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Chhattisgarh Doctor Protest:बाहरी डॉक्टरों को सीधी छूट देने के फैसले पर भड़के डॉक्टर्स; दी चेतावनी
Chhattisgarh Doctor Protest: छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल के एक नए प्रस्ताव ने राज्य के चिकित्सा क्षेत्र में बहस छेड़ दी है। काउंसिल ने दूसरे राज्यों के डॉक्टरों को बिना स्थानीय पंजीकरण के छत्तीसगढ़ में इलाज और चिकित्सा सेवाएं देने की अनुमति देने का फैसला लिया है।
Chhattisgarh Doctor Protest
Chhattisgarh Doctor Protest: छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल के एक नए प्रस्ताव ने राज्य के चिकित्सा क्षेत्र में बहस छेड़ दी है। काउंसिल ने दूसरे राज्यों के डॉक्टरों को बिना स्थानीय पंजीकरण के छत्तीसगढ़ में इलाज और चिकित्सा सेवाएं देने की अनुमति देने का फैसला लिया है। रायपुर में आयोजित हालिया बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद स्थानीय डॉक्टरों और चिकित्सा संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।
आईएमए ने जताई कड़ी आपत्ति
इस फैसले के खिलाफ सबसे मुखर विरोध इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की छत्तीसगढ़ इकाई ने किया है। आईएमए का कहना है कि वर्तमान नियमों के तहत किसी भी बाहरी डॉक्टर को राज्य में प्रैक्टिस करने से पहले छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है। ऐसे में नए प्रस्ताव को नियमों के विपरीत और स्थानीय चिकित्सकों के हितों के खिलाफ बताया जा रहा है। डॉक्टरों का मानना है कि इस निर्णय से राज्य के मेडिकल छात्रों, जूनियर डॉक्टरों और स्थानीय चिकित्सकों के रोजगार के अवसर प्रभावित हो सकते हैं। जूनियर डॉक्टर संगठनों ने भी अपने भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त की है।
आंदोलन की चेतावनी
आईएमए ने चेतावनी दी है कि यदि इस प्रस्ताव को वापस नहीं लिया गया तो राज्यभर में व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। संगठन का कहना है कि जरूरत पड़ने पर चिकित्सा सेवाओं को प्रभावित करने वाले विरोध कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकते हैं। इसके अलावा डॉक्टरों का एक प्रतिनिधिमंडल स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी लिखित आपत्ति दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है। साथ ही इस फैसले के खिलाफ कानूनी विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।
काउंसिल ने बताया फैसला क्यों जरूरी
मेडिकल काउंसिल के अधिकारियों का कहना है कि यह कदम ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने के उद्देश्य से उठाया गया है। उनका तर्क है कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी और मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा।हालांकि, आलोचकों का कहना है कि बिना स्थानीय पंजीकरण के डॉक्टरों को अनुमति देने से जवाबदेही और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। उनका मानना है कि किसी विवाद या शिकायत की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना कठिन हो जाएगा।


