लंदन वाली Fanta से भारत में 3 गुना ज्यादा चीनी! Maggi-KitKat तक पर क्यों मचा बवाल?

भारत में बिकने वाली Fanta में यूरोप की तुलना में ज्यादा चीनी और अलग फूड कलर इस्तेमाल होने को लेकर सवाल उठे हैं।

Sachin Singh
Published on: 25 Aug 2026 4:13 PM IST
लंदन वाली Fanta से भारत में 3 गुना ज्यादा चीनी! Maggi-KitKat तक पर क्यों मचा बवाल?
X

India Fanta Sugar Controversy: भारत में बिकने वाले पैकेज्ड फूड और ड्रिंक्स को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, लंदन में मिलने वाली Fanta की एक कैन में करीब 63 कैलोरी होती हैं, जबकि भारत में बिकने वाले इसी ब्रांड में चीनी की मात्रा करीब तीन गुना अधिक बताई गई है।

भारत में इसमें एक कृत्रिम रंग भी इस्तेमाल होता है, जिसकी मौजूदगी यूरोप में फूड प्रोडक्ट्स पर प्रमुख स्वास्थ्य चेतावनी के साथ बताई जाती है। वहीं भारत में इसकी जानकारी पैकेजिंग के पीछे छोटे अक्षरों में दी जाती है। यह अंतर ऐसे समय में सामने आया है जब भारत में पैकेज्ड फूड पर फ्रंट-ऑफ-पैक पोषण चेतावनी को लेकर बहस चल रही है।

Fanta ही नहीं, KitKat और Maggi पर भी सवाल

भारत और दूसरे देशों में एक ही ब्रांड के उत्पादों की सामग्री अलग होने का मामला सिर्फ Fanta तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट में KitKat और Maggi जैसे उत्पादों का भी जिक्र किया गया है।

उदाहरण के लिए, भारत में बिकने वाले सामान्य KitKat में कोको सॉलिड्स की मात्रा 4.5 प्रतिशत बताई गई है, जबकि ऑस्ट्रेलिया में मिलने वाले संस्करण में मिल्क चॉकलेट में कम से कम 22 प्रतिशत कोको सॉलिड्स होने की बात कही गई है।

इसी तरह भारत में बिकने वाले Maggi के सभी वेरिएंट में पाम ऑयल का इस्तेमाल होता है, जबकि ब्रिटेन में बिकने वाले कई वेरिएंट में महंगे सनफ्लावर ऑयल का इस्तेमाल किया जाता है। ब्रिटेन में कई भारतीय निर्मित Maggi पैकेटों पर ज्यादा नमक की चेतावनी भी सामने की तरफ दी जाती है।

कंपनियों का कहना है कि अलग-अलग देशों में उत्पादों की रेसिपी स्थानीय नियमों, स्वाद और कीमत के हिसाब से बदली जाती है।

पैकेट के सामने चेतावनी लगाने की मांग

भारत में लंबे समय से स्वास्थ्य विशेषज्ञ और उपभोक्ता संगठनों की मांग रही है कि ज्यादा चीनी, नमक और वसा वाले खाद्य पदार्थों पर पैकेट के सामने ही साफ चेतावनी दी जाए। उनका तर्क है कि ज्यादातर ग्राहक खरीदारी के दौरान पैकेट के पीछे लिखी लंबी सामग्री नहीं पढ़ते।

दुनिया के करीब 20 देशों में ऐसे लेबल इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इनमें ज्यादा चीनी या नमक वाले उत्पादों को लाल रंग से दिखाया जा सकता है, जबकि कम वसा जैसे पोषण संबंधी संकेतों को अलग रंग में बताया जाता है।

हालांकि भारत में खाद्य नियामक FSSAI ने अगस्त में फ्रंट-ऑफ-पैक रंगीन चेतावनी वाले प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाया। इसके बजाय चीनी, नमक और वसा की जानकारी ब्लैक एंड व्हाइट टेबल के रूप में देने का प्रस्ताव रखा गया है।

कंपनियों और नियामक के बीच हुई थी बहस

रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च में FSSAI और खाद्य कंपनियों के प्रतिनिधियों के बीच इस मुद्दे पर बैठक हुई थी। कंपनियों ने तर्क दिया कि रंगीन चेतावनी लेबल उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं और केवल किसी चिन्ह को देखकर लोगों की खान-पान की आदतें नहीं बदलेंगी। कंपनियों की ओर से यह भी कहा गया कि लोगों को खाने की मात्रा यानी पोर्शन कंट्रोल पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

विदेशों में कंपनियां अपनाती हैं अलग नियम

दिलचस्प बात यह है कि कुछ बहुराष्ट्रीय कंपनियां यूरोप के कई बाजारों में पहले से ही फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग का इस्तेमाल करती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, Coca-Cola की सहयोगी कंपनी यूरोप के करीब दो दर्जन बाजारों में ट्रैफिक-लाइट जैसे लेबल का इस्तेमाल करती है। Nestle भी ब्रिटेन में कई सालों से ऐसे पोषण संकेतों का इस्तेमाल कर रही है।

Sachin Singh
ABOUT THE AUTHOR

Sachin Singh

Conetent Writer Mail ID - sachinsingh.alert@gmail.comsachinsingh.alert@gmail.com
Next Story