Zomato यूजर्स के लिए बुरी खबर! COD चुनते ही बढ़ जाएगा आपका Food Delivery Bill

Zomato COD Charge: अब ग्राहक डिलीवरी के वक़्त अपने खाने के ऑर्डर का भुगतान कैश में करता है तो उसे खाने की कीमत और दूसरी फीस के अलावा एक अतिरिक्त चार्ज भी देना पड़ सकता है।

Priya Singh Bisen
Published on: 12 Sept 2026 6:50 PM IST
Zomato Cash on Delivery Charge
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Zomato Cash on Delivery Charge

Zomato Cash on Delivery Charge: ऑनलाइन फूड डिलीवरी (Online Food Delivery) प्लेटफॉर्म जोमैटो (Zomato) के ग्राहकों को अब कैश-ऑन-डिलीवरी (Cash-on-Delivery) यानी COD का ऑप्शन चुनना भी अब महंगा पड़ सकता है। कंपनी ने कैश में पेमेंट करने वाले सभी ग्राहकों के लिए एक अलग फीस शुरू की है। आज शनिवार को कंपनी के ऐप पर यह चार्ज दिखाई दिया, जो अलग-अलग यूजर्स और ऑर्डर की वैल्यू के अनुसार अलग-अलग हो रहा है।

इसका अर्थ यह है कि यदि अब ग्राहक डिलीवरी के वक़्त अपने खाने के ऑर्डर का भुगतान कैश में करता है तो उसे खाने की कीमत और दूसरी फीस के अलावा एक अतिरिक्त चार्ज भी देना पड़ सकता है।

ऑर्डर बिल में अलग से दिख रहा है नया चार्ज

Zomato के ऑर्डर बिल (Order Bill) में यह रकम “पे ऑन डिलीवरी फीस” (Pay on Delivery Fee) के नाम से नज़र आ रही है। यह फीस उन ग्राहकों पर लागू होती है जो डिलीवरी के वक़्त कैश देकर अपने फूड ऑर्डर (Food Order) का भुगतान करने का विकल्प चुनते हैं। विशेष बात यह है कि यह चार्ज सभी ऑर्डर के लिए एक जैसा नहीं है। अलग-अलग ट्रांजैक्शन वैल्यू (Transaction Value) पर अलग-अलग फीस दिखाई दे रही है।

हालांकि, अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कंपनी इस फीस को तय करने के लिए किन आधारों का प्रयोग कर रही है। यह ऑर्डर की कुल वैल्यू, ग्राहक की लोकेशन या किसी दूसरे पैरामीटर से जुड़ा है या नहीं, इसकी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। इस मामले पर जोमैटो की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान भी सामने नहीं आया है।

Swiggy अभी नहीं ले रही अलग 'COD' फीस

Zomato की प्रतिद्वंद्वी कंपनी स्विगी (Swiggy) फिलहाल कैश-ऑन-डिलीवरी ऑर्डर पर कोई अलग फीस नहीं ले रही है। ऐसे वक़्त में जोमैटो का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि फूड डिलीवरी (Food Delivery) प्लेटफॉर्म लगातार अलग-अलग फीस स्ट्रक्चर (Fee Structure) और मॉनेटाइजेशन मॉडल (Monetization Model) के साथ इस्तेमाल कर रहे हैं।

Zomato पहले से ही फूड ऑर्डर पर प्लेटफॉर्म फीस (Platform Fee) लेता है। इसके अलावा ऑर्डर के हिसाब से डिलीवरी चार्ज (Delivery Charge), पैकेजिंग चार्ज (Packaging Charge) और दूसरे शुल्क भी लगाए जा सकते हैं। अब कैश में भुगतान करने वाले सभी ग्राहकों के लिए पे ऑन डिलीवरी फीस एक और अतिरिक्त खर्च बन सकती है।

छोटी फीस से कंपनी को हो सकती है बड़ी कमाई

Zomato के लिए इस तरह के छोटे चार्ज की अहमियत केवल एक ऑर्डर से मिलने वाली रकम तक सीमित नहीं है। इसका बड़ा प्रभाव कंपनी के विशाल ऑर्डर वॉल्यूम (Order Volume) के कारण से हो सकता है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, जोमैटो हर दिन तकरीबन 23 से 25 लाख यानी 2.3 से 2.5 मिलियन फूड ऑर्डर प्रोसेस करता है।

