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What Is an Index Fund: इंडेक्स फंड क्या है? Nifty 50 को कैसे ट्रैक करता है
What Is an Index Fund: इंडेक्स फंड क्या है और यह Nifty 50 व Sensex को कैसे ट्रैक करता है? जानिए इंडेक्स फंड के फायदे, जोखिम, ट्रैकिंग एरर, एक्सपेंस रेशियो और ETF से अंतर।
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What Is an Index Fund: शेयर बाजार में निवेश करने के बारे में सोचते ही अक्सर एक सवाल सामने आता है: आखिर कौन-सी कंपनी के शेयर खरीदें? किस कंपनी का कारोबार आगे बढ़ेगा? किसका शेयर महंगा हो चुका है और किसमें निवेश करने का सही समय है? इन सवालों के जवाब तलाशने में काफी समय और मेहनत लग सकती है। लेकिन क्या ऐसा तरीका है, जिसमें आपको एक-एक कंपनी के शेयर चुनने की जरूरत न पड़े और आप पूरे बाजार के एक हिस्से में एक साथ निवेश कर सकें?
यहीं पर इंडेक्स फंड (Index Fund) की भूमिका सामने आती है। इंडेक्स फंड एक ऐसा म्यूचुअल फंड है जो किसी खास बाजार इंडेक्स के प्रदर्शन को दोहराने की कोशिश करता है। उदाहरण के लिए, भारत में Nifty 50 या Sensex को ट्रैक करने वाले इंडेक्स फंड उपलब्ध हैं।
इन फंडों का उद्देश्य आमतौर पर किसी इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि उसके रिटर्न के जितना करीब हो सके उतना करीब रहना होता है।
लेकिन यहां एक दिलचस्प सवाल उठता है: अगर इंडेक्स खुद कोई ऐसी कंपनी नहीं है जिसके शेयर खरीदे जा सकें, तो इंडेक्स फंड उसे ट्रैक कैसे करता है? क्या फंड वास्तव में इंडेक्स में शामिल सभी कंपनियों के शेयर खरीदता है? और अगर बाजार गिरता है, तो क्या इंडेक्स फंड का पैसा भी घट सकता है?
बाजार का इंडेक्स क्या होता है?
इंडेक्स फंड को समझने के लिए सबसे पहले स्टॉक मार्केट इंडेक्स का अर्थ समझना जरूरी है। स्टॉक मार्केट इंडेक्स बाजार में चुनी गई कंपनियों के शेयरों के प्रदर्शन को मापने का एक तरीका है। इसमें कंपनियों का चयन कुछ तय नियमों के आधार पर किया जाता है।
भारत के दो प्रमुख इंडेक्स हैं Nifty 50 और BSE Sensex।
Nifty 50 में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध 50 प्रमुख कंपनियां शामिल होती हैं, जबकि Sensex में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की 30 प्रमुख कंपनियां शामिल होती हैं। इन इंडेक्स की संरचना और कंपनियों का भार निर्धारित नियमों के अनुसार तय होता है। मान लीजिए किसी इंडेक्स में अलग-अलग क्षेत्रों की कंपनियां शामिल हैं, जैसे बैंकिंग, सूचना प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और उपभोक्ता वस्तुएं। यदि इन कंपनियों के शेयरों का कुल प्रदर्शन बेहतर होता है, तो इंडेक्स का स्तर बढ़ सकता है। यदि उनका प्रदर्शन कमजोर होता है, तो इंडेक्स गिर सकता है।
हालांकि, सभी कंपनियों का इंडेक्स पर प्रभाव बराबर नहीं होता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि इंडेक्स की गणना किस तरीके से की जाती है।
उदाहरण के लिए, बाजार पूंजीकरण के आधार पर भार तय करने वाले इंडेक्स में आमतौर पर बड़ी कंपनियों का प्रभाव छोटी कंपनियों की तुलना में अधिक होता है।
ध्यान देने वाली बात है कि इंडेक्स खुद कोई शेयर नहीं है। यह बाजार के प्रदर्शन को मापने वाला एक पैमाना है। आप सीधे Nifty 50 या Sensex के अंक नहीं खरीद सकते, लेकिन इनका अनुसरण करने वाले इंडेक्स फंड में निवेश करके इनके प्रदर्शन से जुड़ा रिटर्न पाने की कोशिश कर सकते हैं।
इंडेक्स फंड क्या होता है?
