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छत्तीसगढ़ में आएगा विदेशी पैसा! निवेशकों से मिलने सिंगापुर पहुंचे CM साय
Chhattisgarh Foreign Investment: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सिंगापुर में SING फोरम 2026 में शामिल होंगे। जानिए इस दौरे से छत्तीसगढ़ में विदेशी निवेश, उद्योग और रोजगार के कितने नए अवसर बन सकते हैं।
Vishnu Deo Sai Singapore Visit
Chhattisgarh Foreign Investment: छत्तीसगढ़ को अंतरराष्ट्रीय निवेश के नए केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिशों के बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सिंगापुर पहुंच गए हैं। शनिवार को सिंगापुर पहुंचने पर भारत के उच्चायुक्त डॉ. शिल्पक अंबुले ने उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री का यह दौरा राज्य में विदेशी निवेश आकर्षित करने, औद्योगिक साझेदारी बढ़ाने और छत्तीसगढ़ की कारोबारी संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की ओर से SING फोरम 2026 में भागीदारी के लिए छत्तीसगढ़ को नामित किया गया है।
मुख्यमंत्री साय सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन (SBF) की ओर से आयोजित SING फोरम 2026 में राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस दौरान होने वाली CEO राउंडटेबल बैठक में वे सिंगापुर के प्रमुख निवेशकों, उद्योगपतियों और कारोबारी प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करेंगे। बैठक में छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता, निवेश के अनुकूल नीतियों, प्राकृतिक संसाधनों और विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध कारोबारी अवसरों को सामने रखा जाएगा।
क्या है SING फोरम 2026?
SING का पूरा नाम Singapore-India Network for Growth है। यह सिंगापुर और भारत के बीच आर्थिक सहयोग, व्यापारिक साझेदारी और निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया एक उच्चस्तरीय अंतरराष्ट्रीय मंच है। सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन के मुताबिक, वर्ष 2026 में इसका पहला आयोजन हो रहा है। इसमें दोनों देशों के वरिष्ठ सरकारी प्रतिनिधियों, उद्योग जगत के दिग्गजों और रणनीतिक निवेशकों को एक मंच पर लाने की योजना है।
इस मंच का उद्देश्य केवल दोनों देशों के बीच कारोबारी चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेशकों और सरकारों के बीच सीधे संपर्क स्थापित कर व्यावहारिक कारोबारी साझेदारियों को आगे बढ़ाना भी है। इसके माध्यम से कंपनियों को नए बाजारों में कारोबार विस्तार, निवेश की संभावनाओं और औद्योगिक सहयोग के अवसर तलाशने का मौका मिलेगा।
छत्तीसगढ़ के लिए क्यों अहम है यह मंच?
SING फोरम में छत्तीसगढ़ की भागीदारी इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि राज्य के पास खनिज संपदा, ऊर्जा संसाधन, कृषि उत्पादन और औद्योगिक विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। अब तक प्रदेश की औद्योगिक पहचान मुख्य रूप से इस्पात, सीमेंट, बिजली और खनिज आधारित उद्योगों से जुड़ी रही है। सरकार की कोशिश है कि इन पारंपरिक क्षेत्रों के साथ-साथ नए और तकनीक आधारित उद्योगों में भी निवेश बढ़ाया जाए।
छत्तीसगढ़ की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइस, टेक्सटाइल, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी, आईटी आधारित सेवाओं, डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों को भी प्रोत्साहन देने का प्रावधान है। ऐसे में सिंगापुर के निवेशकों के सामने इन क्षेत्रों की संभावनाएं रखने से प्रदेश को नए औद्योगिक साझेदार मिल सकते हैं।
निवेश आया तो प्रदेश में क्या बदल सकता है?
इस अंतरराष्ट्रीय मंच के जरिए यदि छत्तीसगढ़ में नए निवेश प्रस्तावों को ठोस परियोजनाओं में बदला जाता है, तो इसका असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था से लेकर रोजगार तक दिखाई दे सकता है। नए उद्योग स्थापित होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। इसके अलावा तकनीकी सहयोग मिलने पर उत्पादन की गुणवत्ता, औद्योगिक दक्षता और आधुनिक विनिर्माण क्षमता में सुधार की संभावनाएं भी बनेंगी।
खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आधारित उद्योगों में निवेश से किसानों के उत्पादों को स्थानीय स्तर पर बेहतर बाजार और मूल्य मिल सकता है। वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी, डेटा सेंटर और आधुनिक तकनीक से जुड़े उद्योगों के आने पर प्रदेश के शिक्षित और तकनीकी रूप से कुशल युवाओं को दूसरे राज्यों में रोजगार तलाशने की जरूरत कम हो सकती है। लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ने से कारोबार की लागत कम करने और निर्यात को प्रोत्साहन देने में भी मदद मिल सकती है।
हालांकि, इन संभावित बदलावों का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि फोरम में होने वाली चर्चाएं कितने निवेश समझौतों, परियोजनाओं और जमीन पर उतरने वाले उद्योगों में बदलती हैं।
पहले भी सिंगापुर जा चुके हैं कई राज्यों के मुख्यमंत्री
सिंगापुर में निवेश की संभावनाएं तलाशने के लिए भारतीय राज्यों के मुख्यमंत्रियों के दौरे पहले भी होते रहे हैं। भारत के उच्चायोग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल नवंबर-दिसंबर 2023 में, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी नवंबर 2024 में, तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी जनवरी 2025 में और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा फरवरी 2025 में सिंगापुर का दौरा कर चुके हैं।
इसके अलावा आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू जुलाई 2025 और जून 2026 में तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ फरवरी 2026 में सिंगापुर गए थे। इन दौरों का उद्देश्य निवेश और औद्योगिक सहयोग की संभावनाओं को आगे बढ़ाना था।
हालांकि, SING फोरम 2026 पहला आयोजन है, इसलिए इससे पहले किसी मुख्यमंत्री के इस विशेष फोरम में शामिल होने का सवाल नहीं है। दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों के सिंगापुर दौरे इस बात को दिखाते हैं कि भारतीय राज्य वैश्विक निवेश आकर्षित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कारोबारी केंद्रों से सीधे संपर्क बढ़ा रहे हैं।
निवेश के जरिए छत्तीसगढ़ की नई पहचान बनाने की तैयारी
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कहना है कि राज्य सरकार की प्राथमिकता छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख निवेश गंतव्यों में शामिल करना है। इसके लिए नई औद्योगिक नीति, प्राकृतिक संसाधनों, बेहतर बुनियादी ढांचे, कुशल मानव संसाधन और उभरते क्षेत्रों की संभावनाओं का लाभ उठाया जा रहा है।
SING फोरम में छत्तीसगढ़ की भागीदारी इसी रणनीति का हिस्सा है। अब देखना होगा कि सिंगापुर के निवेशकों के साथ होने वाली बातचीत प्रदेश के लिए कितने नए निवेश प्रस्ताव और औद्योगिक साझेदारी लेकर आती है।


