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NTA Exam Centres: 9 साल में एक भी अपना परीक्षा केंद्र नहीं बना सका NTA? 500 सेंटर्स का प्लान अब भी अधूरा
NTA Exam Centres: NTA के 500 स्थायी परीक्षा केंद्र बनाने का 2017 का प्रस्ताव 9 साल बाद भी अधूरा है। जानिए क्यों एजेंसी अब भी किराये के परीक्षा केंद्रों पर निर्भर है और NEET-JEE पर क्या सवाल उठ रहे हैं।
NTA Exam Centres (Image Credit-Social Media)
NTA Exam Centres: NEET पेपर लीक विवाद के बाद एक तरफ जहाँ देशभर में छात्रों का गुस्सा चरम पर है और केंद्र सरकार पर सुधारों का चौतरफा दबाव है, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के सुधार के दावे ज़मीनी हकीकत से कोसों दूर नज़र आ रहे हैं। एनटीए की इस घोर लापरवाही का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एजेंसी ने हाल ही में 'टेस्ट सेंटर नेटवर्क एंड ऑपरेशन अधिकारी' (GM-TCNO) का नया विज्ञापन निकाला है, जिसका मुख्य काम मानकों पर खरे उतरने वाले 'किराये के परीक्षा केंद्रों' की तलाश करना होगा। सवाल यह उठता है कि गठन के 9 साल बाद भी देश की सबसे बड़ी टेस्टिंग एजेंसी अपने खुद के परीक्षा केंद्र क्यों नहीं बना सकी?
2017 कैबिनेट का फैसला: 500 सेंटर्स बनाने का प्रस्ताव फाइलों में दफन
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, जब 2017 में केंद्रीय कैबिनेट ने एनटीए के गठन की ऐतिहासिक मंजूरी दी थी, तब परीक्षार्थियों की भारी संख्या को देखते हुए देश में 500 स्थायी मानक परीक्षा केंद्र (Own Exam Centers) बनाने का प्रस्ताव पास किया गया था:
किराये के सेंटर्स पर निर्भरता: 9 साल बीत जाने के बाद भी एनटीए खुद का एक भी सेंटर स्थापित नहीं कर सका है और अरबों रुपये का बजट होने के बावजूद प्राइवेट व किराये के परीक्षा केंद्रों पर पूरी तरह निर्भर है।
दूरदराज व ग्रामीण क्षेत्रों की अनदेखी: कैबिनेट के विजन के अनुसार तहसील और जिला स्तर पर ग्रामीण व दूरदराज के इलाकों में हाई-टेक कंप्यूटर आधारित 'एनटीए केंद्र' (CBT Centers) बनने थे, जो कभी ज़मीन पर नहीं उतर सके।
राधाकृष्णन समिति की सिफारिशें ठंडे बस्ते में: नीट-यूजी 2024 में धांधली और नीट 2026 में पेपर लीक जैसी घटनाओं के बाद ISRO के पूर्व प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन समिति ने भी अपने खुद के इंफ्रास्ट्रक्चर और परीक्षा केंद्रों के निर्माण की पुरजोर सिफारिश की थी, लेकिन यह रिपोर्ट भी पिछले दो सालों से दफ्तरों की फाइलों में धूल फांक रही है।
अगर कैबिनेट के फैसले लागू होते, तो टल सकते थे पेपर लीक जैसे कलंक
विशेषज्ञों और सरकारी दस्तावेजों के विश्लेषकों का मानना है कि यदि 2017 में कैबिनेट द्वारा लिए गए फैसलों को ईमानदारी से लागू किया जाता, तो नीट और जेईई जैसी परीक्षाओं में इतनी बड़ी धांधली संभव ही नहीं होती:
सेंटर लेवल की सेंधमारी का खात्मा: नीट-2024 व 2026 के मामलों में पेपर परीक्षा केंद्रों (किराये के सेंटर्स) के स्तर पर ही लिफाफे खोलकर लीक किए गए थे। अगर एनटीए के अपने सुरक्षित और बायोमेट्रिक-प्रोटेक्टेड सेंटर्स होते, तो यह सेंधमारी संभव नहीं होती।
मोबाइल टेस्ट सेंटर योजना अधर में: हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों के दुर्गम इलाकों के लिए 'मोबाइल टेस्ट सेंटर्स' (Mobile Test Centers) बनाने की सिफारिश की गई थी, ताकि दूरदराज के छात्रों को सहूलियत मिले, लेकिन यह योजना भी पूरी तरह अधर में लटकी हुई है।
साल में 2 बार परीक्षा का सपना सिर्फ 'JEE Main' तक सीमित
छात्रों का मानसिक तनाव कम करने के लिए कैबिनेट ने एक और क्रांतिकारी फैसला लिया था, जो एनटीए की सुस्ती का शिकार हो गया:
दो बार ऑनलाइन परीक्षा का वादा: 2018 में तत्कालीन शिक्षा मंत्री ने ऐलान किया था कि राष्ट्रीय स्तर की सभी प्रमुख परीक्षाएं साल में दो बार ऑनलाइन (CBT) मोड में आयोजित की जाएंगी, ताकि अगर छात्र का एक प्रयास खराब हो जाए तो उसका पूरा साल बर्बाद न हो।
सिर्फ जेईई में लागू: एनटीए इस व्यवस्था को केवल 'जेईई मेन' (JEE Main) तक ही सीमित रख पाया। NEET जैसी देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा आज भी साल में केवल एक बार और ओएमआर (Offline Pen-Paper) मोड में कराने पर एजेंसी अड़ी हुई है, जिससे छात्रों पर बेवजह मानसिक दबाव और पेपर लीक का खतरा बना रहता है।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) जिस तरह देश के लाखों युवाओं का भविष्य तय करती है, उस लिहाज़ से उसका इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह खोखला और किराये के ढाँचे पर टिका हुआ है। जब तक एजेंसी अपनी प्राथमिक ज़िम्मेदारियों को पूरा करते हुए अपने सुरक्षित परीक्षा केंद्र तैयार नहीं करती और कैबिनेट की सिफारिशों को लागू नहीं करती, तब तक परीक्षा प्रणाली पर लगा 'पेपर लीक' का दाग मिटना नामुमकिन है।