इंडेक्स फंड एक प्रकार का म्यूचुअल फंड है जो किसी निश्चित इंडेक्स को ट्रैक करने के लिए बनाया जाता है।
मान लीजिए कोई म्यूचुअल फंड Nifty 50 को ट्रैक करता है। इसका लक्ष्य होगा कि वह Nifty 50 में शामिल कंपनियों में लगभग उसी अनुपात में निवेश करे, जिस अनुपात में वे इंडेक्स में शामिल हैं। इस तरह फंड का प्रदर्शन उस इंडेक्स के प्रदर्शन के करीब रहने की कोशिश करता है।
एक सक्रिय रूप से प्रबंधित म्यूचुअल फंड में फंड मैनेजर अपने विश्लेषण के आधार पर कंपनियों का चुनाव करता है। उसका उद्देश्य अक्सर बेंचमार्क इंडेक्स से बेहतर रिटर्न हासिल करना होता है। इसके विपरीत, इंडेक्स फंड आमतौर पर किसी खास कंपनी को चुनकर बाजार से बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश नहीं करता। वह इंडेक्स के नियमों का अनुसरण करता है।
इसी कारण इसे पैसिव फंड यानी निष्क्रिय रूप से प्रबंधित फंड कहा जाता है। इसका मतलब यह नहीं कि फंड में बिल्कुल कोई प्रबंधन नहीं होता। इंडेक्स में बदलाव होने, निवेशकों के पैसे आने-जाने और अन्य जरूरी परिस्थितियों में फंड के निवेश में बदलाव करना पड़ता है। अंतर यह है कि निवेश के फैसले मुख्य रूप से इंडेक्स को ट्रैक करने के उद्देश्य से लिए जाते हैं।
इंडेक्स फंड बाजार के इंडेक्स को ट्रैक कैसे करता है?
मान लीजिए एक काल्पनिक इंडेक्स में केवल पांच कंपनियां हैं:
कंपनी A का भार 40 प्रतिशत है।
कंपनी B का भार 25 प्रतिशत है।
कंपनी C का भार 15 प्रतिशत है।
कंपनी D का भार 12 प्रतिशत है।
कंपनी E का भार 8 प्रतिशत है।
इन पांचों कंपनियों का कुल भार 100 प्रतिशत हुआ। यदि कोई इंडेक्स फंड इस काल्पनिक इंडेक्स को ट्रैक करना चाहता है, तो वह अपने निवेश का लगभग 40 प्रतिशत कंपनी A में, 25 प्रतिशत कंपनी B में और इसी तरह बाकी कंपनियों में निवेश करने की कोशिश करेगा।
मान लीजिए फंड के पास निवेश के लिए 10 लाख रुपये हैं। आदर्श स्थिति में उसका निवेश कुछ इस तरह हो सकता है: कंपनी A में 4 लाख रुपये, कंपनी B में 2.5 लाख रुपये, कंपनी C में 1.5 लाख रुपये, कंपनी D में 1.2 लाख रुपये और कंपनी E में 80 हजार रुपये।
इस तरह फंड की निवेश संरचना इंडेक्स की संरचना के समान हो जाती है।
अब मान लीजिए कंपनी A के शेयर का मूल्य बढ़ता है और कंपनी B के शेयर का मूल्य गिरता है। इन बदलावों का असर इंडेक्स और फंड, दोनों पर पड़ेगा। यदि फंड की निवेश संरचना इंडेक्स से अच्छी तरह मेल खाती है, तो दोनों के प्रदर्शन में भी काफी समानता रहने की संभावना होती है। वास्तविक दुनिया में Nifty 50 जैसे इंडेक्स में 50 कंपनियां होती हैं और उनकी कीमतें लगातार बदलती रहती हैं। इसलिए फंड को अपने निवेश की निगरानी करनी पड़ती है, ताकि उसका पोर्टफोलियो इंडेक्स के अनुरूप बना रहे। यही इंडेक्स फंड के काम करने का मूल सिद्धांत है।
क्या इंडेक्स फंड इंडेक्स की सभी कंपनियों के शेयर खरीदता है?
