15 August 2026 Slogans: 'इंकलाब जिंदाबाद' से 'जय हिंद' तक, 20 जोशीले देशभक्ति नारे

15 August 2026 Slogans: 15 अगस्त 2026 पर देशभक्ति के जोश से भर देंगे ये 20 प्रसिद्ध नारे। जानें 'वंदे मातरम्', 'इंकलाब जिंदाबाद', 'जय हिंद', 'करो या मरो' समेत इनके इतिहास और महत्व।

Jyotsana Singh
Published on: 14 Aug 2026 5:11 PM IST (Updated on: 14 Aug 2026 6:05 PM IST)
15 August 2026 Slogans: 20 Patriotic Slogans from Inquilab Zindabad to Jai Hind
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15 August 2026 Slogans: 20 Patriotic Slogans from Inquilab Zindabad to Jai Hind

15 August 2026 Slogans:15 अगस्त आते ही देश का माहौल देशभक्ति के रंग में रंग जाता है। दिल्ली में लाल किले से लेकर देश भर के हर स्कूलों में तिरंगा फहराया जाता है, राष्ट्रगान गूंजता है और बच्चे हाथों में तिरंगा लेकर प्रभात फेरी के बीच बड़े उत्साह के साथ देशभक्ति के नारे लगाते हैं। कहीं 'भारत माता की जय' की गूंज सुनाई देती है तो कहीं 'वंदे मातरम्' और 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारे माहौल में जोश भर देते हैं। लेकिन इन नारों की कहानी सिर्फ आजादी के जश्न तक सीमित नहीं है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में ऐसे शब्द और वाक्य लोगों को एकजुट करने, ब्रिटिश शासन के खिलाफ आवाज उठाने और युवाओं में त्याग व संघर्ष की भावना पैदा करने का माध्यम बने। इस 15 अगस्त पर आइए जानते हैं ऐसे ही 20 प्रसिद्ध देशभक्ति नारों के बारे में।

'वंदे मातरम्' से शुरू हुई राष्ट्रवादी चेतना

'वंदे मातरम्' को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना आनंदमठ से पहचान मिली। आगे चलकर यह स्वतंत्रता आंदोलन का बेहद प्रभावशाली राष्ट्रवादी उद्घोष बना। कांग्रेस के शुरुआती अधिवेशनों और स्वतंत्रता आंदोलन की सभाओं में भी इसकी गूंज सुनाई देती थी।

'इंकलाब जिंदाबाद' क्रांतिकारी आंदोलन का लोकप्रिय नारा

'इंकलाब जिंदाबाद' का संबंध उर्दू शायर और स्वतंत्रता सेनानी मौलाना हसरत मोहानी से जोड़ा जाता है। बाद में भगत सिंह और उनके साथियों ने इसे क्रांतिकारी आंदोलन का लोकप्रिय नारा बना दिया। यही वजह है कि आज भी यह नारा भगत सिंह की क्रांतिकारी छवि के साथ सबसे ज्यादा याद किया जाता है।

'स्वराज' से 'करो या मरो' तक

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का प्रसिद्ध उद्घोष 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा' भारतीय राजनीति में स्वशासन की मांग को जनभावना से जोड़ने वाला प्रभावशाली वाक्य बना।

भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 'करो या मरो' का आह्वान

महात्मा गांधी के नेतृत्व में 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 'करो या मरो' का आह्वान किया गया। इसी आंदोलन से जुड़ा 'भारत छोड़ो' नारा भी पूरे देश में ब्रिटिश शासन के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक बन गया। 'भारत छोड़ो' शब्दों को आंदोलन के संदर्भ में कांग्रेस के नेता और समाजवादी कार्यकर्ता यूसुफ मेहर अली से जोड़ा जाता है।

नेताजी के नारों ने जगाया जोश

सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज के आंदोलन में नारों की अहम भूमिका रही। 'जय हिंद', 'दिल्ली चलो' और 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा' जैसे आह्वानों ने युवाओं और सैनिकों में संघर्ष की भावना को मजबूत किया। इनमें 'जय हिंद' बाद में स्वतंत्र भारत का बेहद लोकप्रिय राष्ट्रीय अभिवादन बन गया।

भगत सिंह का 'क्रांति' वाला संदेश

भगत सिंह का एक चर्चित कथन था, 'बम और पिस्तौल क्रांति नहीं लाते, क्रांति की तलवार विचारों की धार पर तेज की जाती है।' उनके लिए क्रांति केवल हिंसक कार्रवाई का नाम नहीं, बल्कि विचारों और सामाजिक बदलाव की प्रक्रिया भी थी।

भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे क्रांतिकारियों के बलिदान ने 'इंकलाब जिंदाबाद' को आने वाली पीढ़ियों के बीच अमर कर दिया।

'सरफरोशी की तमन्ना' के पीछे की कहानी

'सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है...' को अक्सर राम प्रसाद बिस्मिल के नाम से याद किया जाता है। हालांकि, इसका मूल श्रेय उर्दू शायर बिस्मिल अज़ीमाबादी को दिया जाता है। उन्होंने यह प्रसिद्ध गजल लिखी थी, जिसे बाद में राम प्रसाद बिस्मिल ने स्वतंत्रता आंदोलन में लोकप्रिय बनाया। भारत सरकार के आजादी का अमृत महोत्सव से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड में भी बिस्मिल अज़ीमाबादी को इसका रचनाकार बताया गया है।

राम प्रसाद बिस्मिल और दूसरे क्रांतिकारियों के साथ इस रचना का जुड़ाव इतना गहरा हुआ कि इसकी पंक्तियां स्वतंत्रता संघर्ष के क्रांतिकारी तेवर की पहचान बन गईं।

15 अगस्त पर बोलने के लिए 20 प्रसिद्ध नारे

1. वंदे मातरम् - बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय

2. इंकलाब जिंदाबाद - मौलाना हसरत मोहानी; भगत सिंह ने इसे लोकप्रिय बनाया

3. स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा - बाल गंगाधर तिलक

4. करो या मरो - महात्मा गांधी

5. भारत छोड़ो - यूसुफ मेहर अली से जुड़ा, भारत छोड़ो आंदोलन में लोकप्रिय

6. जय हिंद - नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद आंदोलन से लोकप्रिय

7. तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा - सुभाष चंद्र बोस

8. दिल्ली चलो - सुभाष चंद्र बोस

9. सत्यमेव जयते - प्राचीन उपनिषदिक वाक्य; पंडित मदन मोहन मालवीय ने इसे लोकप्रिय बनाया

10. सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है - बिस्मिल अज़ीमाबादी की रचना, राम प्रसाद बिस्मिल ने लोकप्रिय बनाया

11. सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा - मोहम्मद इकबाल

12. बम और पिस्तौल क्रांति नहीं लाते... - भगत सिंह

13. विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा - श्यामलाल गुप्त 'पार्षद'

14. दुश्मनों की गोलियों का हम सामना करेंगे, आजाद हैं, आजाद ही रहेंगे - चंद्रशेखर आजाद

15. अब भी जिसका खून न खौला... - यह पंक्ति लोकप्रिय रूप से चंद्रशेखर आजाद से जोड़ी जाती है

16. जय जवान, जय किसान - लाल बहादुर शास्त्री

17. भारत माता की जय - स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोकप्रिय राष्ट्रवादी उद्घोष

18. वीरों का बलिदान, याद रखेगा हिंदुस्तान - आज के देशभक्ति आयोजनों में लोकप्रिय नारा

19. भगत सिंह अमर रहें - स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारियों की स्मृति में लोकप्रिय उद्घोष

20. भारत के शहीद अमर रहें - शहीदों के सम्मान में लगाया जाने वाला लोकप्रिय नारा

इनमें कुछ नारे ऐतिहासिक स्वतंत्रता आंदोलन से सीधे जुड़े हैं, जबकि कुछ उद्घोष बाद के वर्षों में देशभक्ति कार्यक्रमों और सार्वजनिक आयोजनों में लोकप्रिय हुए हैं।

15 अगस्त 1947 को भारत ने करीब दो सदियों के ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से स्वतंत्रता हासिल की। इसीलिए स्वतंत्रता दिवस केवल तिरंगा फहराने का अवसर नहीं, बल्कि उन संघर्षों और बलिदानों को याद करने का दिन भी है, जिनकी बदौलत देश आजाद हुआ। आज जब बच्चे और युवा इन नारों को पूरे जोश से दोहराते हैं, तो इनके पीछे छिपी कहानी भी याद रखना जरूरी है। क्योंकि आजादी के आंदोलन में ये शब्द सिर्फ नारे नहीं थे, बल्कि ये लोगों को जोड़ने, हिम्मत देने और बदलाव के लिए खड़े होने की आवाज थे।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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