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Ritesh Sidhwani बिना फिल्म स्कूल गए, बनाया एक्सेल एंटरटेनमेंट किया फिल्म का निर्माण
Ritesh Sidhwani Excel Entertainment: क्या आप जानते हैं? एक्सेल एंटरटेनमेंट बनाने से पहले रितेश सिधवानी ने बिना किसी फिल्म स्कूल में गए फिल्म निर्माण सीखा था
Ritesh Sidhwani Excel Entertainment (Image Credit-Social Media)
Ritesh Sidhwani Excel Entertainment: जब हम आज के भारतीय सिनेमा के बारे में सोचते हैं। ऐसी फिल्में जो नई, स्टाइलिश और दर्शकों से जुड़ी हुई लगती हैं, तो एक्सेल एंटरटेनमेंट का नाम सबसे पहले याद आने वाले नामों में से एक है। निर्माता रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर द्वारा शुरू किए गए इस बैनर ने हमें ‘दिल चाहता है’, ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’, ‘रॉक ऑन!!’ जैसी यादगार फिल्में और ‘मिर्जापुर’ जैसी हिट सीरीज दी हैं। आज रितेश अपना जन्मदिन मना रहे हैं, ऐसे में उस शख्स के शानदार सफर को याद करना खास है, जिसने एक पूरी पीढ़ी के लिए फिल्म बनाने के तरीके को बदलने में अहम भूमिका निभाई।
रितेश सिधवानी ने बिना फिल्म स्कूल गए बनाया फिल्म (How To Ritesh Sidhwani Build Movies)-
दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतने और सिनेमा की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने से बहुत पहले रितेश का फिल्म निर्माण से कोई संबंध नहीं था। उन्होंने करीब छह साल अपने परिवार के घरेलू सामान के कारोबार, मार्लेक्स में काम किया। लेकिन उनका दिल हमेशा कहानियां सुनाने में लगा था। जब उन्होंने आखिरकार अपने इस जुनून को आगे बढ़ाने का फैसला किया, तो उन्होंने किसी बड़े फिल्म स्कूल का रुख नहीं किया। इसके बजाय उन्होंने एक आसान और व्यावहारिक रास्ता चुना—सीधे एक फिल्म के सेट पर जाकर सीखना।
अपनी पहली फिल्म बनाने से ठीक पहले रितेश ‘लगान’ के सेट पर गए। वहां उन्होंने दूर से खड़े होकर देखा कि लाइट्स कैसे लगाई जाती हैं, निर्देशकों की टीम कैसे सैकड़ों लोगों को संभालती है और एक फिल्म के सेट पर होने वाली भागदौड़ को कैसे व्यवस्थित तरीके से चलाया जाता है। उनकी यही जिज्ञासा उनकी सबसे बड़ी सीख बन गई। बिना किसी औपचारिक डिग्री या फिल्म की पारंपरिक ट्रेनिंग के उन्होंने अपनी समझ, अच्छी कहानियों को पहचानने की नजर और चीजों को ध्यान से देखने की आदत के दम पर फिल्म निर्माण सीखा।
उनका यह एक फैसला आगे चलकर ऐसा रंग लाया, जिसकी शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। निर्माता के तौर पर उनकी पहली फिल्म ‘दिल चाहता है’ ने न सिर्फ राष्ट्रीय पुरस्कार जीता, बल्कि भारत में शहरी कहानियों को दिखाने का तरीका भी बदल दिया। कई साल बाद ‘रॉक ऑन!!’ के लिए उन्हें दूसरा राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। यह साबित करता है कि कई बार जुनून और असल जिंदगी से मिली सीख ही सबसे बड़े शिक्षक बन सकते हैं। रितेश सिधवानी को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं और आने वाले वर्षों में भी ऐसे ही शानदार और यादगार सिनेमा के लिए शुभकामनाएं!


