छत्तीसगढ़ में 51 हजार करोड़ की रेल परियोजनाओं पर काम, 32 स्टेशनों का भी होगा कायाकल्प

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में 51,080 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाओं पर काम जारी है। CM विष्णुदेव साय ने कहा कि आधुनिक रेल सुविधाओं से कनेक्टिविटी और विकास को गति मिलेगी।

Kumud Gupta
Published on: 20 Oct 2026 11:30 AM IST
छत्तीसगढ़ में 51 हजार करोड़ की रेल परियोजनाओं पर काम, 32 स्टेशनों का भी होगा कायाकल्प
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Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में रेल नेटवर्क का विस्तार प्रदेश की कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को नई दिशा देने की तैयारी में है। नई रेल लाइनों, दोहरीकरण, विद्युतीकरण और रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण के जरिए औद्योगिक क्षेत्रों से लेकर दूरस्थ इलाकों तक रेल सुविधाएं मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। प्रदेश में फिलहाल 51,080 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाओं पर काम चल रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार के नेतृत्व में रेल अधोसंरचना का तेजी से विस्तार हो रहा है, जिससे विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प मजबूत होगा।

रेलवे बजट में करीब 24 गुना बढ़ोतरी

केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ में रेल सुविधाओं के विस्तार पर निवेश बढ़ाया जा रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रदेश का रेलवे बजट आवंटन बढ़ाकर 7,470 करोड़ रुपये किया गया है। वर्ष 2009-14 के दौरान राज्य को रेलवे के लिए औसतन 311 करोड़ रुपये सालाना मिलते थे। इस तरह वार्षिक औसत आवंटन में करीब 24 गुना वृद्धि हुई है।

इस निवेश का उद्देश्य व्यस्त रेल मार्गों पर दबाव कम करना, खनिज और औद्योगिक माल की ढुलाई बढ़ाना तथा उन क्षेत्रों तक रेल संपर्क पहुंचाना है, जहां अभी कनेक्टिविटी सीमित है। बेहतर रेल नेटवर्क से उद्योगों की परिवहन लागत घटने, निवेश को बढ़ावा मिलने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

राष्ट्रीय माल ढुलाई को मिलेगा वैकल्पिक रेल मार्ग

छत्तीसगढ़ की रेल विकास योजनाओं में खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा रेल कॉरिडोर महत्वपूर्ण है। करीब 278 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अप्रैल 2025 में मंजूरी दी थी। शुरुआत में इसकी अनुमानित लागत 8,741 करोड़ रुपये थी, जिसे बाद में संशोधित कर 7,854 करोड़ रुपये कर दिया गया।

इस परियोजना का उद्देश्य बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग के व्यस्त रेल खंडों को बाईपास करते हुए माल और यात्री ट्रेनों के लिए अतिरिक्त रेल मार्ग उपलब्ध कराना है। इससे कोलकाता-मुंबई रेल मार्ग पर परिचालन का दबाव कम करने और बलौदाबाजार सहित नए औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर रेल संपर्क देने में मदद मिलेगी।

कॉरिडोर से कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, सीमेंट और बिजली उत्पादन से जुड़े उद्योगों के लिए माल ढुलाई की क्षमता बढ़ने की संभावना है। साथ ही, सड़क मार्ग पर निर्भरता कम होने से औद्योगिक इकाइयों को बाजारों और बंदरगाहों तक माल पहुंचाने में सुविधा मिल सकती है।

बस्तर की कनेक्टिविटी मजबूत करने पर जोर

रेल नेटवर्क के विस्तार में बस्तर क्षेत्र को जोड़ना भी अहम है। रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन की लंबाई करीब 140 किलोमीटर है और इसके लिए भूमि अधिग्रहण पूरा होने की जानकारी दी गई है। वहीं, किरंदुल-कोत्तागुडेम रेल लाइन और गढ़चिरौली-बीजापुर-किरंदुल (बचेली) रेल परियोजना के सर्वेक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

दल्लीराजहरा-रावघाट रेल परियोजना के तहत दल्लीराजहरा से अंतागढ़ तक करीब 77 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। इससे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को रेल सुविधा का लाभ मिला है। परियोजना के अगले चरण में रावघाट तक रेल संपर्क विकसित करने की योजना है।

