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जज बनने के नियम में बड़ा बदलाव, अब 3 साल की जगह 1 साल की प्रैक्टिस जरूरी, 2027 तक के लॉ ग्रेजुएट को बड़ी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) भर्ती के लिए 3 साल की वकालत की अनिवार्यता घटाकर 1 साल कर दी है।
Supreme Court, judicial service: सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की भर्ती के लिए वकील के तौर पर जरूरी प्रैक्टिस के नियम में बड़ा बदलाव किया है। कोर्ट ने पहले लागू किए गए 3 साल की प्रैक्टिस के नियम को घटाकर 1 साल कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि जज बनने वाले नए उम्मीदवारों को न्यायिक कामकाज का व्यावहारिक अनुभव देने के लिए ट्रेनिंग और लॉ क्लर्कशिप पूरी करनी होगी।
यह फैसला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस ऑगस्ट जॉर्ज मसीह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने सुनाया। जस्टिस के. विनोद चंद्रन ने इस फैसले पर असहमति जताई।
2027 तक नए कानून स्नातकों को बड़ी राहत
सुप्रीम कोर्ट के नए नियम के मुताबिक 31 मार्च 2027 तक कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले उम्मीदवारों को आवेदन के लिए पहले से वकालत की प्रैक्टिस करना जरूरी नहीं होगा। इस संक्रमण अवधि में उन्हें पात्रता के लिए एक साल की प्रैक्टिस पूरी मान लिया जाएगा। लेकिन परीक्षा पास करने के बाद सीधे जज की जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। चयनित उम्मीदवारों को पहले Trainee Judicial Officer के तौर पर काम करना होगा।
एक साल की ट्रेनिंग और एक साल की क्लर्कशिप
चयनित उम्मीदवारों को पहले एक साल की गहन ट्रेनिंग दी जाएगी। यह ट्रेनिंग संबंधित राज्य की Judicial Academy में होगी। इसके बाद उन्हें कुल एक साल की लॉ क्लर्कशिप करनी होगी। इसमें छह महीने जिला जज या हायर ज्यूडिशियल सर्विस के अधिकारी के साथ और अगले छह महीने हाई कोर्ट के किसी मौजूदा जज के साथ काम करना होगा। इस दौरान उम्मीदवारों को वेतन और अन्य तय भुगतान भी मिलेगा।
हाई कोर्ट जज की रिपोर्ट होगी जरूरी
क्लर्कशिप पूरी होने के बाद जिस हाई कोर्ट जज के साथ Trainee Judicial Officer ने काम किया होगा, वह उसके काम की रिपोर्ट तैयार करेगा। अगर रिपोर्ट संतोषजनक रही, तभी उम्मीदवार को नियमित रूप से सिविल जज के पद पर नियुक्त किया जाएगा। यानी अब सिर्फ परीक्षा पास करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उम्मीदवार की ट्रेनिंग और व्यावहारिक काम को भी महत्व दिया जाएगा।
1 अप्रैल 2027 से क्या बदलेगा?
1 अप्रैल 2027 या उसके बाद सिविल जज की परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले कानून स्नातकों के लिए कम से कम एक साल की सक्रिय वकालत की प्रैक्टिस जरूरी होगी। इसके साथ उन्हें चयन के बाद वही ट्रेनिंग और लॉ क्लर्कशिप भी करनी होगी।
पहले क्या था नियम?
मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज की शुरुआती भर्ती के लिए तीन साल की कानूनी प्रैक्टिस जरूरी कर दी थी। कोर्ट का कहना था कि जज की जिम्मेदारी संभालने से पहले उम्मीदवार को अदालत और कानून की वास्तविक प्रक्रिया का अनुभव होना चाहिए।
उस फैसले में यह भी कहा गया था कि सफल उम्मीदवारों को अदालत में जज के रूप में काम शुरू करने से पहले कम से कम एक साल की ट्रेनिंग दी जाए। अब सुप्रीम कोर्ट ने तीन साल की अनिवार्यता को घटाकर एक साल कर दिया है, लेकिन व्यावहारिक अनुभव की जरूरत को बरकरार रखा है।
हाई कोर्ट को तीन महीने में नियम बदलने होंगे
सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट को अपने संबंधित न्यायिक सेवा नियमों में जरूरी बदलाव करने के लिए तीन महीने का समय दिया है। नई व्यवस्था फिलहाल पांच साल तक लागू रहेगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट इस योजना की समीक्षा करेगा और देखेगा कि इसका क्या असर रहा।


