UPI Payment Charge: ₹2,000 से ऊपर पेमेंट पर लगेगा 0.3% MDR? जानें पूरा मामला

UPI Payment Charge को लेकर बड़ा बदलाव चर्चा में है। ₹2,000 से ऊपर कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.3% MDR का प्रस्ताव सामने आया है। जानें आम यूजर पर क्या असर होगा।

Jyotsana Singh
Published on: 21 Aug 2026 2:20 PM IST
UPI Payment Charge: Will 0.3% MDR Apply Above ₹2,000? Heres What Changes
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UPI Payment Charge: Will 0.3% MDR Apply Above ₹2,000? Here's What Changes

UPI Payment Charge: भारत में अब करेंसी के लेन-देन का तरीका स्क्रीन तक सिमट कर रह चुका है। अभी तक पैसे जहां लोगों की पॉकेट में रखे बटुए में मौजूद रहते थे वहीं अब अदृश्य रूप में डिजिटल करेंसी में तब्दील हो चुके हैं। अब UPI समाज के हर वर्ग के बीच रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। वहीं अब रिपोर्ट्स के अनुसार UPI आने वाले दिनों में एक बड़े बदलाव से गुजर सकता है। अगर सरकार के सामने मौजूद प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो ₹2,000 से अधिक के कुछ UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर करीब 0.3% Merchant Discount Rate यानी MDR लगाया जा सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि UPI से पैसे भेजने या पेमेंट करने वाले आम लोगों से सीधे कोई चार्ज वसूला जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कंज्यूमर के लिए UPI पेमेंट फ्री रहेगा।

₹2,000 से ऊपर के पेमेंट पर क्या बदल सकता है?

मौजूदा प्रस्ताव के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन को MDR के दायरे में लाया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, 0.3% MDR की दर पर विचार किया जा रहा है और इस संबंध में अगले दो सप्ताह में कोई औपचारिक घोषणा या प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। इसका अंतिम ढांचा आधिकारिक अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होगा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि MDR ग्राहक से सीधे लिया जाने वाला शुल्क नहीं है। यह उस मर्चेंट यानी दुकानदार या कारोबार से जुड़ा शुल्क है, जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करता है। इसलिए प्रस्ताव लागू होने की स्थिति में भी ग्राहक के UPI ऐप से ₹2,500 का पेमेंट करने पर उसके खाते से अलग से 0.3% काटे जाने की व्यवस्था नहीं होगी।

सरकार ने साफ किया- ग्राहक से नहीं लिया जाएगा UPI चार्ज

8 अगस्त 2026 को वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि UPI इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों पर कोई ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लगाया जाएगा। सरकार ने यह भी कहा कि Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI पेमेंट फ्री रहेंगे। संभावित MDR केवल कुछ सीमित मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर, एक तय सीमा से ऊपर और मामूली दर पर लागू किया जा सकता है। यानी परिवार के किसी सदस्य को पैसे भेजना, दोस्त को रकम ट्रांसफर करना या अपने दूसरे बैंक खाते में UPI के जरिए पैसा भेजना प्रस्तावित MDR के दायरे में नहीं आएगा। इसी तरह सरकार का कहना है कि UPI पर होने वाले अधिकांश मर्चेंट ट्रांजैक्शन भी शुल्क से बाहर रहेंगे।

MDR आखिर होता क्या है?

MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है, जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले मर्चेंट से पेमेंट इकोसिस्टम में लिया जाता है। इस रकम से पेमेंट प्रोसेसिंग, बैंकिंग सिस्टम, तकनीकी ढांचे और पेमेंट से जुड़े दूसरे हिस्सेदारों की लागत को पूरा करने में मदद मिलती है।अगर किसी पात्र मर्चेंट के ₹10,000 के ट्रांजैक्शन पर 0.3% MDR लागू होता है, तो MDR ₹30 होगा। वास्तविक व्यवस्था में यह रकम किस पक्ष से और किस तरीके से वसूली जाएगी, यह अंतिम नियमों पर निर्भर करेगा।

UPI पर पहले भी लागू है MDR की व्यवस्था

इससे पहले भी डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए जनवरी 2020 से UPI पर जीरो MDR व्यवस्था लागू की गई थी। इसके बाद सरकार ने पेमेंट इकोसिस्टम को आर्थिक सहायता देने के लिए इंसेंटिव स्कीम शुरू की, खासकर कम मूल्य वाले P2M यानी Person-to-Merchant ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए। मार्च 2025 में मंजूर इंसेंटिव स्कीम में छोटे मर्चेंट के ₹2,000 तक के BHIM-UPI P2M ट्रांजैक्शन के लिए 0.15% इंसेंटिव का प्रावधान था। यानी छोटे मूल्य के डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से पेमेंट सिस्टम के हिस्सेदारों को आर्थिक सहायता दी जाती रही है।

सरकार और इंडस्ट्री के सामने क्यों बढ़ी MDR की जरूरत?

