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UPI Charges: दोस्त को ₹5,000 भेजें या दुकान पर करें पेमेंट, दोनों में इतना बड़ा फर्क! UPI का नया नियम जानिए
UPI Charges: ₹5,000 दोस्त को भेजने और दुकान पर पेमेंट करने में क्या फर्क है? जानें P2P और P2M UPI ट्रांजैक्शन पर नए MDR नियम और ग्राहक पर असर।
UPI Charges: ₹5,000 to a Friend vs Merchant Payment—What Changes?
UPI Charges:आजकल दोस्त को पैसे भेजने हों, घर का खर्च बांटना हो या दुकान पर सामान खरीदना हो, UPI लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। लेकिन अब ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट को लेकर अब एक कंफ्यूजन तेजी से सामने आ रहा है कि क्या ₹5,000 भेजने पर भी चार्ज देना पड़ेगा? तो आपको बता दें कि, यह ट्रांजेक्शन इस बात पर निर्भर करता है कि पैसा किसे भेज रहे हैं। अगर ₹5,000 किसी दोस्त या परिवार के सदस्य को भेज रहे हैं तो यह P2P यानी Person-to-Person पेमेंट है और इस पर कोई UPI चार्ज नहीं लगेगा। वहीं किसी दुकान या बिजनेस को ₹5,000 का भुगतान करने पर यह P2M यानी Person-to-Merchant ट्रांजैक्शन होगा, जिस पर 15 अक्टूबर 2026 से नया MDR नियम लागू होगा। इसका चार्ज ग्राहक से नहीं लिया जाएगा।
दोस्त को ₹5,000 भेजेंगे तो खाते से सिर्फ ₹5,000 ही कटेंगे
इस नए नियम के अनुसार यदि आपको अपने दोस्त को ₹5,000 भेजने हैं। आपने उसका UPI ID, मोबाइल नंबर या बैंक अकाउंट चुनकर पेमेंट कर दिया। यह P2P ट्रांजैक्शन है।
नए नियम में भी P2P UPI पेमेंट पर कोई MDR नहीं लगाया गया है। यानी ₹5,000 भेजने पर आपके खाते से ₹5,000 ही डेबिट होंगे और सामने वाले को ₹5,000 ही मिलेंगे। रकम चाहे ₹500 हो, ₹5,000 हो या इससे ज्यादा, P2P ट्रांजैक्शन को शुल्क से बाहर रखा गया है।
यानी सिर्फ ₹2,000 की सीमा देखकर यह मान लेना कि ₹2,000 से ऊपर हर UPI पेमेंट पर ग्राहक को चार्ज देना पड़ेगा, पूरी तरह से गलत है। दुकान पर ₹5,000 का सामान खरीदेंगे तो मामला अलग होगा
अब दूसरे उदाहरण के अनुसार यदि आपने किसी दुकान से ₹5,000 का सामान खरीदा और दुकानदार के UPI QR कोड पर भुगतान किया। यह P2M यानी Person-to-Merchant पेमेंट है।
NPCI के नए MDR फ्रेमवर्क के मुताबिक 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के निर्धारित P2M UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होगा। ₹5,000 के भुगतान पर 0.4% के हिसाब से MDR ₹20 बनता है। लेकिन यह ₹20 ग्राहक से अलग से वसूलने का चार्ज नहीं है। MDR मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम के भीतर लगाया जाता है।
ग्राहक को ₹5,000 के पेमेंट पर ₹20 अलग से नहीं देने होंगे
यहां सबसे जरूरी बात यही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR ग्राहक से नहीं लिया जाएगा। यानी अगर आपने दुकान पर ₹5,000 का UPI पेमेंट किया है तो आपको सामान्य स्थिति में ₹5,020 का भुगतान करने के लिए नहीं कहा जा सकता सिर्फ इसलिए कि ट्रांजैक्शन ₹2,000 से ज्यादा है।
MDR भुगतान व्यवस्था में शामिल संस्थाओं के बीच बांटा जाता है। इसका मकसद UPI के पेमेंट इकोसिस्टम, बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और ऐप प्रदाताओं से जुड़े खर्चों को सपोर्ट करना है। सरकार ने इसे टैक्स या सरकार/NPCI द्वारा सीधे वसूला जाने वाला शुल्क नहीं बताया है।
₹2,000 तक के मर्चेंट UPI पेमेंट भी रहेंगे फ्री
नए ढांचे में ₹2,000 तक के P2M UPI पेमेंट पर MDR नहीं लगेगा। सरकार के मुताबिक छोटे व्यापारियों के लिए भी अलग राहत रखी गई है। UPI QR के जरिए हर महीने ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों को P2PM श्रेणी के तहत जीरो MDR का लाभ जारी रहेगा। यही वजह है कि रोजमर्रा के छोटे UPI पेमेंट पर आम ग्राहकों और छोटे दुकानदारों पर सीधा असर सीमित रखा गया है।
96% P2M ट्रांजैक्शन नहीं होंगे नए MDR से प्रभावित
वित्त मंत्रालय के FAQ के मुताबिक ₹2,000 तक के छोटे P2M लेनदेन पर कोई MDR नहीं लगेगा। ऐसे लेनदेन कुल P2M ट्रांजैक्शन की मात्रा का 95% से अधिक हिस्सा हैं।
इसके अलावा पात्र छोटे व्यापारियों को भी जीरो-MDR व्यवस्था का लाभ मिलता रहेगा। इसलिए रोजमर्रा में होने वाले छोटे UPI पेमेंट जैसे किराना, चाय, सब्जी या दूसरे छोटे खर्च पर इस बदलाव का सीधा असर नहीं पड़ेगा। वहीं रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और कृषि इनपुट जैसे कुछ जरूरी और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों में ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर ₹5 का फ्लैट MDR रखा गया है। वहीं म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉकब्रोकर और डीलर से जुड़े पेमेंट के लिए 0.02% MDR का प्रावधान है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 है।
इसलिए UPI को लेकर सबसे जरूरी बात यह है कि ₹2,000 से ज्यादा की रकम भेजने भर से ग्राहक पर कोई नया UPI चार्ज नहीं लग रहा है। असली बदलाव मर्चेंट पेमेंट के MDR ढांचे में हुआ है, जिसका असर मुख्य रूप से भुगतान स्वीकार करने वाले कारोबार और पेमेंट इकोसिस्टम पर पड़ेगा।