कई इंडेक्स फंड अपने लक्ष्य इंडेक्स में शामिल सभी शेयरों को लगभग उसी अनुपात में खरीदते हैं, जिस अनुपात में वे इंडेक्स में मौजूद होते हैं। इसे फुल रेप्लिकेशन कहा जाता है। लेकिन हर इंडेक्स फंड के लिए यही तरीका अपनाना जरूरी नहीं है। कुछ फंड सैंपलिंग यानी प्रतिनिधि नमूने की रणनीति का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें फंड इंडेक्स के सभी शेयर खरीदने के बजाय ऐसे शेयरों का चयन करता है जिनसे इंडेक्स के प्रदर्शन को करीब से दोहराया जा सके।
यह तरीका खास तौर पर उन इंडेक्स में उपयोगी हो सकता है जिनमें बहुत बड़ी संख्या में प्रतिभूतियां शामिल हों या जिनके सभी शेयरों को खरीदना महंगा अथवा मुश्किल हो। इसके अलावा, कुछ फंड अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए अन्य अनुमत वित्तीय साधनों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि, सामान्य Nifty 50 इंडेक्स फंड का उद्देश्य आमतौर पर Nifty 50 की संरचना और उसके रिटर्न का अनुसरण करना होता है।
इंडेक्स में बदलाव होने पर फंड क्या करता है?
बाजार का इंडेक्स हमेशा एक जैसा नहीं रहता। समय के साथ कंपनियों की बाजार पूंजीकरण, कारोबार, शेयरों में खरीद-बिक्री और अन्य निर्धारित मानदंडों के आधार पर इंडेक्स की संरचना में बदलाव हो सकते हैं। किसी कंपनी को इंडेक्स से हटाया जा सकता है और उसकी जगह दूसरी कंपनी शामिल की जा सकती है। इंडेक्स में मौजूद कंपनियों का भार भी बदल सकता है। ऐसी स्थिति में इंडेक्स फंड को अपने पोर्टफोलियो को नए इंडेक्स के अनुरूप समायोजित करना पड़ता है।
उदाहरण के लिए, यदि इंडेक्स के नियमों के अनुसार किसी कंपनी को हटाकर दूसरी कंपनी को शामिल किया जाता है, तो फंड भी आमतौर पर अपने निवेश में संबंधित बदलाव करेगा। इस प्रक्रिया में शेयर खरीदने और बेचने की जरूरत पड़ सकती है। इससे लेन-देन की लागत पैदा होती है, जो फंड के रिटर्न को प्रभावित कर सकती है।
इंडेक्स फंड का रिटर्न इंडेक्स के रिटर्न से अलग क्यों हो सकता है?
यह समझना बेहद जरूरी है कि इंडेक्स फंड अपने इंडेक्स को ट्रैक करने की कोशिश करता है, लेकिन दोनों का रिटर्न हमेशा बिल्कुल समान नहीं होता।
इसके कई कारण हैं।
पहला कारण है खर्च। फंड को संचालन, प्रबंधन और अन्य जरूरी गतिविधियों पर खर्च करना पड़ता है। इसके अलावा शेयर खरीदने-बेचने में भी लागत आती है। ये खर्च निवेशकों को मिलने वाले रिटर्न को प्रभावित कर सकते हैं।
दूसरा कारण है निवेश की संरचना में अंतर। यदि फंड के पास इंडेक्स के सभी शेयर बिल्कुल उसी अनुपात में नहीं हैं, तो दोनों के प्रदर्शन में अंतर आ सकता है।
तीसरा कारण है नकदी का हिस्सा। फंड को निवेशकों की निकासी या अन्य जरूरतों के लिए कुछ पैसा नकद अथवा नकदी जैसे साधनों में रखना पड़ सकता है। यदि यह हिस्सा इंडेक्स की तरह रिटर्न नहीं देता, तो प्रदर्शन में अंतर आ सकता है।
चौथा कारण है इंडेक्स में बदलाव। किसी कंपनी के शामिल होने या हटने पर फंड को शेयर खरीदने या बेचने पड़ सकते हैं। यदि इन लेन-देन का समय या लागत अलग हो, तो रिटर्न प्रभावित हो सकता है।
इन अंतरों को समझने के लिए दो शब्द महत्वपूर्ण हैं: ट्रैकिंग एरर और ट्रैकिंग डिफरेंस।
ट्रैकिंग एरर क्या है?
