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India GDP Growth: वैश्विक संकट का असर दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर देखने को मिला है। ऊर्जा कीमतों में उछाल, सप्लाई चेन में बाधा और निवेश में कमी जैसी समस्याओं ने कई देशों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया।
India GDP Growth
India GDP Growth: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने हाल के समय में वैश्विक तनाव को चरम पर पहुंचा दिया था। हालांकि अब अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर का ऐलान हो चुका है, लेकिन इसके टिकाऊ रहने को लेकर अब भी अनिश्चितता बनी हुई है। एक ओर जहां युद्धविराम की खबर ने राहत दी, वहीं दूसरी ओर इसके टूटने की आशंकाओं ने फिर से चिंता बढ़ा दी है।
इस वैश्विक संकट का असर दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर देखने को मिला है। ऊर्जा कीमतों में उछाल, सप्लाई चेन में बाधा और निवेश में कमी जैसी समस्याओं ने कई देशों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया। बावजूद इसके, भारत की अर्थव्यवस्था ने इस चुनौतीपूर्ण दौर में भी मजबूती दिखाई है और तेजी से आगे बढ़ती नजर आई है। अब विश्व बैंक ने भी भारत की इस मजबूती को स्वीकार किया है। अपनी ताजा रिपोर्ट में विश्व बैंक ने भारत की जीडीपी ग्रोथ को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारत की अर्थव्यवस्था 6.6% की दर से वृद्धि कर सकती है। यह अनुमान पहले के 6.3% के अनुमान से अधिक है, जो अक्टूबर 2025 में जारी किया गया था।
अप्रैल 2026 में जारी दक्षिण एशिया आर्थिक अपडेट में विश्व बैंक ने कहा कि वैश्विक तनाव और पश्चिम एशिया के संघर्ष के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में ग्रोथ 7.6% के अनुमान से कुछ कम रह सकती है, जिसका कारण वैश्विक चुनौतियां हैं। विश्व बैंक ने यह भी बताया कि वस्तु एवं सेवा कर (GST) में संभावित राहत से उपभोक्ता मांग को बढ़ावा मिलेगा, खासकर FY27 की पहली छमाही में। इससे बाजार में खर्च बढ़ेगा और आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिलेगा। लेकिन इसके साथ ही कुछ जोखिम भी बने हुए हैं।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि वैश्विक ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहती है, तो इसका असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। महंगाई बढ़ने से परिवारों की खर्च करने की क्षमता कम हो सकती है। इसके अलावा, खाना पकाने के ईंधन और उर्वरकों पर बढ़ती सब्सिडी के कारण सरकार के खर्च में भी दबाव बढ़ सकता है, जिससे सरकारी खपत की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। इतना ही नहीं, बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता और उत्पादन लागत (इनपुट कॉस्ट) में इजाफा होने से निवेश की रफ्तार भी प्रभावित हो सकती है।
इससे आने वाले समय में आर्थिक विकास की गति पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है। दक्षिण एशिया के संदर्भ में विश्व बैंक ने कहा कि क्षेत्रीय विकास दर में भी गिरावट देखने को मिल सकती है। जहां 2025 में यह दर 7% थी, वहीं 2026 में इसके घटकर 6.3% रहने का अनुमान है। ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और वैश्विक परिस्थितियों के चलते इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हो सकती हैं।