यदि सैद्धांतिक तौर पर हर ऑर्डर पर 5 रुपये का चार्ज लगाया जाए तो इससे हर दिन लगभग 1.15 से 1.25 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई हो सकती है। सालाना आधार पर यह रकम लगभग 420 से 456 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। हालांकि, यह सिर्फ सैद्धांतिक अधिकतम अनुमान है, क्योंकि कैश-ऑन-डिलीवरी ऑर्डर जोमैटो के कुल ऑर्डर का सिर्फ एक छोटा भाग हैं। फिर भी इससे स्पष्ट रूप से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि बड़े पैमाने पर छोटे-छोटे चार्ज भी कंपनी के लिए कमाई का बड़ा जरिया बन सकते हैं।

साल 2023 में शुरू हुई थी प्लेटफॉर्म फीस

Zomato की फीस स्ट्रक्चर में परिवर्तन की कहानी नई नहीं है। मनीकंट्रोल ने साल 2023 अप्रैल महीने में सबसे पहले रिपोर्ट किया था कि फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म ने प्लेटफॉर्म फीस शुरू की थी। उस समय स्विगी ने 2 रुपये की प्लेटफॉर्म फीस आजमाई थी। इसके बाद जोमैटो ने भी अपनी प्लेटफॉर्म फीस शुरू की।

शुरुआत में यह फीस मामूली थी, लेकिन वक़्त के साथ इसमें वृद्धि होती गई। इस साल की शुरुआत में जोमैटो ने प्लेटफॉर्म फीस को 12.5 रुपये से बढ़ाकर 14.99 रुपये प्रति ऑर्डर कर दिया। इस पर GST अलग से लागू होता है। कंपनी के मौजूदा ऑर्डर वॉल्यूम को देखते हुए फीस में छोटी सी बढ़ोतरी भी सालाना सैकड़ों करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई में बदल सकती है।

प्लेटफॉर्म फीस से हजारों करोड़ की कमाई का अनुमान

मनीकंट्रोल की बीते साल सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार ई-कॉमर्स (E-commerce) और फूड डिलीवरी कंपनियां प्लेटफॉर्म फीस के माध्यम से सालाना कुल मिलाकर तकरीबन 3,500 से 4,000 करोड़ रुपये की कमाई कर सकती हैं।

इस मॉडल का लाभ कंपनियों के लिए स्पष्ट है। खाने या डिलीवरी की मुख्य कीमत बढ़ाने के बजाय चेकआउट (Checkout) के समय छोटे-छोटे अतिरिक्त चार्ज जोड़कर लाखों ट्रांजैक्शन से कमाई की जा सकती है। कैश-ऑन-डिलीवरी फीस इसी रणनीति को एक कदम आगे ले जाती है, जहां भुगतान के तरीके से ही कंपनी के लिए अतिरिक्त कमाई का रास्ता बनता है।

अब फूड ऑर्डर का बिल और भी बढ़ सकता है

कैश में भुगतान पसंद करने वाले ग्राहकों के लिए अब ऑर्डर की कुल लागत बढ़ सकती है। खाने की कीमत के अलावा उन्हें प्लेटफॉर्म फीस, पैकेजिंग चार्ज, डिलीवरी चार्ज, टैक्स और अब पे ऑन डिलीवरी फीस जैसे अलग-अलग शुल्क दिखाई दे सकते हैं।

यानी कि अब आगामी वक़्त में फूड डिलीवरी का बिल (Food Delivery Bill) और अधिक डिटेल वाला दिखाई दे सकता है। ग्राहकों को खाने की कीमत के साथ-साथ चेकआउट से पहले यह भी देखना होगा कि उनके ऑर्डर पर कौन-कौन से अतिरिक्त चार्ज लगाए गए हैं। जोमैटो का नया कैश-ऑन-डिलीवरी चार्ज इसी बढ़ते फीस स्ट्रक्चर (Fee Structure) का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है।

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Priya Singh Bisen is a journalist with over five years of experience in the news and digital media industry. She covers a wide range of topics, including weather, lifestyle, health, politics, and international affairs. In addition to news writing, Priya has experience in news script writing, voice-overs, anchoring, field reporting, and social media management. She holds a Bachelor's degree in Mass Communication and a Master's degree in Advertising and Public Relations. Priya also enjoys writing, traveling, and playing sports, pursuits that reflect her curiosity and passion for exploring new perspectives.

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