ट्रैकिंग एरर यह बताता है कि किसी अवधि में फंड के रिटर्न और उसके लक्ष्य इंडेक्स के रिटर्न के बीच का अंतर कितना बदलता रहा है। सरल भाषा में, यह इस बात का संकेत देता है कि फंड अपने इंडेक्स के प्रदर्शन को कितनी स्थिरता से ट्रैक कर रहा है। आमतौर पर कम ट्रैकिंग एरर का मतलब है कि फंड के रिटर्न में इंडेक्स के रिटर्न से होने वाला अंतर अपेक्षाकृत कम उतार-चढ़ाव वाला रहा है।
ट्रैकिंग डिफरेंस क्या है?
ट्रैकिंग डिफरेंस किसी तय अवधि में फंड और उसके लक्ष्य इंडेक्स के कुल रिटर्न के बीच का अंतर है।
उदाहरण के लिए, मान लीजिए किसी अवधि में लक्ष्य इंडेक्स का रिटर्न 12 प्रतिशत रहा और फंड का रिटर्न 11.6 प्रतिशत रहा। तो फंड का रिटर्न इंडेक्स से 0.4 प्रतिशत अंक कम रहा। यह उस अवधि का ट्रैकिंग डिफरेंस समझने का एक सरल उदाहरण है। ध्यान रहे कि ट्रैकिंग एरर और ट्रैकिंग डिफरेंस एक ही चीज नहीं हैं। किसी फंड का ट्रैकिंग एरर कम हो सकता है, फिर भी उसका रिटर्न लगातार कुछ हद तक इंडेक्स से कम रह सकता है। इसीलिए इंडेक्स फंड चुनते समय केवल उसके खर्च को ही नहीं, बल्कि उसके ट्रैकिंग डिफरेंस और ट्रैकिंग एरर को भी देखना उपयोगी होता है।
इंडेक्स फंड में निवेश करने के क्या फायदे हैं?
इंडेक्स फंड की लोकप्रियता के पीछे कुछ व्यावहारिक कारण हैं।
कम लागत की संभावना
चूंकि पारंपरिक इंडेक्स फंड का उद्देश्य इंडेक्स का अनुसरण करना होता है, इसलिए फंड मैनेजर को लगातार कंपनियों का चयन करके बाजार को हराने की कोशिश नहीं करनी पड़ती। इस वजह से ऐसे फंडों का खर्च कई सक्रिय रूप से प्रबंधित फंडों की तुलना में कम हो सकता है। हालांकि, हर इंडेक्स फंड सस्ता हो, यह जरूरी नहीं है। निवेश से पहले उसका वास्तविक खर्च देखना चाहिए।
एक साथ कई कंपनियों में निवेश
यदि आप किसी व्यापक इंडेक्स को ट्रैक करने वाले फंड में निवेश करते हैं, तो आपका पैसा कई कंपनियों में फैला हो सकता है। इससे किसी एक कंपनी के प्रदर्शन पर निर्भरता कम हो सकती है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि निवेश पूरी तरह सुरक्षित हो जाता है। यदि बाजार या इंडेक्स में शामिल अधिकांश कंपनियों के शेयर गिरते हैं, तो इंडेक्स फंड का मूल्य भी गिर सकता है।
सरल और पारदर्शी रणनीति
इंडेक्स फंड का लक्ष्य पहले से निर्धारित होता है। निवेशक यह जान सकता है कि फंड किस इंडेक्स को ट्रैक करने की कोशिश कर रहा है। इससे निवेश की रणनीति को समझना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है।
लंबे समय के निवेश में उपयोग
कुछ निवेशक अपने दीर्घकालीन पोर्टफोलियो में इंडेक्स फंड का इस्तेमाल बाजार के व्यापक प्रदर्शन में भागीदारी पाने के लिए करते हैं। हालांकि, भविष्य में बाजार कितना रिटर्न देगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। लंबे समय तक निवेश करने से भी नुकसान की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं होती।
क्या इंडेक्स फंड में पैसा डूब भी सकता है?
