुई तो इसे ‘टाटा, बाय-बाय’ कहने की नौबत आ सकती है।
नितिन कामथ ने ब्रोकिंग को लेकर उठाया सवाल
Zerodha के को-फाउंडर नितिन कामथ ने खास तौर पर निवेश और ब्रोकिंग से जुड़े UPI भुगतान पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि किसी ग्राहक द्वारा ब्रोकर के खाते में पैसा ट्रांसफर करने पर हर बार ट्रेड होना जरूरी नहीं है। ऐसे में अगर ट्रांसफर पर MDR लगता है तो ब्रोकर को बिना किसी आय के भी लागत उठानी पड़ सकती है।
कामथ ने ब्रोकिंग क्षेत्र के लिए कम दर और छोटी अधिकतम सीमा जैसे विकल्प का सुझाव दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की लागत को ब्रोकिंग कंपनियां हमेशा अपने स्तर पर ग्रहण नहीं कर सकतीं।
दीपक शेनॉय ने म्यूचुअल फंड पर जताई चिंता
Capitalmind के फाउंडर दीपक शेनॉय ने म्यूचुअल फंड और निवेश से जुड़े भुगतान के संदर्भ में MDR के असर पर सवाल उठाया है। उनका तर्क है कि कम लागत वाले म्यूचुअल फंड में प्रति निवेश कम कमाई होती है। ऐसे में प्रतिशत आधारित शुल्क कुछ परिस्थितियों में फंड के लिए मिलने वाली कमाई से भी ज्यादा हो सकता है।उनकी चिंता मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि निवेश क्षेत्र में बड़ी रकम के भुगतान पर भले ही MDR की दर कम हो, लेकिन बड़ी राशि के कारण वास्तविक लागत बढ़ सकती है।
रिटेलर्स एसोसिएशन ने कैश की ओर लौटने की चेतावनी दी
Retailers Association of India यानी RAI ने भी नए MDR को लेकर चिंता जताई है। संगठन के CEO कुमार राजगोपालन के मुताबिक छोटे व्यापारी यह सोच सकते हैं कि बड़े भुगतान के लिए UPI स्वीकार किया जाए या कैश लिया जाए। संगठन का कहना है कि इससे डिजिटल भुगतान की रफ्तार और औपचारिक अर्थव्यवस्था में लेनदेन की ट्रेसबिलिटी प्रभावित हो सकती है। RAI ने UPI के सामान्य बैंक-टू-बैंक भुगतान और क्रेडिट आधारित भुगतान को अलग-अलग देखने की मांग की है। संगठन का कहना है कि सामान्य UPI भुगतान की लागत को अलग तरीके से देखा जाना चाहिए और छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ना चाहिए।
कपड़ा कारोबारियों ने समय को लेकर उठाए सवाल
Clothing Manufacturers Association of India यानी CMAI ने भी इस फैसले के समय को लेकर चिंता जताई है। संगठन के अध्यक्ष संतोष कटारिया के मुताबिक त्योहारी सीजन कारोबारियों के लिए बेहद अहम होता है और इसी समय डिजिटल भुगतान की लागत बढ़ने से मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि UPI ने खपत और कारोबार को औपचारिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, इसलिए इसकी लागत में बदलाव को सावधानी से लागू किया जाना चाहिए।
ग्राहक को सीधे कितना चार्ज देना होगा?
फिलहाल उपलब्ध नियमों के मुताबिक सामान्य ग्राहक को हर UPI भुगतान पर अलग से शुल्क नहीं देना है। 2,000 रुपये तक के पात्र व्यापारी भुगतान मुफ्त रहेंगे और P2P भुगतान भी मुफ्त रहेगा। विवाद मुख्य रूप से उस MDR को लेकर है, जो पात्र 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी भुगतान पर व्यापारी पक्ष से लिया जाएगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक बहस सिर्फ इस बात की नहीं है कि ग्राहक से सीधे पैसा लिया जाएगा या नहीं। असली सवाल यह है कि व्यापारी पर आने वाली नई लागत का असर कारोबार, कीमतों, भुगतान के तरीके और डिजिटल लेनदेन की आदतों पर आगे कितना पड़ता है।


