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राजेश मूणत CD केस में बड़ा उलटफेर! भूपेश बघेल पर आरोप तय करने की प्रक्रिया पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
Bhupesh Baghel CD Case: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कथित मॉर्फ्ड सीडी मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को अंतरिम राहत देते हुए सीबीआई कोर्ट में चल रही आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
Bhupesh Baghel
Bhupesh Baghel CD Case: छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) को कथित बीजेपी विधायक राजेश मूणत (BJP MLA Rajesh Munat) मॉर्फ्ड सीडी केस (Morphed CD Case) में बड़ी राहत मिली है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने इस मामले में सीबीआई कोर्ट (CBI Court) के सामने चल रही आगे की कार्रवाई पर अंतरिम रोक (Interim Stay) लगा दी है।
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राधाकिशन अग्रवाल (Justice Radhakishan Agrawal) ने भूपेश बघेल की याचिका (Petition) पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है। यह याचिका 24 जनवरी 2026 को विशेष न्यायाधीश सीबीआई (Special Judge CBI), रायपुर (Raipur) के उस आदेश के खिलाफ दाखिल की गई थी, जिसमें पहले दिए गए डिस्चार्ज आदेश (Discharge Order) को रद्द करते हुए भूपेश बघेल के खिलाफ आरोप तय करने (Framing of Charges) का निर्देश दिया गया था।
हाईकोर्ट के इस आदेश का विस्तृत विवरण अभी जारी होना बाकी है।
बघेल ने हाईकोर्ट में दी थी चुनौती
भूपेश बघेल ने अपनी याचिका में कहा था कि निचली अदालत (Trial Court) पहले ही पुनरीक्षण अदालत (Revisional Court) के आदेश के आधार पर आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा चुकी है।
उन्होंने अदालत से कहा कि अगर सीबीआई कोर्ट की कार्रवाई को जारी रहने दिया गया तो उनकी याचिका का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। इसलिए उन्होंने हाईकोर्ट से मांग की थी कि याचिका पर फैसला आने तक ट्रायल कोर्ट (Trial Court) की आगे की कार्यवाही पर रोक लगाई जाए। हाईकोर्ट ने दलीलों को सुनने के बाद सीबीआई कोर्ट में चल रही आगे की प्रक्रिया पर रोक लगा दी।
2017 के कथित मॉर्फ्ड सीडी मामले से जुड़ा है केस
यह पूरा मामला साल 2017 के कथित मॉर्फ्ड अश्लील वीडियो (Morphed Obscene Video) से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि तत्कालीन छत्तीसगढ़ मंत्री राजेश मूणत की छवि खराब करने के उद्देश्य से एक कथित आपत्तिजनक वीडियो (Objectionable Video) तैयार किया गया और उसे प्रसारित (Circulate) किया गया था।
जांच की जिम्मेदारी बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI - Central Bureau of Investigation) को सौंपी गई थी। सीबीआई ने इस मामले में भूपेश बघेल और अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट (Charge Sheet) दाखिल की थी।
सीबीआई ने आरोप लगाए थे कि मामले में आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy), प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से जालसाजी (Forgery), फर्जी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड (Forged Electronic Record) को असली बताकर इस्तेमाल करना और यौन स्पष्ट सामग्री (Sexually Explicit Electronic Material) के प्रकाशन या प्रसारण जैसे आरोप शामिल हैं।
पहले बघेल को मिली थी डिस्चार्ज, फिर दोबारा आरोप तय करने का आदेश
मार्च 2025 में विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (Special Judicial Magistrate) ने भूपेश बघेल को इस मामले में डिस्चार्ज (Discharge) कर दिया था।
अदालत ने कहा था कि कथित साजिश (Conspiracy) या वीडियो प्रसारित करने में भूपेश बघेल की सीधी भूमिका दिखाने वाला कोई प्रथम दृष्टया आधार (Prima Facie Evidence) मौजूद नहीं है।
लेकिन जनवरी 2026 में विशेष न्यायाधीश सीबीआई (Special Judge CBI) ने इस डिस्चार्ज आदेश को रद्द कर दिया और भूपेश बघेल के खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया। इसी आदेश को भूपेश बघेल ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
बघेल का तर्क, सीबीआई कोर्ट ने अधिकारों से आगे जाकर लिया फैसला
हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में भूपेश बघेल ने तर्क दिया कि सीबीआई कोर्ट ने डिस्चार्ज आदेश को रद्द करते समय अपने अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) से आगे जाकर फैसला लिया है।
उनका कहना था कि पुनरीक्षण अदालत (Revisional Court) को केवल यह देखना चाहिए था कि ट्रायल कोर्ट का डिस्चार्ज करने का फैसला सही था या नहीं, लेकिन सीबीआई कोर्ट ने मामले में आरोपों की प्रकृति ही बदल दी, जबकि यह अधिकार ट्रायल कोर्ट के पास उचित चरण पर होता है।
बघेल की ओर से यह भी कहा गया कि किसी डिस्चार्ज आदेश में हस्तक्षेप (Interference) केवल असाधारण परिस्थितियों में किया जा सकता है, जैसे कि आदेश पूरी तरह से गैरकानूनी हो या वह सबूतों के बिना दिया गया हो।
साजिश में शामिल होने के आरोपों को बघेल ने बताया गलत
भूपेश बघेल ने मामले के आधार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष (Prosecution) की सामग्री में आरोप तय करने के लिए जरूरी गंभीर संदेह (Grave Suspicion) पैदा करने वाला कोई ठोस आधार नहीं है।
उन्होंने कहा कि केवल सह-आरोपियों (Co-Accused) के साथ होटल में मौजूद होना किसी आपराधिक साजिश में शामिल होने का प्रमाण नहीं हो सकता।
बघेल ने यह भी कहा कि जालसाजी (Forgery) से जुड़े आरोपों में उनकी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका (Direct or Indirect Involvement) दिखाने वाला कोई सबूत मौजूद नहीं है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर भी दी सफाई
भूपेश बघेल ने कहा कि गवाहों के बयान (Witness Statements) केवल इतना बताते हैं कि उन्होंने सह-आरोपी विनोद वर्मा (Vinod Verma) की गिरफ्तारी के विरोध में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस (Press Conference) आयोजित की थी।
उनकी याचिका में दावा किया गया कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कथित आपत्तिजनक सीडी (Objectionable CD) को उन्होंने खुद वितरित किया हो, ऐसा कोई सबूत नहीं है।
हाईकोर्ट में बघेल की ओर से कई वकीलों ने रखा पक्ष
हाईकोर्ट में भूपेश बघेल की ओर से अधिवक्ता मयंक जैन (Mayank Jain), हर्षवर्धन परगनिहा (Harshwardhan Parganiha), मधुर जैन (Madhur Jain), अर्पित गोयल (Arpit Goel), हर्षित शर्मा (Harshit Sharma) और मनुभा शंकर (Manubha Shankar) ने पक्ष रखा।
फिलहाल छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद इस मामले में सीबीआई कोर्ट की आगे की कार्रवाई रुक गई है। हाईकोर्ट के विस्तृत आदेश का इंतजार किया जा रहा है।