इंडेक्स फंड भी बाजार से जुड़े निवेश का एक तरीका है और इसमें नुकसान हो सकता है। मान लीजिए आपने Nifty 50 को ट्रैक करने वाले इंडेक्स फंड में निवेश किया। यदि बाजार में बड़ी गिरावट आती है और Nifty 50 नीचे चला जाता है, तो फंड का नेट एसेट वैल्यू यानी NAV भी गिर सकता है। NAV वह मूल्य है जिसके आधार पर म्यूचुअल फंड की एक यूनिट का मूल्य निर्धारित होता है। यदि आपने ऊंचे NAV पर यूनिट खरीदी हैं और बाद में NAV गिर जाता है, तो बेचने पर आपको नुकसान हो सकता है।
इसके अलावा, इंडेक्स फंड में निवेश करने से बाजार के जोखिम खत्म नहीं होते। यदि किसी इंडेक्स में कुछ बड़ी कंपनियों का भार बहुत अधिक है, तो उन कंपनियों के खराब प्रदर्शन का फंड पर महत्वपूर्ण असर पड़ सकता है।
यह भी याद रखें कि इंडेक्स फंड का लक्ष्य इंडेक्स को ट्रैक करना है, गिरावट से बचाना नहीं। बाजार गिरने पर फंड भी इंडेक्स के साथ नीचे जा सकता है।
इंडेक्स फंड और ETF में क्या अंतर है?
इंडेक्स फंड और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF), दोनों ही किसी इंडेक्स को ट्रैक करने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं, लेकिन इनके कारोबार करने का तरीका अलग होता है। पारंपरिक इंडेक्स म्यूचुअल फंड में निवेशक फंड की यूनिट खरीदते या बेचते हैं। आमतौर पर लेन-देन उस कारोबारी दिन के लिए लागू NAV के आधार पर होता है, जो लागू नियमों और कट-ऑफ समय के अनुसार निर्धारित होता है।
दूसरी ओर, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड शेयर बाजार में सूचीबद्ध होता है और बाजार के कारोबारी समय में उसके यूनिट खरीदे और बेचे जा सकते हैं। इसकी बाजार कीमत उसके NAV से कुछ अलग हो सकती है। ETF में निवेश के लिए आमतौर पर डीमैट और ट्रेडिंग खाते की जरूरत होती है। पारंपरिक इंडेक्स म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए आमतौर पर डीमैट खाता जरूरी नहीं होता।
हालांकि, दोनों के खर्च, तरलता और निवेश की सुविधा अलग-अलग हो सकती है। इसलिए चुनाव करते समय फंड की संरचना और अपनी जरूरतों को समझना चाहिए।
इंडेक्स फंड चुनते समय किन बातों पर ध्यान दें?
यदि कोई व्यक्ति इंडेक्स फंड के बारे में विचार कर रहा है, तो उसे केवल पिछले रिटर्न देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। सबसे पहले यह देखना चाहिए कि फंड किस इंडेक्स को ट्रैक करता है। Nifty 50, Nifty Next 50, Nifty 500 और दूसरे इंडेक्स की संरचना अलग-अलग होती है। इसलिए उनमें जोखिम और बाजार के अलग-अलग हिस्सों में निवेश का स्तर भी अलग हो सकता है।
इसके बाद फंड का एक्सपेंस रेशियो यानी वार्षिक खर्च देखना चाहिए। समान लक्ष्य वाले फंडों के बीच खर्च का अंतर लंबे समय में निवेश के नतीजों को प्रभावित कर सकता है। ट्रैकिंग एरर और ट्रैकिंग डिफरेंस की जांच करना भी उपयोगी है। ये आंकड़े इस बात का अंदाजा देते हैं कि फंड अपने लक्ष्य इंडेक्स को कितनी अच्छी तरह ट्रैक करता रहा है। इसके अलावा, फंड की निवेश रणनीति, उपलब्ध दस्तावेज, जोखिम से संबंधित जानकारी और निवेश की शर्तों को समझना चाहिए।
एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि अलग-अलग इंडेक्स फंडों में निवेश करने से हमेशा उतना विविधीकरण नहीं मिलता जितना नाम देखकर लगता है। उदाहरण के लिए, दो अलग-अलग फंडों में कई समान कंपनियां हो सकती हैं। इसलिए यह समझना जरूरी है कि आपके पूरे पोर्टफोलियो में वास्तव में कितना विविधीकरण है।
इसलिए इंडेक्स फंड को समझते समय तीन बातें याद रखें: वह किस इंडेक्स को ट्रैक करता है, उसे ट्रैक करने में कितना खर्च आता है और उसका प्रदर्शन इंडेक्स से कितना अलग रहा है। इन बातों की जानकारी निवेशक को बेहतर निर्णय लेने में मदद कर सकती है।


