भारत में रोजगार पर AI का असर: जितनी नौकरियां गईं, उससे ढाई गुना ज्यादा बनीं

AI Jobs in India: भारत में एआई से जुड़ी भर्तियां छंटनी से ज्यादा रही हैं। नोमुरा की रिपोर्ट बताती है कि एआई नई नौकरियां पैदा करने के साथ रोजगार का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है।

Newstrack Network
Published on: 9 Aug 2026 8:00 PM IST
Artificial Intelligence
X

Artificial Intelligence (Photo-AI)

AI Jobs in India: कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर पिछले कुछ वर्षों से सबसे बड़ा डर यही रहा है कि मशीनें मनुष्यों की नौकरियां छीन लेंगी। कॉल सेंटर से लेकर बैंकिंग, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, डेटा प्रोसेसिंग और बैक-ऑफिस तक लाखों पद खत्म हो सकते हैं। लेकिन भारत के बारे में सामने आई एक नई रिपोर्ट इस बहस को थोड़ा अलग दिशा देती है। वैश्विक वित्तीय सेवा समूह नोमुरा के विश्लेषण के अनुसार वर्ष 2022 से अगस्त 2026 के बीच भारत में एआई से जुड़ी लगभग 83,100 भर्तियां दर्ज की गईं, जबकि एआई के कारण छंटनी या प्राकृतिक रूप से पद कम होने के करीब 31,921 मामले सामने आए। यानी रिपोर्ट में दर्ज हर एक एआई-प्रभावित नौकरी के मुकाबले लगभग 2.6 नई एआई-संबंधित नौकरियां सामने आईं। कुल अंतर करीब 51 हजार नौकरियों का है।

यह तस्वीर पहली नजर में काफी उत्साहजनक लगती है, लेकिन पूरी कहानी इतनी सरल नहीं है। नोमुरा की रिपोर्ट खुद चेतावनी देती है कि ये आंकड़े पूरे भारतीय रोजगार बाजार की आधिकारिक गणना नहीं हैं, बल्कि एशिया में वर्ष 2022 से अगस्त 2026 तक सामने आए 69 प्रमुख कॉरपोरेट और उद्योग मामलों के विश्लेषण पर आधारित हैं। इसलिए इसे यह प्रमाण नहीं माना जा सकता कि भारत में एआई ने कुल मिलाकर निश्चित रूप से लाखों नौकरियां बढ़ा दी हैं। यह फिलहाल इतना जरूर दिखाता है कि जिन कंपनियों और क्षेत्रों में एआई का प्रभाव स्पष्ट रूप से दर्ज हुआ, वहां नई भर्ती की गति छंटनी से अधिक रही।

एशिया की एआई भर्ती में अकेले भारत की हिस्सेदारी 63 प्रतिशत से अधिक

नोमुरा के अनुसार एशिया में अध्ययन अवधि के दौरान एआई से जुड़ी कुल 1,30,758 भर्तियां दर्ज की गईं। इनमें अकेले भारत की हिस्सेदारी 83,100, यानी 63 प्रतिशत से अधिक रही। एशिया में इन नई नौकरियों में 90 प्रतिशत से अधिक टेक्नोलॉजी क्षेत्र से जुड़ी थीं। इसके विपरीत लगभग 60,654 नौकरियां एआई के कारण खत्म होने या प्रभावित होने से जुड़ी थीं और इनमें बड़ी हिस्सेदारी वित्तीय सेवाओं की थी।

भारत का यह अनुपात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश दुनिया के सबसे बड़े आईटी सेवा, बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग और बैक-ऑफिस केंद्रों में शामिल है। नोमुरा ने भारत को एआई के रोजगार प्रभाव को समझने के लिए एक तरह का “ग्राउंड जीरो” कहा है, क्योंकि यहां कंपनियां एक ही समय में एआई से कुछ काम खत्म भी कर रही हैं और नई एआई-आधारित सेवाओं के लिए भर्तियां भी कर रही हैं।

किन नौकरियों पर सबसे पहले पड़ा असर?

