वापस नहीं आऊंगा दोस्त..." सूरत स्टेशन पर फूट-फूट कर रोया मजदूर; पलायन का ये वीडियो आपकी आंखें नम कर देगा!

Surat LPG Crisis: गुजरात के सूरत स्थित उधना रेलवे स्टेशन पर 19 अप्रैल की सुबह 11:30 बजे के आसपास एक ऐसी भगदड़ मच गई कि पुलिस और आरपीएफ को लाठियां बरसानी पड़ीं।

Gautam Kumar
Published on: 19 April 2026 4:02 PM IST (Updated on: 19 April 2026 7:39 PM IST)
Surat LPG Crisis
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Surat LPG Crisis: मिडिल-ईस्ट जंग और एलपीजी संकट का असर भारत के अलग-अलग इलाकों में देखने को मिल रहा है। कंपनियों की बिल्डिंग पर ताले लगने शुरू हो गए हैं और दूर-दराज के मजदूरों को पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। सूरत में उधना रेलवे स्टेशन पर रविवार को यात्रियों का रेला उमड़ पड़ा। यूपी-बिहार जाने वाली ट्रेनों में सीट हासिल करने के लिए हजारों लोग स्टेशन पहुंचे। इस दौरान लाठीचार्ज के बाद भगदड़ जैसे हालात देखने को मिले।

सुरक्षा बलों ने भीड़ को काबू करने के लिए लाठीचार्ज किया

गुजरात के सूरत स्थित उधना रेलवे स्टेशन पर 19 अप्रैल की सुबह 11:30 बजे के आसपास एक ऐसी भगदड़ मच गई कि पुलिस और आरपीएफ को लाठियां बरसानी पड़ीं। यूपी-बिहार जाने वाली ट्रेनों में सीट पाने के लिए हजारों प्रवासी मजदूर स्टेशन पर उमड़ पड़े। लाइन तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश में स्थिति बिगड़ी, तो सुरक्षा बलों ने भीड़ को काबू में करने के लिए लाठीचार्ज कर दिया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में यात्री लोहे की जालियों पर चढ़कर कूदते नजर आए। इस दौरान गर्मी, प्यास और हताशा ने माहौल और तनावपूर्ण बना दिया।

भारत में फैले एलपीजी संकट का सीधा नतीजा

ये महज एक ट्रेन की भीड़ नहीं थी। ये मिडिल ईस्ट जंग और उसके चलते भारत में फैले एलपीजी संकट का सीधा नतीजा था, जिसने सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को हिला दिया है। लाखों मजदूर बिना खाना पकाने के ईंधन के मजबूर होकर घर लौट रहे हैं। समर वेकेशन की छुट्टियों ने भीड़ को और बढ़ा दिया। मामला सिर्फ एक स्टेशन की अफरा-तफरी नहीं, बल्कि वैश्विक संघर्ष का स्थानीय असर है। जहां दूर-दराज के गांवों से आए मजदूर अब शहर छोड़ने को विवश हैं।

एलपीजी की सप्लाई चेन बाधित

भारत अपनी लगभग 60% एलपीजी जरूरतें आयात से पूरा करता है, और इनमें से 90% से ज्यादा सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरकर आती है। 2026 में ईरान से जुड़े पश्चिम एशिया संघर्ष ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को प्रभावित किया। जहाजों की आवाजाही रुकी या धीमी पड़ गई, जिससे एलपीजी की सप्लाई चेन बाधित हो गई। मार्च-अप्रैल 2026 में भारत के आयात में भारी कमी आई। कुछ अनुमानों के मुताबिक 40-50% तक। घरेलू रिफाइनरियों ने उत्पादन बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन मांग को पूरा नहीं कर पाईं।

एलपीजी की बढ़ती कीमतों ने मजदूर वर्ग की कमर तोड़

दरअसल, एलपीजी सिलेंडर की कमी और बढ़ती कीमतों ने मजदूर वर्ग की कमर तोड़ दी है। रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो गया है। छोटे-छोटे कारखानों और इकाइयों में काम करने वाले मजदूरों के सामने अब रोजगार का संकट भी खड़ा हो गया है। कई फैक्ट्रियों ने उत्पादन घटा दिया है या अस्थायी रूप से बंद कर दिया है, जिससे मजदूरों की आय पर सीधा असर पड़ा है।

गांव लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं

प्रवासी मजदूरों का कहना है कि शहर में रहकर खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। खाना पकाने के लिए गैस नहीं मिल रही या फिर बहुत महंगी हो गई है। ऐसे में उनके पास अपने गांव लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। एक मजदूर ने बताया कि “यहां काम भी कम हो गया है और खर्चा बढ़ गया है, इसलिए हम अपने घर वापस जा रहे हैं।”

जानें विशेषज्ञों का क्या मानना है

विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति केवल एक शहर तक सीमित नहीं रह सकती। यदि एलपीजी संकट लंबे समय तक जारी रहता है, तो देश के अन्य औद्योगिक शहरों में भी इसी तरह की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इससे न केवल शहरी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों पर भी दबाव बढ़ेगा, जहां लौटने वाले मजदूरों के लिए रोजगार के अवसर सीमित हैं।

इस संकट को लेकर कोई ठोस समाधान नहीं

सरकार की ओर से अभी तक इस संकट को लेकर कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है, हालांकि अधिकारियों का कहना है कि आपूर्ति को सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

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Gautam Kumar is an Former Content Writer at Newstrack.com.

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