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चीनी ही नहीं, गुड़ के दामों में भी उफान! एथेनॉल नहीं, बल्कि ये है कीमतों में लगी आग का कारण
चीनी के साथ अब गुड़ की कीमतों में भी तेज उछाल देखने को मिल रहा है और कई शहरों में भाव 40-60% तक बढ़ गए हैं।
Sugar-Jaggery Price Hike: देश में इन दिनों चीनी के बढ़ते दामों ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है। लेकिन अब सिर्फ चीनी ही नहीं, बल्कि गुड़ की कीमतों में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है।
कई शहरों में पिछले कुछ हफ्तों में गुड़ के दाम 40 से 60 फीसदी तक बढ़ गए हैं। जो गुड़ कुछ समय पहले 40 से 50 रुपये किलो बिक रहा था, उसकी कीमत कई बाजारों में 75 से 90 रुपये किलो तक पहुंच गई है।
गुड़ की कीमतों में अचानक क्यों आया उछाल?
कारोबारियों के मुताबिक, गुड़ की कीमत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह पुराने पेराई सीजन का स्टॉक तेजी से खत्म होना है। वहीं नए गन्ने की पेराई और गुड़ बनाने वाले कोल्हू अक्टूबर-नवंबर में पूरी क्षमता से शुरू होंगे। ऐसे में बाजार में फिलहाल सप्लाई सीमित है। इसके अलावा सर्दियों और त्योहारों के मौसम में गुड़ की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसी को देखते हुए कई थोक कारोबारी पहले से गुड़ की खरीदारी कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में भी बढ़े भाव
उत्तर प्रदेश के कई शहरों में गुड़ की कीमतों में तेज उछाल आया है। शाहजहांपुर में करीब 15 दिन में गुड़ का भाव 70 रुपये से बढ़कर 90 रुपये किलो तक पहुंच गया। मेरठ और मुरादाबाद में कीमत 60-65 रुपये से बढ़कर करीब 80 रुपये किलो हो गई है। कानपुर में भी गुड़ 60 रुपये से बढ़कर करीब 80 रुपये किलो बिक रहा है। लखीमपुर खीरी में 50-55 रुपये वाला गुड़ अब 75-80 रुपये किलो तक पहुंच गया है। गोरखपुर और वाराणसी में भी खुदरा कीमतें 60-70 रुपये किलो के आसपास पहुंच गई हैं।
क्या एथेनॉल है चीनी की महंगाई की वजह?
चीनी की कीमतों में तेजी के बीच एथेनॉल को भी इसकी वजह बताया जा रहा है। हालांकि, सरकार के आंकड़े बताते हैं कि एथेनॉल के लिए चीनी डायवर्ट करने का हिस्सा 2022-23 में करीब 12 फीसदी था, जो 2025-26 में घटकर करीब 9 फीसदी रह गया है। देश में एथेनॉल का लगभग तीन-चौथाई उत्पादन अब अनाज, खासकर मक्का, से हो रहा है।
इसलिए मौजूदा चीनी महंगाई का पूरा जिम्मेदार सिर्फ एथेनॉल को मानना सही नहीं होगा। असल समस्या में घरेलू स्टॉक, उत्पादन, वैश्विक कीमतें, निर्यात और बाजार में मांग-सप्लाई का संतुलन भी शामिल है।
चीनी के दाम क्यों बढ़े?
आंकड़ों के मुताबिक, 20 जुलाई को देश में चीनी का औसत खुदरा भाव करीब 48.18 रुपये किलो था, जो 20 अगस्त को बढ़कर 55.70 रुपये किलो हो गया। यानी करीब एक महीने में लगभग 16 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। सरकार के अनुसार, 2026-27 में वैश्विक स्तर पर करीब 33 लाख टन चीनी की कमी रह सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चीनी की कीमत 30 जून के 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त को 552 डॉलर प्रति टन हो गई।
सरकार ने कुछ कारोबारियों पर स्टॉक जमा करने और कृत्रिम कमी का माहौल बनाने का आरोप भी लगाया है। इसी को देखते हुए डीलरों के लिए 400 टन की स्टॉक सीमा तय की गई है।
गुड़ की बढ़ती मांग भी बनी वजह
गुड़ की कीमतों में तेजी की एक वजह इसका बढ़ता इस्तेमाल भी है। अब कई खाद्य उत्पादों में चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा पारंपरिक मिठाइयों और सर्दियों में गुड़ की मांग बढ़ जाती है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा गुड़ उत्पादक देश है और वैश्विक गुड़ उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी 70 फीसदी से ज्यादा बताई जाती है। देश के कुल गन्ना उत्पादन का करीब 20-30 फीसदी हिस्सा गुड़ और खांडसारी इकाइयों में इस्तेमाल होता है।
भारतीय गुड़ की विदेशों में भी मांग लगातार बढ़ी है। 2015-16 में गुड़ और उससे जुड़े पारंपरिक उत्पादों का निर्यात करीब 197 मिलियन डॉलर का था, जो 2024-25 में बढ़कर करीब 406.8 मिलियन डॉलर हो गया।


