तरुण तेजपाल कौन है, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने 2 हफ्ते में सरेंडर करने का सुनाया फरमान? 2013 में तहलका से जुड़ा मामला

सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराए गए तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को दो हफ्ते के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है।

Sachin Singh
Published on: 25 Aug 2026 2:36 PM IST (Updated on: 25 Aug 2026 2:37 PM IST)
तरुण तेजपाल कौन है, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने 2 हफ्ते में सरेंडर करने का सुनाया फरमान? 2013 में तहलका से जुड़ा मामला
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Tarun Tejpal: सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराए गए और तहलका पत्रिका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को दो हफ्ते के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि तेजपाल को सरेंडर करने के बाद उसका प्रमाणपत्र अदालत में जमा करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल उन्हें सरेंडर से छूट देने की मांग को खारिज कर दिया है।

जस्टिस अलोक अराधे की पीठ ने कहा कि अगर तेजपाल 22 सितंबर तक सरेंडर प्रमाणपत्र जमा कर देते हैं, तो उनकी उस याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है, जिसमें उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है।

तरुण तेजपाल कौन हैं?

तरुण तेजपाल भारतीय पत्रकार हैं। वह खोजी पत्रकारिता की पत्रिका तहलका (Tehelka) के संस्थापक और पूर्व एडिटर-इन-चीफ रहे हैं। अगस्त 2026 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें 2013 के रेप मामले में दोषी ठहराया।

तरुण तेजपाल मामला क्या है?

यह मामला नवंबर 2013 का है। आरोप है कि गोवा में तहलका के थिंकफेस्ट कार्यक्रम के दौरान तरुण तेजपाल ने अपनी एक जूनियर महिला सहकर्मी के साथ यौन उत्पीड़न और रेप किया। तेजपाल ने पूरे कानूनी मामले के दौरान इन आरोपों से इनकार किया।

2013 में सामने आया था मामला

तरुण तेजपाल से जुड़ा यह मामला नवंबर 2013 का है। उस समय गोवा में तहलका के 'थिंकफेस्ट' कार्यक्रम का आयोजन हुआ था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इसी दौरान एक होटल की लिफ्ट में तेजपाल ने अपनी जूनियर महिला सहकर्मी के साथ यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म किया।

महिला ने बाद में इस घटना की शिकायत तहलका प्रबंधन के सामने की थी। इसके बाद गोवा पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। तेजपाल ने शुरुआत से ही अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया।

2021 में निचली अदालत ने किया था बरी

इस मामले में गोवा की एक सत्र अदालत ने मई 2021 में तरुण तेजपाल को बरी कर दिया था। अदालत ने माना था कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर पाया। इसके बाद गोवा सरकार ने इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने मामले की दोबारा सुनवाई करते हुए निचली अदालत के फैसले को पलट दिया।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुनाई 10 साल की सजा

6 अगस्त 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने तरुण तेजपाल को दोषी ठहराया। हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध सबूतों को समझने और उनका आकलन करने में गलती की थी।

इसके बाद कोर्ट ने उन्हें 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई और पीड़िता को 10.21 लाख रुपये देने का आदेश दिया। हालांकि, हाईकोर्ट ने तेजपाल को तुरंत जेल भेजने के बजाय चार सप्ताह का समय दिया था, ताकि वह सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकें।

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