79 साल बाद बस्तर में बदली तस्वीर! 92 गांवों में पहली बार लहराएगा तिरंगा, नक्सल प्रभावित इलाकों में दिखेगा ऐतिहासिक बदलाव

Bastar Independence Day: इस साल बस्तर संभाग के 92 गांवों में पहली बार स्वतंत्रता दिवस का सार्वजनिक आयोजन होगा। इनमें बीजापुर के 33, सुकमा के 50 और नारायणपुर के 9 गांव शामिल हैं।

Priya Singh Bisen
Published on: 15 Aug 2026 10:40 AM IST
Bastar Independence Day
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Bastar Independence Day: देश की आजादी के 79 साल बाद बस्तर (Bastar) के उन सुदूर और दुर्गम गांवों में भी इस स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) पर तिरंगा पूरे सम्मान और गर्व के साथ फहराया जाएगा, जहां लंबे वक़्त तक नक्सली हिंसा (Naxal Violence) के कारण राष्ट्रीय पर्व मनाना भी बड़ी चुनौती बना हुआ था।

इस साल बस्तर संभाग के 92 गांवों में पहली बार स्वतंत्रता दिवस का सार्वजनिक आयोजन (Public Independence Day Celebration) होगा। इनमें बीजापुर के 33, सुकमा के 50 और नारायणपुर के 9 गांव शामिल हैं।

यह केवल ध्वजारोहण (Flag Hoisting) का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि भय और हिंसा के दौर से निकलकर लोकतंत्र (Democracy), विकास (Development) और सामान्य जीवन की ओर लौटते बस्तर की नई शुरुआत का प्रतीक माना जा रहा है।

4 दशक बाद बदली बस्तर की तस्वीर

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय तक स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों का आयोजन सुरक्षा कारणों से संभव नहीं हो पाता था। कई गांवों में प्रशासन की पहुंच सीमित थी और ग्रामीण भी खुले तौर पर राष्ट्रीय कार्यक्रमों में शामिल होने से डरते थे।

अब सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने और विकास कार्यों (Development Works) के विस्तार के बाद इन इलाकों के हालात तेजी से बदल रहे हैं। जिन गांवों में कभी राष्ट्रीय पर्व मनाना भी मुश्किल था, वहां अब ग्रामीण तिरंगे के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहे हैं।

ताड़मेटला से टेकलगुड़ेम तक बदलाव की नई कहानी

बस्तर के ताड़मेटला, सिलगर, टेकलगुड़ेम, धरानी बोदली और एर्राबोर जैसे इलाके कभी नक्सली हिंसा के लिए चर्चित रहे हैं। इन क्षेत्रों में लंबे समय तक गोलियों की आवाज और दहशत का माहौल बना रहा। अब यही इलाके बदलाव की नई कहानी लिख रहे हैं।

इन गांवों में पहली बार राष्ट्रीय ध्वज (National Flag) फहराया जाएगा। ग्रामीणों में अपने गांव में तिरंगा फहराने को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। उनके लिए यह सिर्फ स्वतंत्रता दिवस का आयोजन नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र में लौटती शांति और सामान्य जीवन का भी संकेत है।

92 गांवों में पहली बार होगा ध्वजारोहण

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बस्तर संभाग के कुल 92 गांवों में पहली बार तिरंगा पूरे सम्मान के साथ फहराया जाएगा। इनमें बीजापुर जिले के 33 गांव, सुकमा जिले के 50 गांव और नारायणपुर जिले के 9 गांव शामिल हैं।

सालों तक नक्सली हिंसा से प्रभावित रहे इन गांवों में इस बार प्रशासन और सुरक्षा बलों (Security Forces) की मौजूदगी में स्वतंत्रता दिवस का आयोजन किया जाएगा। राष्ट्रीय पर्व को लेकर ग्रामीणों में उत्साह और उल्लास का माहौल है।

यह ध्वजारोहण शांति (Peace), सुरक्षा (Security), लोकतंत्र और विकास की दिशा में बस्तर के बदलते स्वरूप का प्रतीक भी माना जा रहा है। जिन क्षेत्रों में कभी राष्ट्रीय पर्वों का सार्वजनिक आयोजन संभव नहीं था, वहां अब तिरंगे को सम्मान के साथ फहराने की तैयारी है।

शहीद जवानों के सम्मान में विशेष पहल

बस्तर में शांति स्थापित करने के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले सुरक्षा बलों के जवानों की स्मृति को हमेशा जीवित रखने के लिए भी विशेष पहल की गई है। संभाग के 500 से अधिक स्कूलों (Schools), सामुदायिक भवनों (Community Buildings), चौराहों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों का नाम शहीद जवानों के नाम पर रखा जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को शहीद जवानों के साहस, बलिदान और राष्ट्रसेवा से परिचित कराना और उनसे प्रेरणा लेने का अवसर देना है। बस्तर में शांति के लिए बलिदान देने वाले जवानों की स्मृति को सार्वजनिक स्थानों से जोड़ने की यह पहल उनके योगदान को याद रखने का माध्यम बनेगी।

तिरंगा बना बस्तर में बदलाव की पहचान

बस्तर में इस बार होने वाला ऐतिहासिक ध्वजारोहण (Historic Flag Hoisting) केवल एक सरकारी आयोजन नहीं है। यह क्षेत्र में लौटती शांति, बढ़ते विश्वास और विकास की नई पहचान के तौर पर देखा जा रहा है।

वर्षों तक हिंसा से प्रभावित रहे गांवों में अब राष्ट्रीय ध्वज का सम्मानपूर्वक फहराया जाना इस बात का संकेत है कि बस्तर धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है। ग्रामीण स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगे को सलामी देने के साथ देश की सुरक्षा के लिए अपना जीवन बलिदान करने वाले सभी शहीद जवानों को श्रद्धांजलि भी अर्पित करेंगे।

79 साल बाद बस्तर के इन 92 गांवों में पहली बार सार्वजनिक रूप से तिरंगा फहराया जाना क्षेत्र के बदलते माहौल की एक अहम तस्वीर पेश करेगा। डर और हिंसा के लंबे दौर के बीच अब राष्ट्रीय पर्व का उत्सव मनाया जाना बस्तर के लिए नई उम्मीद, लोकतंत्र और विकास की दिशा में आगे बढ़ने का प्रतीक बन रहा है।

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Priya Singh Bisen is a journalist with over five years of experience in the news and digital media industry. She covers a wide range of topics, including weather, lifestyle, health, politics, and international affairs. In addition to news writing, Priya has experience in news script writing, voice-overs, anchoring, field reporting, and social media management. She holds a Bachelor's degree in Mass Communication and a Master's degree in Advertising and Public Relations. Priya also enjoys writing, traveling, and playing sports, pursuits that reflect her curiosity and passion for exploring new perspectives.

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