रिपोर्ट के अनुसार एआई के कारण सबसे ज्यादा दबाव उन नौकरियों पर पड़ा है, जिनमें काम दोहराव वाला और नियम-आधारित है। इनमें ग्राहक सेवा, सामान्य बैक-ऑफिस प्रोसेसिंग, बेसिक डेटा एंट्री, शुरुआती स्तर की गुणवत्ता जांच, साधारण रिपोर्ट तैयार करना और कुछ प्रकार की तकनीकी सहायता जैसी भूमिकाएं शामिल हैं।

विशेष रूप से चैटबॉट और ऑटोमेटेड ग्राहक सेवा प्रणाली आने के बाद कई कंपनियों ने सपोर्ट टीमों का आकार घटाया है। नोमुरा के अर्थशास्त्रियों के अनुसार उनके अध्ययन में ज्यादातर छंटनी के मामले ऐसे सपोर्ट कार्यों से जुड़े थे, जिन्हें चैटबॉट या स्वचालित प्रणालियों ने प्रतिस्थापित किया।

यही वजह है कि एआई की वास्तविक चुनौती केवल यह नहीं है कि कोई नौकरी पूरी तरह खत्म होगी या नहीं। कई मामलों में पद समाप्त नहीं होता, लेकिन एक ही कर्मचारी एआई टूल की मदद से पहले के दो या तीन कर्मचारियों जितना काम करने लगता है। ऐसे में कंपनियां नई भर्ती धीमी कर सकती हैं, खाली पदों को भरने से बच सकती हैं या टीम का आकार कम रख सकती हैं। इसका प्रभाव औपचारिक “छंटनी” के आंकड़ों में हमेशा दिखाई नहीं देता।

दूसरी तरफ किन लोगों की मांग तेजी से बढ़ी?

जिस तेजी से नियमित और दोहराए जाने वाले काम स्वचालित हो रहे हैं, उसी तेजी से कुछ बिल्कुल नई भूमिकाएं उभर रही हैं। कंपनियों को अब ऐसे लोगों की जरूरत है जो एआई मॉडल तैयार करें, उन्हें कंपनियों की जरूरत के अनुसार ढालें, डेटा व्यवस्थित करें, मॉडल के नतीजों की जांच करें और एआई सिस्टम को सुरक्षित तरीके से लागू करें।

इनमें एआई इंजीनियर, मशीन लर्निंग इंजीनियर, डेटा इंजीनियर, मॉडल ऑपरेशन विशेषज्ञ, एआई उत्पाद प्रबंधक, एआई सुरक्षा विशेषज्ञ, एआई गवर्नेंस विशेषज्ञ, डेटा गुणवत्ता विशेषज्ञ और एआई-आधारित सॉफ्टवेयर डेवलपर जैसी भूमिकाएं प्रमुख हैं।

इसके साथ ही एक नई श्रेणी ऐसे कर्मचारियों की भी बन रही है, जो मूल रूप से एआई विशेषज्ञ नहीं हैं लेकिन अपने काम में एआई का बेहतर उपयोग जानते हैं। उदाहरण के लिए वित्त क्षेत्र का कोई कर्मचारी यदि डेटा विश्लेषण के लिए एआई टूल प्रभावी ढंग से इस्तेमाल कर सकता है, तो उसकी उपयोगिता सामान्य कर्मचारी की तुलना में अधिक हो सकती है।

सबसे बड़ा खतरा फ्रेशर्स और एंट्री-लेवल नौकरियों को

रिपोर्ट की सबसे महत्वपूर्ण चेतावनी शुरुआती स्तर की नौकरियों को लेकर है। भारत में आईटी और बीपीओ उद्योग लंबे समय तक लाखों युवाओं के लिए पहली नौकरी का सबसे बड़ा स्रोत रहा है। कॉलेज से निकलने वाले इंजीनियरों और सामान्य स्नातकों को बड़ी संख्या में भर्ती कर कंपनियां उन्हें प्रशिक्षण देती थीं और फिर प्रोजेक्ट में लगाती थीं।

अब यह मॉडल बदल रहा है। नोमुरा के अनुसार भारत और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में एंट्री-लेवल कर्मचारियों की मांग कमजोर पड़ रही है, जबकि अनुभवी कर्मचारियों की मांग अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है। कंपनियां ऐसे लोगों को प्राथमिकता दे रही हैं जो व्यवसाय को समझते हों और एआई को केवल तकनीकी टूल नहीं बल्कि काम की प्रक्रिया में इस्तेमाल कर सकें। (NDTV⁠)

यानी एआई शायद अभी बड़ी संख्या में वरिष्ठ कर्मचारियों की नौकरियां नहीं छीन रहा, लेकिन वह उन सीढ़ियों को छोटा कर सकता है जिनसे युवा पहले नौकरी में प्रवेश करते थे।

