E-Challan Scam: E-Challan के नाम पर बड़ा खेल, असली-नकली मैसेज में ऐसे करें पहचान

E-Challan Scam से सावधान रहें। फर्जी चालान मैसेज, नकली वेबसाइट और भुगतान लिंक की पहचान कैसे करें? जानें सुरक्षित तरीके और साइबर फ्रॉड होने पर क्या करें।

Jyotsana Singh
Published on: 24 Aug 2026 11:18 AM IST
E-Challan Scam: Got a Fake Fine Message? Heres How to Spot the Fraud
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E-Challan Scam: Got a Fake Fine Message? Here's How to Spot the Fraud

E-Challan Scam: अगर आपके मोबाइल पर अचानक मैसेज आए कि आपकी गाड़ी का चालान कट गया है। साथ में जुर्माने की रकम और भुगतान के लिए एक लिंक भी दिया हो। मैसेज में यह चेतावनी भी हो कि समय पर भुगतान नहीं किया तो वाहन जब्त हो सकता है। तो आपके साथ कोई धोखा हो सकता है। ऐसे संदेश को देखकर बिना जांच पड़ताल किए किसी भी तरह का ट्रांजेक्शन करना आपके खाते को खाली कर सकता है। ज्यादातर लोग बिना ज्यादा सोचे लिंक खोलने की गलती कर बैठते हैं। यही जल्दबाजी साइबर ठगों के लिए कमाई का रास्ता बन रही है। फर्जी ई-चालान के नाम पर लोगों को निशाना बनाने का तरीका नया नहीं है, लेकिन ठग लगातार इसके तरीके बदल रहे हैं। नकली संदेश, सरकारी वेबसाइट जैसे दिखने वाले पेज और तत्काल भुगतान का दबाव बनाकर लोगों से निजी और बैंकिंग जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती है। सड़क पर यातायात नियम तोड़ने पर मिलने वाले असली ई-चालान की व्यवस्था का भरोसा ही अब ठगों का हथियार बन गया है।

पहले समझिए, फेक ई-चालान का खेल कैसे चलता है

आमतौर पर ठग मोबाइल पर ऐसा संदेश भेजते हैं जिसमें वाहन नंबर या चालान का जिक्र करते हुए बताया जाता है कि यातायात नियम तोड़ने पर जुर्माना लगाया गया है। इसके साथ भुगतान के लिए लिंक दिया जाता है। कई बार संदेश में जल्द भुगतान नहीं करने पर कार्रवाई या वाहन जब्त होने जैसी बात लिखकर डर पैदा किया जाता है। यहीं से असली खतरा शुरू होता है। लिंक खोलने पर व्यक्ति किसी ऐसी वेबसाइट पर पहुंच सकता है जो देखने में सरकारी ई-चालान पोर्टल जैसी लगे। वहां चालान देखने या भुगतान करने के नाम पर मोबाइल नंबर, बैंक खाते से जुड़ी जानकारी, कार्ड विवरण, ओटीपी या दूसरी संवेदनशील जानकारी मांगी जा सकती है।

अगर कोई व्यक्ति ऐसी फर्जी साइट पर बैंकिंग एमएमजानकारी या ओटीपी साझा कर देता है तो उसका इस्तेमाल वित्तीय धोखाधड़ी के लिए किया जा सकता है। कुछ मामलों में संदिग्ध लिंक या फर्जी ऐप के जरिए फोन में हानिकारक सॉफ्टवेयर पहुंचाने की कोशिश भी हो सकती है। इसलिए केवल लिंक पर क्लिक करना ही जोखिम पैदा कर सकता है।

सरकार ने भी फर्जी वेबसाइटों से किया है सावधान

सरकारी ई-चालान पोर्टल पर स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि फर्जी वेबसाइट और मोबाइल ऐप आधिकारिक ई-चालान सेवा की नकल कर सकते हैं। पोर्टल यह भी कहता है कि विभाग कॉल, ईमेल, संदेश या लिंक के जरिए पासवर्ड, ओटीपी, भुगतान संबंधी जानकारी या संवेदनशील निजी जानकारी नहीं मांगता।

यानी अगर किसी संदेश में दिए गए लिंक पर क्लिक करने के बाद आपसे बैंक की जानकारी, कार्ड का विवरण या ओटीपी मांगा जा रहा है, तो बेहद सावधान हो जाएं। सरकारी सेवा के नाम पर आया हर संदेश जरूरी नहीं कि असली हो।

चालान चेक करने का सुरक्षित तरीका क्या है?

अगर आपको अपने वाहन के चालान को लेकर कोई संदेश मिलता है तो उसमें दिए लिंक पर जाने के बजाय ब्राउजर में आधिकारिक ई-चालान पोर्टल खुद खोलें। वहां वाहन नंबर, चालान नंबर या ड्राइविंग लाइसेंस नंबर के जरिए चालान की जानकारी देखी जा सकती है। ध्यान रखें कि सरकारी पोर्टल का पता खुद टाइप करके खोलना या आधिकारिक स्रोत से ही उस तक पहुंचना ज्यादा सुरक्षित है। केवल वेबसाइट का रंग, लोगो या सरकारी नाम देखकर किसी पेज को असली न मानें।

इन संकेतों से पहचानें संदिग्ध मैसेज

अगर किसी अनजान नंबर से चालान का संदेश आया है और उसमें तुरंत भुगतान करने का दबाव बनाया जा रहा है, तो सावधान हो जाएं। खासकर ऐसे संदेश जिनमें अजीब वेबसाइट पता, गलत वर्तनी, संदिग्ध लिंक या भुगतान के लिए किसी अलग ऐप को डाउनलोड करने की बात कही गई हो, उन्हें नजरअंदाज करना बेहतर है। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र भी संदिग्ध संदेशों में दिए गए लिंक पर क्लिक करने और ऐसे लिंक पर निजी या वित्तीय जानकारी देने से बचने की सलाह देता है।

गलती से लिंक खोल दिया तो क्या करें?

अगर आपने गलती से संदिग्ध लिंक खोल दिया है लेकिन कोई जानकारी साझा नहीं की, तो तुरंत उस पेज को बंद कर दें और कोई ऐप डाउनलोड हुआ हो तो उसकी जांच करें। यदि आपने बैंक खाते, कार्ड या ओटीपी से जुड़ी जानकारी साझा कर दी है या खाते से अनधिकृत लेनदेन हो गया है, तो तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें और साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराएं।

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर संदिग्ध वेबसाइट, मोबाइल नंबर, एसएमएस और अन्य माध्यमों की रिपोर्ट की जा सकती है। वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल 1930 पर शिकायत करने की सलाह दी गई है।

ई-चालान का मैसेज आए तो घबराकर लिंक पर क्लिक करने के बजाय पहले आधिकारिक पोर्टल पर जाकर इसकी पुष्टि करें। कुछ सेकंड की सावधानी आपके बैंक खाते और निजी जानकारी को बड़े नुकसान से बचा सकती है।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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