Atal Utkrisht Shiksha Yojana: श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाएगी सरकार, 200 छात्रों को मौका

Atal Utkrisht Shiksha Yojana के तहत छत्तीसगढ़ के 200 मेधावी श्रमिक बच्चों को कक्षा 6 से 12 तक मुफ्त आवासीय शिक्षा मिलेगी। जानें योजना और लाभ।

Jyotsana Singh
Published on: 25 Aug 2026 12:33 PM IST
Atal Utkrisht Shiksha Yojana: 200 Workers’ Children to Get Free Schooling
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Atal Utkrisht Shiksha Yojana: 200 Workers’ Children to Get Free Schooling

Atal Utkrisht Shiksha Yojana: छत्तीसगढ़ में श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए शुरू की गई अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना का दायरा बढ़ा दिया गया है। अब 100 की जगह 200 मेधावी बच्चों को प्रतिष्ठित आवासीय स्कूलों में कक्षा 6 से 12 तक मुफ्त शिक्षा मिलेगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायपुर में आयोजित सम्मान समारोह में योजना के विस्तार की जानकारी दी। किसी बच्चे की प्रतिभा सिर्फ इसलिए पीछे न रह जाए कि उसके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है, इसी सोच के साथ छत्तीसगढ़ सरकार ने श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना का विस्तार किया है। योजना की शुरुआत पिछले साल 100 बच्चों से हुई थी। अब इसका लाभ बढ़ाकर 200 बच्चों तक कर दिया गया है। राज्य के सभी 33 जिलों से चयनित प्रतिभाशाली बच्चों को प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में पढ़ने का अवसर दिया जा रहा है।

33 जिलों के बच्चों को कक्षा 6 से 12 तक मुफ्त पढ़ाई

योजना के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के मेधावी बच्चों को कक्षा 6वीं से 12वीं तक गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा दी जा रही है। राजकुमार कॉलेज, दिल्ली पब्लिक स्कूल और रुंगटा पब्लिक स्कूल जैसे संस्थानों में बच्चों को पढ़ने का अवसर मिल रहा है। सरकार का जोर केवल स्कूल में दाखिला दिलाने पर नहीं, बल्कि बच्चों को ऐसा शैक्षणिक माहौल देने पर है। जहां वे पढ़ाई के साथ अपने व्यक्तित्व और आत्मविश्वास को भी विकसित कर सकें।

मुख्यमंत्री बोले- आर्थिक स्थिति सपनों के रास्ते में बाधा न बने

रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि श्रमिक राज्य के विकास की मजबूत नींव हैं। सड़क, पुल, भवन और दूसरी बुनियादी सुविधाओं के निर्माण में श्रमिकों की अहम भूमिका है। ऐसे परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ने का समान अवसर देना सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने छात्रों से बड़े सपने देखने, अनुशासन के साथ मेहनत करने और पढ़ाई के प्रति जिज्ञासु बने रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, प्रशासनिक अधिकारी या उद्यमी बनने का लक्ष्य रख सकते हैं।

अंग्रेजी बोलने का बढ़ा आत्मविश्वास, आईएएस बनने का सपना

योजना से लाभान्वित बच्चों ने भी अपने अनुभव साझा किए। राजनांदगांव के दिल्ली पब्लिक स्कूल में पढ़ रहे बीजापुर के आतिश ने आईएएस अधिकारी बनने का लक्ष्य बताया। वहीं कबीरधाम की इशिका दहरे ने कहा कि इस योजना के जरिए मिली शिक्षा से अंग्रेजी में बातचीत करने का उनका आत्मविश्वास बढ़ा है।

कार्यक्रम में शिक्षा, खेल, कला और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को सम्मानित भी किया गया। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के साथ भोजन किया और उनसे अनौपचारिक बातचीत कर उनकी पढ़ाई और भविष्य की योजनाओं के बारे में जाना।

1.45 लाख से ज्यादा श्रमिकों को 39.67 करोड़ रुपये की सहायता

सम्मान समारोह के साथ श्रमिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं का लाभ भी हितग्राहियों तक पहुंचाया गया। अधिकारियों के अनुसार 18 श्रमिक कल्याण योजनाओं के तहत 1,45,841 श्रमिकों के बैंक खातों में डीबीटी के जरिए 39.67 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी गई। श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन के अनुसार पिछले ढाई वर्षों में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से श्रमिकों को 774 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी गई है। सरकार के मुताबिक श्रम विभाग और उससे जुड़े बोर्डों के जरिए शिक्षा, स्वास्थ्य, मातृत्व सहायता, पेंशन, कौशल विकास, रोजगार और आवास समेत कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

श्रमिक बच्चों के लिए दूसरी शिक्षा योजनाएं भी

अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अलावा श्रम विभाग की योजनाओं में निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति, गणवेश और किताब-कॉपी सहायता जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं। विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के पहले दो बच्चों को कक्षा 1 से 12वीं तक सहायता मिल सकती है। वहीं मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत पात्र बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए भी आर्थिक सहायता का प्रावधान है।

आईआईटी, आईआईएम और एम्स तक पहुंच बनाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे संस्थान मौजूद हैं। सरकार का लक्ष्य है कि श्रमिक परिवारों के बच्चे भी इन प्रतिष्ठित संस्थानों तक पहुंचें। उच्च शिक्षा और विदेश में पढ़ाई के इच्छुक छात्रों के लिए ऋण और सहायता की व्यवस्था पर भी जोर दिया जा रहा है।

इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह श्रमिक परिवारों के बच्चों को सिर्फ मुफ्त शिक्षा नहीं देती, बल्कि उन्हें बेहतर स्कूल, आवासीय माहौल और बड़े सपने देखने का अवसर भी देती है। 100 से 200 बच्चों तक हुआ विस्तार इसी दिशा में सरकार की बढ़ती प्राथमिकता का उदाहरण पेश करता है।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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