इस रेल लाइन के पूरा होने पर रावघाट की लौह अयस्क खदानों को भिलाई इस्पात संयंत्र से जोड़ने में मदद मिलेगी। इससे खनिज परिवहन, औद्योगिक गतिविधियों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, कोत्तावलसा-किरंदुल रेल लाइन के दोहरीकरण से बस्तर क्षेत्र में माल और यात्री परिवहन की क्षमता बढ़ाने में मदद मिली है।

कटघोरा से डोंगरगढ़ तक नई रेल लाइन की योजना

छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल लाइन भी कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। करीब 295 किलोमीटर लंबा यह मार्ग कटघोरा से करतला, मुंगेली, कवर्धा और खैरागढ़ होते हुए डोंगरगढ़ तक प्रस्तावित है।

इस परियोजना को रेल मंत्रालय और छत्तीसगढ़ सरकार के संयुक्त उपक्रम के माध्यम से विकसित करने की योजना है। इसके लिए स्पेशल परपज व्हीकल (एसपीवी) गठित करने का प्रस्ताव है।

नई रेल लाइन से उन क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिल सकती है, जहां फिलहाल रेल सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं या सीमित हैं। इससे यात्रियों की आवाजाही के साथ कृषि उत्पादों के परिवहन, व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

उत्तर छत्तीसगढ़ में भी रेल संपर्क बढ़ाने की तैयारी

उत्तर छत्तीसगढ़ और सीमावर्ती क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए कई रेल कॉरिडोर प्रस्तावित हैं। इनमें सरडेगा-पत्थलगांव-अंबिकापुर रेल कॉरिडोर (244 किलोमीटर), धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा कॉरिडोर (301 किलोमीटर) और अंबिकापुर-बरवाडीह रेल कॉरिडोर (200 किलोमीटर) शामिल हैं।

इन परियोजनाओं को रेल मंत्रालय से मंजूरी मिलने की संभावना जताई गई है। अगस्त 2026 में इन प्रस्तावों पर जल्द निर्णय लेने और सर्वेक्षण की प्रक्रिया तेज करने का मुद्दा उठाया गया था।

इन रेल कॉरिडोर के विकसित होने से उत्तर छत्तीसगढ़ के दूरस्थ क्षेत्रों को बेहतर रेल संपर्क मिल सकता है। इससे व्यापार, पर्यटन, खनिज परिवहन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

अमृत भारत स्टेशन योजना से 32 स्टेशनों का आधुनिकीकरण

नई रेल लाइनों के साथ मौजूदा रेलवे नेटवर्क और स्टेशनों को आधुनिक बनाने पर भी काम किया जा रहा है। राज्य सरकार के अनुसार, अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत छत्तीसगढ़ के 32 रेलवे स्टेशनों को करीब 1,680 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है।

स्टेशनों के आधुनिकीकरण के तहत बेहतर प्रतीक्षालय, स्वच्छ परिसर, दिव्यांगजन के अनुकूल सुविधाएं और आधुनिक यात्री सुविधाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य यात्रियों को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और सुगम यात्रा का अनुभव उपलब्ध कराना है।

अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत चांपा, बालोद और सरोना रेलवे स्टेशनों का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास का सशक्त आधार है। चांपा, बालोद और सरोना जैसे स्टेशनों के उन्नयन से व्यापार, पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।

उद्योगों से किसानों तक मिलेगा लाभ

छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख औद्योगिक और खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल है। ऐसे में मजबूत रेल नेटवर्क राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से उद्योगों की माल ढुलाई आसान होगी, परिवहन लागत कम करने में मदद मिलेगी और निवेश के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

इसके साथ ही किसानों को अपने उत्पाद बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा मिलने और युवाओं के लिए रोजगार व उद्यमिता के अवसर बढ़ने की संभावना है। आधुनिक रेलवे स्टेशन और नई रेल परियोजनाएं दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने में भी मदद कर सकती हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के अनुसार, नई रेल परियोजनाओं, दोहरीकरण, विद्युतीकरण और आधुनिक यात्री सुविधाओं का विस्तार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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Kumud Gupta

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I am currently pursuing a Bachelor of Journalism and Mass Communication (BJMC) and am a 5th Semester student at KITM Group of Institutions, Khatima, Uttarakhand. I have a strong interest in content writing, particularly on crime, politics, social issues, and history.

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