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'One Day, One University' योजना क्या है, जिसके जरिए Gen-Z को लुभाने में लगी BJP?
केंद्र सरकार छात्रों से सीधे संवाद बढ़ाने के लिए ‘One Day, One University’ कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी कर रही है।
One Day One University: छात्रों से सीधे जुड़ने और उनकी समस्याओं को समझने के लिए केंद्र सरकार एक बड़े देशव्यापी कार्यक्रम की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित योजना का नाम 'One Day, One University' रखा गया है। इसके तहत हर दिन एक केंद्रीय मंत्री किसी विश्वविद्यालय का दौरा कर वहां के छात्रों से बातचीत कर सकता है।
इस कार्यक्रम का मकसद सिर्फ सरकारी योजनाओं की जानकारी देना नहीं, बल्कि युवाओं की बात सीधे सुनना भी है। सरकार छात्रों से देश से जुड़े मुद्दों, शिक्षा, रोजगार और दूसरी चुनौतियों पर चर्चा करने की योजना बना रही है।
क्या है 'One Day, One University' योजना?
'One Day, One University' योजना का सबसे बड़ा पहलू यह है कि इसमें सरकार के प्रतिनिधि सीधे छात्रों के कैंपस तक पहुंचेंगे। इससे छात्रों को अपनी बात किसी औपचारिक माध्यम के बजाय सीधे केंद्रीय मंत्रियों के सामने रखने का मौका मिल सकता है।
प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत केंद्रीय मंत्रियों को अलग-अलग विश्वविद्यालयों में भेजा जाएगा। वहां वे छात्रों के साथ आमने-सामने बातचीत करेंगे और उनकी समस्याओं को जानने की कोशिश करेंगे।
मंत्रियों के कार्यक्रम में छात्रों के साथ चर्चा, उनके विचार सुनना और युवाओं से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी देना शामिल हो सकता है। इस पहल के जरिए सरकार और छात्रों के बीच सीधे संवाद को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी और युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया को इस कार्यक्रम के लिए विश्वविद्यालयों और दूसरे केंद्रीय मंत्रियों के साथ समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है।
कैबिनेट बैठक में भी हुई चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में भी इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई। हालांकि, कार्यक्रम के अंतिम स्वरूप और इसके लागू होने की विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
देश में विश्वविद्यालयों की संख्या को देखते हुए यह अभियान काफी व्यापक हो सकता है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC के आंकड़ों के मुताबिक, देश में करीब 1,300 विश्वविद्यालय हैं। इनमें 57 केंद्रीय और 522 राज्य विश्वविद्यालय शामिल हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में निजी और डीम्ड विश्वविद्यालय भी हैं।
NEET विवाद के बीच छात्रों तक पहुंचने की कोशिश
सरकार की यह पहल ऐसे समय में सामने आ रही है, जब NEET पेपर लीक विवाद को लेकर छात्रों के प्रदर्शन ने देशभर में राजनीतिक रूप ले लिया है। दिल्ली समेत कई जगहों पर छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया।
20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा। मामला संसद तक पहुंचा और मानसून सत्र के दौरान विपक्ष ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया।
25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया के जरिए छात्रों से सीधे संवाद करते हुए कई अपील की थीं।