आईटी भर्ती में आई बड़ी गिरावट भी इसी बदलाव का संकेत

भारत के टेक रोजगार बाजार में पिछले कुछ वर्षों में भर्ती की रफ्तार काफी धीमी हुई है। विशेषज्ञ स्टाफिंग कंपनी Xpheno के अलग-अलग सर्वेक्षण बताते हैं कि 2026 की शुरुआत में सक्रिय टेक नौकरियों की संख्या सालाना आधार पर करीब 24 प्रतिशत घटकर लगभग 1.03 लाख रह गई थी। यह जनवरी 2021 के बाद सबसे कमजोर स्तरों में से एक था।

इसके पीछे केवल एआई जिम्मेदार नहीं है। वैश्विक मंदी की आशंका, आईटी कंपनियों के क्लाइंट खर्च में कमी, महामारी के दौरान हुई अत्यधिक भर्ती और लागत घटाने की रणनीति भी कारण हैं। लेकिन एआई ने कंपनियों को कम कर्मचारियों के साथ अधिक काम करने का नया विकल्प जरूर दिया है।

यही कारण है कि पिछले कुछ वर्षों में आईटी कंपनियों की कुल भर्ती घटने के बावजूद एआई कौशल वाले उम्मीदवारों की मांग बढ़ती दिखाई देती है।

नेट नौकरी बढ़ना और हर कर्मचारी का फायदा होना एक बात नहीं

नोमुरा की रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष शायद यही है कि कुल संख्या सकारात्मक होने के बावजूद रोजगार का फायदा समान रूप से नहीं बंट रहा। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि जिस कर्मचारी की सपोर्ट या बैक-ऑफिस नौकरी एआई के कारण चली गई, वह जरूरी नहीं कि अगले महीने एआई इंजीनियर बन जाए। इसलिए कुल आंकड़ों में 51 हजार अतिरिक्त नौकरियां दिखाई देना उन लोगों के व्यक्तिगत नुकसान को समाप्त नहीं करता, जिनके कौशल अब बाजार में कम उपयोगी हो गए हैं।

यही “दो स्तर वाला श्रम बाजार” बन रहा है। एक तरफ एआई कौशल, डेटा और गहरी व्यावसायिक समझ रखने वाले कर्मचारियों का मूल्य बढ़ रहा है। दूसरी तरफ नियमित काम करने वाले और सीमित तकनीकी कौशल वाले कर्मचारियों के लिए अवसर कम हो रहे हैं।

क्या एआई नौकरी खत्म करेगा या नौकरी का स्वरूप बदलेगा?

अब तक के संकेत बताते हैं कि एआई का बड़ा असर पूरी नौकरी खत्म करने से पहले नौकरी के भीतर के कामों पर पड़ रहा है। एक अकाउंटेंट की नौकरी खत्म न भी हो, तो डेटा एंट्री, बिल जांच या रिपोर्ट बनाने का बड़ा हिस्सा एआई कर सकता है। इसी तरह सॉफ्टवेयर इंजीनियर रहेगा, लेकिन कोड लिखने, परीक्षण करने और दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया एआई से तेज होगी।

इससे कर्मचारी की भूमिका “काम करने वाले” से बदलकर “एआई के साथ काम कराने वाले” व्यक्ति की हो सकती है।

यही बदलाव भविष्य के रोजगार का सबसे महत्वपूर्ण संकेत है। नौकरी का नाम वही रह सकता है, लेकिन उसका कौशल-संग्रह पूरी तरह बदल सकता है।

बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं विशेष रूप से प्रभावित

एशिया में एआई के कारण प्रभावित नौकरियों में वित्तीय सेवाओं की बड़ी हिस्सेदारी होने का एक कारण यह है कि बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों का बहुत बड़ा काम डेटा और नियमों पर आधारित होता है। ऋण आवेदन की प्रारंभिक जांच, धोखाधड़ी पहचान, ग्राहक प्रश्न, दस्तावेज वर्गीकरण, निवेश रिपोर्ट और अनुपालन जैसे क्षेत्रों में एआई तेजी से इस्तेमाल हो रहा है।⁠

भारत में भी बैंक और वित्तीय कंपनियां चैटबॉट, डिजिटल ग्राहक सेवा, जोखिम विश्लेषण और स्वचालित दस्तावेज जांच को तेजी से अपना रही हैं। इससे पारंपरिक बैक-ऑफिस पदों पर दबाव बढ़ सकता है, लेकिन दूसरी ओर डेटा विज्ञान, साइबर सुरक्षा, एआई जोखिम और डिजिटल उत्पादों में नई नौकरियां पैदा हो सकती हैं।

भारत के लिए अवसर बड़ा क्यों है?

