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नहीं रहे कारगिल योद्धा कर्नल सोनम वांगचुक, रक्षा मंत्री और सेना ने दी श्रद्धांजलि
Colonel Sonam Wangchuk passes away: कारगिल युद्ध के हीरो और महावीर चक्र से सम्मानित कर्नल सोनम वांगचुक का शुक्रवार को निधन हो गया।
Colonel Sonam Wangchuk passes away: कारगिल युद्ध के हीरो और महावीर चक्र से सम्मानित कर्नल सोनम वांगचुक का शुक्रवार को निधन हो गया। ऑपरेशन विजय में उनके साहस और नेतृत्व ने दुश्मन पर निर्णायक बढ़त दिलाई थी।
कारगिल युद्ध के नायक कर्नल सोनम वांगचुक के निधन की खबर से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके निधन पर रक्षा मंत्री और भारतीय सेना ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है। कर्नल सोनम वांगचुक ने 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान अदम्य साहस और नेतृत्व का परिचय दिया था। उनकी रणनीतिक सूझबूझ और बहादुरी के कारण कई महत्वपूर्ण चोटियों पर भारतीय सेना को सफलता मिली थी।
रक्षा मंत्री ने जताया शोक
रक्षा मंत्री ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि कर्नल वांगचुक जैसे वीर सैनिकों की वजह से ही देश सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि उनका बलिदान और सेवा हमेशा प्रेरणा देती रहेगी।
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने दी श्रद्धांजलि
लेह स्थित फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स ने भी उनके निधन पर शोक जताते हुए कहा कि कर्नल वांगचुक का साहस, नेतृत्व और देशभक्ति हमेशा याद रखी जाएगी। उनका योगदान कठिनतम परिस्थितियों में देश की जीत में बेहद महत्वपूर्ण रहा। भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और सभी सैन्य अधिकारियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
महावीर चक्र से सम्मानित किए गए
करगिल युद्ध में अपने शौर्य के लिए उनको महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। करगिल युद्ध के दौरान, 30 मई 1999 को उन्होंने खून जमा देने वाली ठंड में 40 सैनिकों के साथ बेहद ऊंचाई पर ऑपरेशन में 136 पाकिस्तानी घुसपैठियों को मौत के घाट उतार दिया था, वह भी आर्टिलरी सपोर्ट के बिना। 3 दिन चले इस ऑपरेशन के दौरान वहां बहुत ज्यादा बर्फ पड़ी हुई थी। उनको 'लॉयन ऑफ लद्दाख' के नाम से भी जाना जाता था।
ऑपरेशन विजय में दिखाया साहस
कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन विजय में सोनम वांगचुक ने शानदार बहादुरी दिखाई थी। उस समय वे लद्दाख स्काउट्स की एक टीम का नेतृत्व कर रहे थे। उनका मिशन दुश्मन से पहले ऊंची पहाड़ी जगह पर कब्जा करना था। करीब 5,500 मीटर की ऊंचाई पर बर्फीले इलाके में यह ऑपरेशन बेहद मुश्किल था। रास्ते में दुश्मन ने अचानक हमला कर दिया, जिसमें एक जवान शहीद हो गया। हालात बहुत चुनौतीपूर्ण थे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
देश ने खोया एक वीर सपूत
सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि कर्नल वांगचुक का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। उनके नेतृत्व में किए गए अभियानों ने युद्ध के दौरान भारत की स्थिति को मजबूत किया था।


