TRENDING TAGS :
Gujarat Panchayat Election 2025: महिसागर में वोट डालने जा रहे थे लोग, ट्रक से टकराई जीप, 2 की मौत, 13 घायल
Gujarat Panchayat Election 2025: गुजरात पंचायत चुनाव में भारी उत्साह के बीच महीसागर में बड़ा हादसा, 2 की मौत, 13 घायल। जानिए वोटिंग अपडेट, ओबीसी आरक्षण और इतिहास।
Gujrat Election
Gujarat Panchayat Election 2025: गुजरात में आज पंचायत चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। वोटिंग शाम 6 बजे तक चलेगी और वोटों की गिनती 25 जून को की जाएगी। राज्य की कुल 8,326 ग्राम पंचायतों में से 751 पंचायतों में निर्विरोध चुनाव हो चुका है। बाकी बची पंचायतों में 3,656 सरपंच और 16,224 सदस्य चुने जाएंगे। इसके लिए करीब 81 लाख वोटर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे।
महीसागर में बड़ा हादसा, 2 की मौत, 13 घायल
महीसागर में वोट डालने जा रहे लोगों की जीप एक ट्रक से टकरा गई। जीप में कुल 15 लोग सवार थे। इस हादसे में 2 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 13 लोग घायल हो गए। सभी घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
जामनगर में 11 बजे तक 24% मतदान
जामनगर जिले की 187 ग्राम पंचायतों में सुबह 11 बजे तक 24% वोटिंग हो चुकी थी। वोट डालने के लिए बुजुर्ग, महिलाएं और युवा लंबी कतारों में खड़े नजर आए। कई बुजुर्ग मतदाताओं को पुलिसकर्मी सहारा देकर मतदान केंद्र तक लेकर गए, ताकि वे भी वोट डाल सकें। प्रशासन ने युवाओं से ज्यादा से ज्यादा वोटिंग करने की अपील की है।
पहली बार इतने बड़े पैमाने पर पंचायत चुनाव
साल 2023 में जावेरी आयोग की रिपोर्ट के बाद गुजरात सरकार ने फैसला लिया कि पंचायत, नगर पालिका और नगर निगम जैसे स्थानीय निकायों में ओबीसी को 27% आरक्षण दिया जाएगा। इस फैसले के बाद अब राज्य में पहली बार इतने बड़े स्तर पर ग्राम पंचायत चुनाव हो रहे हैं। राज्य चुनाव आयोग ने 28 मई को चुनाव की घोषणा की थी। नामांकन भरने की आखिरी तारीख 9 जून थी और नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 11 जून तय की गई थी। 8,326 ग्राम पंचायतों में से 4,688 में आम या मध्यावधि चुनाव हो रहे हैं, जबकि 3,638 पंचायतों में उपचुनाव कराए जा रहे हैं।
मतदाताओं को मिलेगा NOTA का विकल्प
चुनाव आयोग के अनुसार वोटिंग मतपत्रों के जरिए हो रही है और मतदाताओं को NOTA का विकल्प भी दिया गया है। गुजरात में पंचायत चुनाव में आम तौर पर मुकाबला सत्तारूढ़ बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही होता है।
चुनाव में देरी को लेकर कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने
पंचायत चुनाव में देरी को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के अपने-अपने तर्क हैं। कांग्रेस के गुजरात प्रवक्ता मनीष दोशी का कहना है कि चुनाव करीब दो साल से रुके हुए थे। कांग्रेस पहले से ही इन चुनावों की मांग कर रही थी क्योंकि बीजेपी सरकार ने पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने के बाद वहां प्रशासक नियुक्त कर दिए, जिससे लोगों का अधिकार उनसे छिन गया। वहीं, बीजेपी के प्रवक्ता यज्ञेश दवे ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव में देरी के पीछे बीजेपी का कोई रोल नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को राज्य सरकार द्वारा तय 27% ओबीसी आरक्षण लागू करने के लिए हर वार्ड में ओबीसी आबादी की गिनती करनी थी, जो एक जरूरी काम था।
बीजेपी का कहना है कि अगर चुनाव पहले कराए जाते तो कांग्रेस यही कहती कि ओबीसी के हक को नजरअंदाज किया गया। इसलिए कांग्रेस सिर्फ लोगों में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है।
1993 में पूरे देश में लागू हुआ पंचायती राज
भारत में पंचायती राज की शुरुआत आजादी के बाद 2 अक्टूबर 1959 को हुई थी, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने राजस्थान के नागौर जिले में इसे औपचारिक रूप से शुरू किया। पंचायती राज व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए एक समिति बनाई गई थी, जिसके अध्यक्ष गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री बलवंतराय मेहता थे। इस समिति ने कुछ जरूरी सुझाव दिए, जिन्हें बाद में लागू किया गया। हालांकि शुरुआत में यह व्यवस्था पूरे देश में लागू नहीं हो पाई थी। फिर 1979 में संविधान में 74वां संशोधन किया गया और इसके बाद 1993 में पूरे देश में पंचायती राज व्यवस्था लागू कर दी गई। इसके साथ ही पूरे देश में पंचायती राज का एक जैसा कानून बना और लागू किया गया।


