AK-47 से 9 राउंड फायरिंग, IPS अंकिता शर्मा पर क्यों उठे सवाल? पूर्व जनरल ने बताई ये गलतियां

IPS Ankita Sharma: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में IPS अंकिता शर्मा का AK-47 से फायरिंग का वीडियो वायरल है। पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल KJS Dhillon ने हथियारों की सुरक्षा और नियमों के पालन पर गंभीर सवाल उठाए।

Shalni Kumari
Published on: 21 Oct 2026 1:37 PM IST
KJS Dhillon
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  Ankita Sharma AK-47 Firing 

IPS Ankita Sharma: विजयादशमी (Vijayadashami) पर शस्त्र पूजन (Weapon Worship) की परंपरा निभाते हुए AK-47 से गोलियां चलाना राजनांदगांव की पुलिस अधीक्षक (Superintendent of Police) IPS अंकिता शर्मा के लिए चर्चा का विषय बन गया है। साड़ी पहने राइफल से फायरिंग करती उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया (Social Media) पर वायरल हो रहे हैं। मामला तब और गरमा गया, जब भारतीय सेना के सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों (KJS Dhillon) ने वीडियो में हथियार संभालने के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने इसे गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए हथियारों की सुरक्षा से जुड़े बुनियादी नियमों के पालन और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया।

शस्त्र पूजन के बाद AK-47 से फायरिंग का वीडियो वायरल

यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के राजनांदगांव (Rajnandgaon) स्थित पुलिस लाइन का है। विजयादशमी के अवसर पर यहां शस्त्र पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें जिले की एसपी अंकिता शर्मा भी शामिल हुईं। सामने आए वीडियो में वह पारंपरिक साड़ी पहने AK-47 राइफल के साथ दिखाई देती हैं। पूजा के बाद वह राइफल से हवाई फायरिंग (Aerial Firing) करती नजर आती हैं।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अंकिता शर्मा ने इस दौरान लगातार नौ राउंड फायर किए। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा शुरू हो गई। विजयादशमी पर शस्त्र पूजन पुलिस और सैन्य बलों में प्रचलित परंपरा है, लेकिन हथियार चलाने के दौरान सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन भी उतना ही जरूरी है। इसी पहलू को लेकर पूर्व सैन्य अधिकारी केजेएस ढिल्लों ने आपत्ति जताई है।

केजेएस ढिल्लों ने हथियारों की सुरक्षा पर क्या सवाल उठाए?

पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए वीडियो में हथियार संभालने के तरीके को असुरक्षित बताया। उनका कहना है कि किसी भी लोडेड हथियार (Loaded Weapon) को संभालते समय तय सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य है। हथियार की दिशा पर नियंत्रण रखना और ट्रिगर से जुड़ी सावधानियां बरतना इसके बुनियादी हिस्से हैं।

ढिल्लों के मुताबिक, वीडियो में राइफल अलग-अलग दिशाओं में जाती दिखाई देती है। उन्होंने इसे हथियार संचालन (Weapon Handling) के सुरक्षा मानकों के लिहाज से गंभीर चिंता बताया। फायरिंग के दौरान हथियार की दिशा ऐसी होनी चाहिए कि किसी अनचाहे शॉट की स्थिति में आसपास मौजूद लोगों को नुकसान पहुंचने का खतरा कम से कम रहे।

आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा को लेकर भी जताई चिंता

ढिल्लों ने अपनी पोस्ट में वीडियो की पृष्ठभूमि में मौजूद लोगों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, वहां कुछ लोग डरे हुए दिखाई देते हैं। उन्होंने इस स्थिति को भी सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक बताया। हथियार चलाने के दौरान केवल फायरिंग करने वाले व्यक्ति की दक्षता ही नहीं, बल्कि आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा (Public Safety) भी महत्वपूर्ण होती है।