भारत के पक्ष में तीन बड़ी ताकतें हैं। पहली, विशाल युवा कार्यबल। दूसरी, आईटी और सॉफ्टवेयर सेवा उद्योग का मजबूत आधार। तीसरी, अंग्रेजी भाषी इंजीनियरों और डिजिटल पेशेवरों की बड़ी संख्या।

यदि भारतीय कंपनियां केवल विदेशी एआई मॉडल इस्तेमाल करने के बजाय अपने मॉडल, डेटा प्लेटफॉर्म, एआई एप्लिकेशन और उत्पाद विकसित करती हैं तो नौकरियों का दायरा आईटी सेवाओं से बहुत आगे जा सकता है।

स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, भाषा तकनीक, रक्षा, बैंकिंग, विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और सरकारी सेवाओं में लाखों एआई-सहायक भूमिकाएं विकसित हो सकती हैं।

लेकिन कौशल नहीं बदला तो यही अवसर संकट बन सकता है

भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा यह है कि बड़ी संख्या में युवा ऐसे कौशल के साथ रोजगार बाजार में प्रवेश करें जिनका उपयोग एआई पहले ही आसानी से कर सकता हो। यदि कॉलेजों और प्रशिक्षण संस्थानों में पाठ्यक्रम पुराने बने रहे तो कंपनियों की जरूरत और युवाओं के कौशल के बीच अंतर बढ़ सकता है।

इसलिए अब केवल कंप्यूटर चलाना, सामान्य कोडिंग या बेसिक डेटा प्रोसेसिंग पर्याप्त नहीं होगी। भविष्य की नौकरियों के लिए समस्या समाधान, डेटा समझ, डोमेन विशेषज्ञता, आलोचनात्मक सोच, एआई टूल का उपयोग और उसके परिणाम की जांच अधिक महत्वपूर्ण होंगे।

एआई से सबसे सुरक्षित वही नहीं जो तकनीकी विशेषज्ञ है

यह मानना भी गलत होगा कि भविष्य में केवल एआई इंजीनियरों की ही नौकरी बचेगी। स्वास्थ्य, कानून, वित्त, मीडिया, शिक्षा और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में ऐसे पेशेवरों की मांग बनी रहेगी जिनमें मानवीय निर्णय, जिम्मेदारी, संदर्भ की समझ और लोगों से संवाद करने की क्षमता हो।

डॉक्टर यदि एआई का उपयोग करना सीखता है तो उसकी उत्पादकता बढ़ सकती है, लेकिन केवल एआई मॉडल डॉक्टर की पूरी भूमिका नहीं निभा सकता। यही बात शिक्षक, वकील, प्रबंधक और पत्रकार पर भी लागू होती है।

भारत के रोजगार बाजार का निर्णायक दशक

नोमुरा के आंकड़े फिलहाल एआई को केवल नौकरी नष्ट करने वाली तकनीक मानने वाली धारणा को चुनौती देते हैं। भारत में रिपोर्ट की गई 83,100 एआई-संबंधित भर्तियां बनाम 31,921 नौकरी नुकसान यह संकेत देते हैं कि तकनीक अभी कम-से-कम दर्ज मामलों में रोजगार पैदा भी कर रही है। ⁠

लेकिन असली सवाल संख्या का नहीं, बदलाव की गति का है। यदि नई नौकरियां उच्च कौशल वालों के लिए बनती रहें और पुरानी नौकरियां निम्न तथा मध्यम कौशल वाले कर्मचारियों से छिनती रहें, तो कुल रोजगार बढ़ने के बावजूद असमानता और बेरोजगारी दोनों बढ़ सकती हैं।

इसलिए भारत के लिए एआई की अगली लड़ाई मशीन और इंसान के बीच नहीं होगी। असली मुकाबला होगा—वे कर्मचारी जो एआई के साथ काम करना सीख लेते हैं और वे जो पुराने कामकाज के तरीके पर निर्भर रह जाते हैं।

फिलहाल आंकड़े यह जरूर बता रहे हैं कि एआई भारत में केवल नौकरियां खत्म नहीं कर रहा। वह रोजगार का पूरा नक्शा बदल रहा है—कुछ दरवाजे बंद कर रहा है, लेकिन उससे कहीं ज्यादा नए दरवाजे भी खोल रहा है। सवाल यह है कि इन नए दरवाजों तक पहुंचने की तैयारी कितने लोगों के पास होगी।

Newstrack Network
ABOUT THE AUTHOR

Newstrack Network

Newstrack Desknewstracknetwork@gmail.com

Newstrack is one of the most Trusted and Popular news portal of India. Remain updated and aware, only on Newstrack

Next Story