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भारत के लिए 4 गोल्ड जीतने वाला खिलाड़ी रांची में बेच रहा सब्जी, CM हेमंत सोरेन ने दिया मदद का भरोसा
भारत के लिए 4 गोल्ड मेडल जीत चुके झारखंड के थ्रोबॉल खिलाड़ी अमरेदीप कुमार रांची में सब्जी बेचने और कैब चलाने को मजबूर हैं। मामला सामने आने के बाद CM हेमंत सोरेन ने मदद का भरोसा दिया है।
Jharkhand Throwball Player: रांची में भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चार गोल्ड मेडल जीत चुके थ्रोबॉल खिलाड़ी अमरेदीप कुमार की कहानी देश के खेल सिस्टम पर सवाल खड़े कर रही है। 29 वर्षीय अमरेदीप आज अपने परिवार का खर्च चलाने के लिए रांची के अरगोड़ा चौक पर सब्जियां बेच रहे हैं और अतिरिक्त कमाई के लिए कैब भी चलाते हैं।
अमरेदीप ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए चार स्वर्ण पदक जीते हैं। इसके बावजूद उन्हें अब तक झारखंड में सरकारी नौकरी या अपेक्षित आर्थिक सहायता नहीं मिल सकी। उन्होंने दावा किया कि वह कई बार संबंधित अधिकारियों के सामने अपनी बात रख चुके हैं, लेकिन उनकी मांग पर कोई ठोस फैसला नहीं हुआ।
विदेश में भारत का प्रतिनिधित्व, प्रतियोगिता के लिए लिया था कर्ज
अमरेदीप के मुताबिक, 2015 में मलेशिया में आयोजित प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए उन्हें करीब 65 हजार रुपये उधार लेने पड़े थे। अब वह उस आर्थिक संघर्ष के बीच परिवार की जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं और भविष्य में श्रीलंका में होने वाली प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की तैयारी भी करना चाहते हैं।
उनका कहना है कि उनके साथ खेलने वाले कुछ खिलाड़ियों को छत्तीसगढ़, हरियाणा और बिहार में सरकारी नौकरी और दूसरी सुविधाएं मिलीं, जबकि झारखंड में उनके आवेदन अब तक लंबित हैं।
परिवार चलाने के लिए सब्जी और कैब का सहारा
अमरेदीप के परिवार की आर्थिक स्थिति भी चुनौतीपूर्ण है। रिपोर्ट के अनुसार उनके पिता भी सब्जी बेचते हैं और अमरेदीप उनका हाथ बंटाते हैं। उनकी मां घर-घर जाकर सब्जियां बेचती हैं, जबकि बड़े भाई की फास्ट-फूड की दुकान है।
वायरल वीडियो के बाद सरकार ने लिया संज्ञान
अमरेदीप की आर्थिक स्थिति को सामने लाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला झारखंड सरकार तक पहुंचा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले का संज्ञान लेते हुए सहायता के निर्देश दिए हैं। खेल मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने भी कहा है कि सरकार अमरेदीप के लिए रोजगार के विकल्प तलाश रही है।
चार बार अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके इस खिलाड़ी की मौजूदा स्थिति ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि गैर-लोकप्रिय खेलों में देश के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को करियर और आर्थिक सुरक्षा देने के लिए व्यवस्था कितनी प्रभावी है।


