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सावरकर टिप्पणी केस में राहुल गांधी को SC से सुप्रीम राहत, UP में चल रही पूरी कार्रवाई रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने सावरकर पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े मामले में राहुल गांधी के खिलाफ उत्तर प्रदेश में चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।
Rahul Gandhi Savarkar case: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में LOP राहुल गांधी को सावरकर पर की गई टिप्पणी से जुड़े एक आपराधिक मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में उनके खिलाफ चल रही निजी आपराधिक शिकायत और निचली अदालत की ओर से जारी समन को रद्द कर दिया है।
यह मामला राहुल गांधी पर वीडी सावरकर को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने और समाज में उनकी छवि को खराब करने के आरोपों से जुड़ा था। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को रद्द करने की मुख्य वजह यह बताई कि राहुल गांधी पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153-A के तहत मुकदमा चलाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार से जरूरी मंजूरी नहीं ली गई थी।
Supreme Court quashes the summons issued by the Lucknow Magistrate Court in a criminal defamation complaint against Congress MP Rahul Gandhi for his controversial remarks against Vinayak Damodar Savarkar during 'Bharat Jodo Yatra' in 2022.
— ANI (@ANI) August 14, 2026
Supreme Court quashes the summons and…
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान जस्टिस दत्ता ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से पूछा कि क्या राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए राज्य सरकार ने मंजूरी दी है?
इस पर राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि ऐसी कोई मंजूरी नहीं दी गई है। इसके बाद कोर्ट ने कहा कि धारा 153-A के तहत अपराध का संज्ञान लेने से पहले सरकार की मंजूरी जरूरी है। जस्टिस दत्ता ने साफ कहा कि अगर जरूरी मंजूरी नहीं है तो मामला आगे नहीं चल सकता। इसी आधार पर अदालत ने शिकायत और मजिस्ट्रेट की ओर से पारित आदेशों को रद्द कर दिया।
आखिर क्या है पूरा मामला?
यह मामला राहुल गांधी की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए कथित बयान से जुड़ा है। शिकायतकर्ता अधिवक्ता नृपेंद्र पांडे ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने सावरकर को लेकर ऐसे बयान दिए, जिनसे समाज में नफरत फैलाने के साथ ही उनकी छवि को भी खराब सकता है।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी ने सावरकर को अंग्रेजों का सेवक बताया और उन पर अंग्रेजों से पेंशन लेने का आरोप लगाया था। इसी मामले में लखनऊ की निचली अदालत ने दिसंबर 2024 में राहुल गांधी को आरोपी के तौर पर समन जारी किया था। उन पर IPC की धारा 153-A और 505 के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी।
हाईकोर्ट से नहीं मिली थी राहत
निचली अदालत के समन के खिलाफ राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने 4 अप्रैल 2025 को उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले राहुल गांधी को दी थी चेतावनी
इस मामले में एक अहम बात यह भी है कि पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी की सावरकर पर टिप्पणी को लेकर नाराजगी जाहिर की थी।
हालांकि, शुक्रवार को अदालत ने टिप्पणी की सही-गलत पर फैसला देने के बजाय मामले की कानूनी खामी पर ध्यान दिया और कहा कि जरूरी सरकारी मंजूरी के बिना धारा 153-A के तहत मुकदमा आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।