पूर्व सैन्य अधिकारी ने यह सवाल भी उठाया कि क्या सरकारी सेवा में इस्तेमाल होने वाले हथियार को अधिकृत उद्देश्य (Authorized Purpose) और निर्धारित पोशाक में चलाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि वीडियो में सेवा के हथियार का गैर-अधिकृत गतिविधि और गैर-अधिकृत पोशाक में इस्तेमाल दिखाई देता है। हालांकि, ये आपत्तियां ढिल्लों की ओर से उठाई गई हैं; उपलब्ध जानकारी के आधार पर इन्हें किसी आधिकारिक जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

ट्रेनिंग में सिखाए जाने वाले नियमों की अनदेखी का आरोप

केजेएस ढिल्लों ने हथियारों के प्रशिक्षण (Weapons Training) में सिखाए जाने वाले बुनियादी नियमों का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि पुलिस और सेना की प्रशिक्षण अकादमियों में हथियार चलाने की तकनीक के साथ सुरक्षित संचालन की प्रक्रियाओं पर भी जोर दिया जाता है। वीडियो में इन नियमों का पालन होता नहीं दिखने पर उन्होंने सवाल उठाए।

ढिल्लों ने चेतावनी दी कि हथियार संभालने में लापरवाही खुद फायरिंग करने वाले व्यक्ति और आसपास मौजूद लोगों, दोनों के लिए खतरनाक हो सकती है। ऐसी स्थिति में गंभीर चोट या जान-माल का नुकसान भी हो सकता है। उन्होंने पूरे मामले को ‘Authority Without Responsibility’ यानी ‘जिम्मेदारी के बिना अधिकार’ का उदाहरण बताते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) की जरूरत पर जोर दिया, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

कौन हैं केजेएस ढिल्लों?

लेफ्टिनेंट जनरल कंवल जीत सिंह ढिल्लों भारतीय सेना (Indian Army) के सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। उन्हें केजेएस ‘टाइनी’ ढिल्लों के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने दिसंबर 1983 में राजपूताना राइफल्स (Rajputana Rifles) में कमीशन प्राप्त किया था। अपने सैन्य करियर के दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के संवेदनशील क्षेत्रों में सेवाएं दीं।

ढिल्लों श्रीनगर स्थित सेना की 15वीं कोर, जिसे चिनार कोर (Chinar Corps) के नाम से जाना जाता है, के कमांडर रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने रक्षा खुफिया एजेंसी (Defence Intelligence Agency) के महानिदेशक की जिम्मेदारी भी संभाली। जनवरी 2022 में वह सैन्य सेवा से सेवानिवृत्त हुए।

कौन हैं IPS अंकिता शर्मा?

अंकिता शर्मा छत्तीसगढ़ कैडर की 2018 बैच की भारतीय पुलिस सेवा (Indian Police Service) अधिकारी हैं। वह राजनांदगांव जिले में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात हैं। उनका संबंध छत्तीसगढ़ के दुर्ग से है। उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में तीसरे प्रयास में सफलता हासिल की थी। वर्ष 2017 की परीक्षा में उन्हें अखिल भारतीय स्तर पर 203वीं रैंक मिली थी, जिसके बाद वह IPS अधिकारी बनीं।

अंकिता शर्मा की यूपीएससी सफलता की कहानी पहले भी चर्चा में रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, शुरुआती असफलताओं के बावजूद उन्होंने तैयारी जारी रखी और सिविल सेवा में चयन हासिल किया। उनकी यात्रा प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Examinations) की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए प्रेरणा का विषय भी रही है।

छत्तीसगढ़ में अलग-अलग पुलिस जिम्मेदारियां निभाने के बाद वह फिलहाल राजनांदगांव की एसपी हैं। इस बार विजयादशमी के शस्त्र पूजन कार्यक्रम में AK-47 से फायरिंग का वीडियो सामने आने के बाद उनका नाम चर्चा में है। वहीं, पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों की आपत्तियों ने हथियारों के सुरक्षित इस्तेमाल, पुलिस अनुशासन और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े सवालों को केंद्र में ला दिया है।

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