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₹600 छोड़कर ₹1000 रुपए रोज कमाने गए थे कश्मीर... कुलगाम आतंकी हमले में गंवाई जान!
Kulgam Terror Attack: कश्मीर के कुलगाम में आतंकियों ने कथित तौर पर धर्म और पहचान पूछने के बाद छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों की गोली मारकर हत्या कर दी। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
Kulgam Terror Attack Story: छत्तीसगढ़ के दो युवा मजदूर बेहतर कमाई की उम्मीद लेकर 1,500 किलोमीटर दूर जम्मू-कश्मीर पहुंचे थे। घर की आर्थिक हालत सुधारने, कर्ज चुकाने और भविष्य संवारने का सपना लेकर गए इन मजदूरों की जिंदगी कुलगाम आतंकी हमले में खत्म हो गई। आतंकियों ने कथित तौर पर नाम, धर्म और पहचान पूछने के बाद उन्हें गोली मार दी।
बेहतर कमाई की उम्मीद में पहुंचे थे कश्मीर
मारे गए मजदूरों की पहचान 24 वर्षीय दीपक रात्रे और 25 वर्षीय भूपेंद्र भैना के रूप में हुई है। दोनों छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे और कुलगाम जिले के एक ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे थे। परिजनों के मुताबिक, कश्मीर में मजदूरी करने पर दीपक और उसकी पत्नी को काम मिलने पर करीब 1,000 रुपये प्रतिदिन तक की आमदनी हो जाती थी। वहीं छत्तीसगढ़ में उन्हें मुश्किल से 600 रुपये प्रतिदिन मिलते थे और काम भी नियमित नहीं मिलता था। यही वजह थी कि वे बार-बार रोजगार के लिए कश्मीर जाते थे।
दीपक इससे पहले भी चार बार कश्मीर में काम कर चुका था। इस बार जून महीने में वह फिर रोजगार के लिए वहां पहुंचा था। इससे पहले वह पंजाब और हिमाचल प्रदेश में भी मजदूरी कर चुका था।
दीपक की मां भी उसी के साथ मजदूरी करती थीं, जबकि जन्म से दिव्यांग उसका छोटा भाई गांव में रहकर परिवार के दो साल के बच्चे की देखभाल करता था। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी लगभग पूरी तरह दीपक पर ही थी।
घर बनाने और कर्ज चुकाने का था सपना
परिजनों ने बताया कि दीपक अपने लिए एक पक्का घर बनाना चाहता था। इसके अलावा शादी के लिए लिया गया 50 हजार रुपये का कर्ज भी वह धीरे-धीरे चुका रहा था। बेहतर मजदूरी की उम्मीद में उसने कश्मीर का रुख किया था, लेकिन उसकी यह यात्रा आखिरी साबित हुई।
दीपक के परिवार का दर्द इसलिए और बढ़ गया क्योंकि सुरक्षा और परिस्थितियों के कारण उसका अंतिम संस्कार कश्मीर में ही कर दिया गया। शव गांव नहीं लाया जा सका।
दीपक के चाचा दिलहरन सांडे ने बताया कि जब दीपक चार साल का था, तभी उसके पिता ने आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद चाचाओं ने ही दीपक, उसकी मां और छोटे भाई की परवरिश की।
उन्होंने कहा, "हमने उसकी पढ़ाई, शादी और जीवन की हर जिम्मेदारी निभाई। सबसे बड़ा दुख यही है कि हम उसे आखिरी विदाई भी नहीं दे सके।"
भाई का दावा- धर्म पूछकर मारी गोली
दीपक के भाई मनोज रात्रे ने बताया कि शुक्रवार रात करीब 8 बजे आतंकियों ने उससे पूछा कि वह कहां का रहने वाला है। इसके बाद उसका धर्म पूछा गया। उसने खुद को हिंदू बताया, जिसके बाद उसे गोली मार दी गई।
मनोज ने कहा, "करीब दो-तीन महीने पहले वह काम के लिए कश्मीर गया था। प्रशासन से सूचना मिली कि आतंकी हमले में उसकी मौत हो गई। पूरा परिवार सदमे में है।" भूपेंद्र भैना के मामा गणपत भैना का भी दावा है कि हमलावरों ने पहले मजदूरों की पहचान की पुष्टि की।
उनके अनुसार, आतंकियों ने नाम, धर्म पूछा और आधार कार्ड देखकर पहचान की। इसके बाद दोनों को उनकी झुग्गियों से बाहर बुलाया गया, जहां उनकी पत्नियां खाना बना रही थीं, और फिर बेहद करीब से गोली मार दी गई।
यह आतंकी हमला शुक्रवार शाम जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में एक ईंट-भट्ठे पर हुआ। हमलावरों ने कथित तौर पर बेहद नजदीक से गोली चलाकर दोनों मजदूरों की हत्या कर दी। सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं।