UPI का इस्तेमाल जिस तेजी से बढ़ा है, उसके साथ इसके पीछे काम करने वाले डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत भी बढ़ी है। बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर, ऐप कंपनियां और दूसरे हिस्सेदार सर्वर, तकनीकी सिस्टम, साइबर सिक्योरिटी, फ्रॉड मॉनिटरिंग और ट्रांजैक्शन प्रोसेसिंग पर लगातार खर्च करते हैं।

इसी वजह से पेमेंट इंडस्ट्री लंबे समय से UPI के लिए ऐसा बिजनेस मॉडल चाहती रही है, जिससे सिस्टम को आर्थिक रूप से लंबे समय तक टिकाऊ बनाया जा सके। सरकार के लिए चुनौती यह है कि UPI को आम लोगों के लिए सस्ता और आसान बनाए रखते हुए पूरे पेमेंट इकोसिस्टम की लागत भी पूरी हो।

UPI का कारोबार कितना बड़ा हो चुका है?

UPI कारोबार के आंकड़े काफी चौकाने वाले हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में UPI पर 24,161.69 करोड़ यानी करीब 241.62 अरब ट्रांजैक्शन हुए। इनका कुल मूल्य ₹314.23 लाख करोड़ रहा। वित्त वर्ष 2024-25 में ट्रांजैक्शन की संख्या 18,586.60 करोड़ और मूल्य ₹260.56 लाख करोड़ था। यानी एक साल में UPI के इस्तेमाल में काफी तेज बढ़ोतरी हुई। जून 2026 तक UPI प्लेटफॉर्म पर 55.49 करोड़ यूजर ऑनबोर्ड हो चुके थे। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में देश के डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में UPI की हिस्सेदारी करीब 85% थी। यही विशाल पैमाना MDR को लेकर होने वाली चर्चा के लिए बेहद जरूरी है। छोटी-सी फीस भी बहुत बड़े ट्रांजैक्शन बेस पर लागू होने पर पेमेंट कंपनियों के लिए बड़ी रकम बन सकती है।

₹2,000 की सीमा क्यों महत्वपूर्ण हो सकती है?

₹2,000 की सीमा इसलिए अहम है क्योंकि इससे रोजमर्रा के छोटे पेमेंट को संभावित शुल्क से बचाने की कोशिश की जा सकती है। चाय, किराना, छोटी खरीदारी या सामान्य दैनिक खर्च जैसे कम मूल्य वाले डिजिटल पेमेंट में UPI की लोकप्रियता बहुत ज्यादा है। दूसरी ओर, बड़े मूल्य के मर्चेंट पेमेंट पर MDR लगाने से पेमेंट इकोसिस्टम के लिए अतिरिक्त राजस्व पैदा हो सकता है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, एक प्रस्ताव में ₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन और कुछ बड़े मर्चेंट्स को ध्यान में रखकर 0.3% से 0.5% तक MDR पर विचार किया गया था। अंतिम ढांचा अभी तय नहीं हुआ है।

क्रेडिट कार्ड से कम हो सकता है MDR

अगर 0.3% MDR लागू होता है तो यह क्रेडिट कार्ड के सामान्य मर्चेंट शुल्क की तुलना में कम दर होगी। डेबिट कार्ड पर भी कुछ परिस्थितियों में MDR इससे ज्यादा हो सकता है। सरकार ने भी कहा है कि संभावित UPI MDR डेबिट और क्रेडिट कार्ड MDR की तुलना में काफी कम रखा जाएगा।

इससे सरकार एक तरफ UPI के फ्री और आसान इस्तेमाल को बनाए रख सकती है, वहीं दूसरी तरफ पेमेंट कंपनियों और बैंकों के लिए कुछ राजस्व का रास्ता खुल सकता है।

क्या आम लोगों की जेब पर पड़ेगा असर?

उपलब्ध सरकारी स्पष्टीकरण के आधार पर आम UPI यूजर को सीधे कोई चार्ज नहीं देना होगा। P2P ट्रांजैक्शन फ्री रहेंगे और अधिकांश मर्चेंट ट्रांजैक्शन भी शुल्क से बाहर रहने की बात सरकार ने कही है। आगे चलकर मर्चेंट पर लगने वाले शुल्क का अप्रत्यक्ष असर कुछ कारोबारों की कीमतों पर पड़ता है या नहीं, यह उनकी लागत और व्यापार मॉडल पर निर्भर करेगा।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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