UP में 41 फर्जी आयुर्वेद डॉक्टरों का खुलासा, नकली BAMS डिग्री से करा रखा था रजिस्ट्रेशन, चेक करें अप

उत्तर प्रदेश में 41 कथित फर्जी आयुर्वेद डॉक्टरों का मामला सामने आया है, जिन्होंने फर्जी BAMS डिग्री, मार्कशीट और अन्य दस्तावेजों के जरिए रजिस्ट्रेशन कराया था।

Sachin Singh
Published on: 25 Aug 2026 6:27 PM IST
UP में 41 फर्जी आयुर्वेद डॉक्टरों का खुलासा, नकली BAMS डिग्री से करा रखा था रजिस्ट्रेशन, चेक करें अप
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Uttar Pradesh, Fake Ayurveda Doctors: उत्तर प्रदेश में आयुर्वेद चिकित्सा व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। राज्य के आयुर्वेदिक एवं यूनानी तिब्बी चिकित्सा बोर्ड ने 41 ऐसे डॉक्टरों की पहचान की है, जिन पर कथित तौर पर फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्रेशन कराने और आयुर्वेदिक चिकित्सा करने का आरोप है।

जांच में सामने आया है कि इन डॉक्टरों ने BAMS की कथित फर्जी मार्कशीट, डिग्री, इंटर्नशिप सर्टिफिकेट और NOC के जरिए बोर्ड में अपना रजिस्ट्रेशन कराया था। मामले को गंभीरता से लेते हुए बोर्ड ने लखनऊ पुलिस को शिकायत भेजकर सभी 41 डॉक्टरों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है।

फर्जी BAMS दस्तावेजों से कराया रजिस्ट्रेशन

जांच के मुताबिक, इन 41 डॉक्टरों के पास कथित तौर पर ऐसी BAMS मार्कशीट और डिग्री थीं, जो हरियाणा के कुछ संस्थानों के नाम पर जारी दिखाई गई थीं। इनमें कुरुक्षेत्र स्थित श्री कृष्ण गवर्नमेंट आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज और रोहतक स्थित पंडित भगवत दयाल यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के नाम शामिल हैं।

जांच में कथित तौर पर हरियाणा के इंडियन मेडिकल काउंसिल के नाम से जारी कुछ फर्जी NOC भी सामने आए हैं। आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल करके डॉक्टरों ने उत्तर प्रदेश में आयुर्वेदिक चिकित्सा का रजिस्ट्रेशन हासिल किया और इसके बाद प्रैक्टिस शुरू कर दी।

पहले दस्तावेजों का हुआ था सत्यापन

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर दस्तावेज फर्जी थे तो इन डॉक्टरों को रजिस्ट्रेशन कैसे मिल गया? दरअसल, आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा की प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों के लिए राज्य के आयुष विभाग के तहत आयुर्वेदिक एवं यूनानी तिब्बी चिकित्सा बोर्ड में रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होता है।

रजिस्ट्रेशन के दौरान डॉक्टरों को अपनी मार्कशीट, डिग्री, इंटर्नशिप सर्टिफिकेट और दूसरे जरूरी दस्तावेज जमा करने होते हैं। बोर्ड इन दस्तावेजों को संबंधित विश्वविद्यालय या संस्थान से सत्यापित भी कराता है। बताया गया है कि 41 डॉक्टरों के दस्तावेज भी संबंधित विश्वविद्यालय को भेजे गए थे। शुरुआती सत्यापन में डिग्रियों को सही बताया गया, जिसके बाद इन डॉक्टरों का बोर्ड में रजिस्ट्रेशन कर दिया गया।

दोबारा जांच में सामने आया फर्जीवाड़ा

मामला तब सामने आया जब इन डॉक्टरों को लेकर बोर्ड को शिकायत मिली। इसके बाद दस्तावेजों का दोबारा सत्यापन कराने का फैसला किया गया। बोर्ड ने रोहतक स्थित संबंधित विश्वविद्यालय से डिग्रियों की वास्तविकता की फिर से जांच कराई। इस बार विश्वविद्यालय की ओर से कथित तौर पर बताया गया कि इन डॉक्टरों की डिग्रियां फर्जी हैं।

पहले सत्यापन में दस्तावेज सही बताए जाने और बाद की जांच में उन्हें फर्जी पाए जाने से बोर्ड की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। अब पुलिस इस पूरे मामले की जांच करेगी कि फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए और इनके आधार पर रजिस्ट्रेशन कैसे हासिल किया गया।

15 साल के सभी रजिस्ट्रेशन की होगी जांच

41 डॉक्टरों के मामले के बाद बोर्ड ने बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने पिछले 15 वर्षों के दौरान रजिस्ट्रेशन कराने वाले डॉक्टरों की शैक्षणिक योग्यता और डिग्रियों की जांच करने का आदेश दिया है। इस जांच का मकसद यह पता लगाना है कि कहीं और डॉक्टरों ने भी फर्जी दस्तावेजों के जरिए रजिस्ट्रेशन तो नहीं कराया है।

अगर जांच के दौरान और फर्जी डिग्रियां या दस्तावेज सामने आते हैं तो मामला और बड़ा हो सकता है। इससे न सिर्फ फर्जी डॉक्टरों पर कार्रवाई होगी, बल्कि रजिस्ट्रेशन और दस्तावेज सत्यापन की पुरानी प्रक्रिया पर भी सवाल उठ सकते हैं।

मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने क्या कहा?

उत्तर प्रदेश के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने इस मामले को लेकर पिछली सरकार पर भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पूर्व अखिलेश यादव सरकार के दौरान बड़े स्तर पर फर्जी डिग्रियां बांटी गई थीं। राजभर ने कहा कि मौजूदा सरकार अब ऐसी फर्जी डिग्रियों की जांच करा रही है और जहां भी गड़बड़ी मिल रही है, वहां कार्रवाई की जा रही है।

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