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Partition Horrors Remembra1947 का दर्दनाक बंटवारा, जब अपनों से बिछड़े लाखों लोग; PM मोदी ने किया याद
Partition Horrors Remembrance Day 2026: विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस 2026 पर PM मोदी ने 1947 के विभाजन में जान गंवाने और विस्थापित हुए लोगों को याद किया। जानें 14 अगस्त को क्यों मनाया जाता है यह दिवस।
Partition Horrors Remembrance Day 2026: PM Modi Remembers the Pain of 1947 Partition
Partition Horrors Remembrance Day 2026:विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस 2026: केसरिया - सफेद और हरे रंग की रोशनी से सजी सरकारी इमारतों से लेकर रौनकों से गुलजार होते हर गली, बाजार, स्कूल और चौराहों पर, बच्चों से लेकर युवा बुजुर्ग सभी के चेहरों पर स्वतंत्रता दिवस के दिन एक अलग ही उल्लास तैरता नजर आता है। आजादी की धुन में डूबे इस खास दिन यानी 15 अगस्त को पूरा देश एक जुट होकर आजादी का जश्न मनाता है, लेकिन उससे ठीक एक दिन पहले 14 अगस्त इतिहास के उस दर्दनाक अध्याय की याद भी ताज़ा कर जाता है, जब आजादी की सौगात के साथ देश के बंटवारे का दर्द भी सहना पड़ा था। लाखों लोगों के लिए 1947 का वह दौर सिर्फ सरहद बदलने की कहानी नहीं था, बल्कि घर, परिवार, रिश्ते और अपनी मिट्टी छोड़ने की मजबूरी भी था। किसी ने अपनों को खोया तो किसी ने अपनी पूरी जिंदगी फिर से शुरू की। इसी पीड़ा और उन लोगों के साहस को याद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' पर भावुक संदेश साझा किया।
'परिवार उजड़ गए, लोगों ने अपनों को खो दिया'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर कहा कि यह इतिहास का वह दौर था जिसने कई जिंदगियां तहस-नहस कर दीं। परिवार उजड़ गए, लोगों ने अपनों को खो दिया और भारी पीड़ा झेली। उन्होंने विभाजन से प्रभावित लोगों के साहस को याद करते हुए कहा कि मुश्किल परिस्थितियों से निकलकर इन लोगों ने शून्य से अपनी जिंदगी दोबारा खड़ी की और देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
पीएम मोदी ने कहा कि इन लोगों की जीवन-यात्राएं इंसानी जज्बे और मुश्किल हालात से लड़कर आगे बढ़ने की ताकत की याद दिलाती हैं। उन्होंने प्रार्थना की कि यह दिवस देश में आपसी सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने के संकल्प को और गहरा करे। साथ ही सभी लोग मिलकर 'विकसित भारत' के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ें।
दूसरी पोस्ट में भी दिया एकता और पुरुषार्थ का संदेश
प्रधानमंत्री ने एक अन्य पोस्ट में विभाजन के दौर से निकलकर देश के निर्माण में योगदान देने वाले लोगों को नमन किया। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने अपने साहस और सामर्थ्य से दिखाया कि विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्पों को पूरा किया जा सकता है। पीएम ने देश में सद्भावना और एकजुटता की भावना को और मजबूत करने की अपील की।
इसी पोस्ट में उन्होंने एक संस्कृत सुभाषित भी साझा किया- 'उद्यमस्य प्रसादेन दृश्यन्ते विविधाः कलाः। कातरा एव जल्पन्ति यद् भाव्यं तद् भविष्यति।' इसका भाव यह है कि सफलता के लिए व्यक्ति को केवल भाग्य के भरोसे नहीं बैठना चाहिए। मेहनत, साहस, कर्मठता और लगातार प्रयास से ही आगे बढ़ने का रास्ता तैयार होता है।
14 अगस्त को ही क्यों याद किया जाता है विभाजन का दर्द?
भारत हर साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाता है। लेकिन आजादी की इस खुशी से ठीक एक दिन पहले यानी 14 अगस्त को विभाजन की त्रासदी को याद किया जाता है। वर्ष 1947 में ब्रिटिश शासन से आजादी मिलने के साथ ही भारतीय उपमहाद्वीप का विभाजन हुआ और भारत तथा पाकिस्तान दो अलग-अलग राष्ट्र बने।
आजादी और विभाजन की तारीखों का क्रम भी इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान में सत्ता हस्तांतरण की रस्में 14 अगस्त 1947 को कराची में हुईं, जबकि भारत में सत्ता हस्तांतरण और स्वतंत्रता समारोह दिल्ली में 15 अगस्त को हुआ। इस राजनीतिक बदलाव के साथ ही सीमाओं के दोनों ओर बड़े पैमाने पर आबादी का विस्थापन शुरू हुआ।
सिर्फ नक्शा नहीं बदला, लाखों लोगों की जिंदगी बदल गई
1947 का विभाजन केवल भारत के नक्शे पर एक नई सीमा खींचे जाने की घटना नहीं थी। इसका सबसे गहरा असर आम लोगों पर पड़ा। पंजाब और बंगाल समेत कई इलाकों में हिंसा भड़की। बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर और जमीन-जायदाद छोड़कर दूसरी तरफ जाना पड़ा।
जो लोग पीढ़ियों से किसी शहर, कस्बे या गांव में रह रहे थे, उन्हें अचानक अपना घर छोड़ना पड़ा। कई परिवार रास्ते में बिछड़ गए। बहुत से लोगों को यह भी नहीं पता था कि वे जिनसे अलग हुए हैं, उनसे दोबारा कभी मुलाकात होगी या नहीं। इसी वजह से विभाजन की याद सिर्फ इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं है। कई परिवारों की पीढ़ियों तक चली आ रही स्मृतियों में आज भी उस दौर की दर्दनाक कहानियां मौजूद हैं।
कब शुरू हुआ 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस'?
14 अगस्त को 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के तौर पर मनाने का फैसला केंद्र सरकार ने 2021 में लिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अगस्त 2021 को इसकी घोषणा करते हुए कहा था कि विभाजन की पीड़ा को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा था कि नफरत और हिंसा के कारण लाखों लोगों को विस्थापित होना पड़ा और कई लोगों ने अपनी जान गंवाई। इसके बाद हर साल 14 अगस्त को विभाजन के दौरान जान गंवाने वालों और विस्थापित हुए लोगों को याद किया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य सिर्फ उस त्रासदी को याद करना नहीं, बल्कि सामाजिक विभाजन, वैमनस्य और नफरत से दूर रहने तथा एकता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने का संदेश देना भी है।


