TRENDING TAGS :
बिहार चुनाव के बाद BJP ने चली अगली चाल... 'इमोशनल मोड' एक्टिव! झारखंड में हेमंत सोरेन के साथ होगा बड़ा खेल? ये है सबूत...
BJP emotional strategy On Jharkhand: बिहार चुनाव 2025 के नतीजों के आधार पर पूर्वानुमान लगाया गया था कि झारखंड में महागठबंधन टूटने की संभावना बन रही है।
BJP emotional strategy On Jharkhand
BJP emotional strategy On Jharkhand: पिछले महीने नवंबर में बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे सामने आने के बाद राजनीति के 'मिज़ाज' और गठबंधनों की 'रणनीति' लगातार चर्चा में बनी हुई है। इस बीच, कई राजनीतिक विश्लेषकों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को लेकर दावा किया कि यह पार्टी केवल चुनाव मोड में नहीं, बल्कि इमोशनल मोड में भी पूरी तरह से सक्रिय रहती है। उनके अनुसार, आने वाले महीनों में इस 'रणनीति' का झारखंड राज्य में प्रभाव देखने को मिल सकता है।
पूर्वानुमान हुआ सच साबित..
जानकारी के मुताबिक, बिहार चुनाव 2025 के नतीजों के आधार पर पूर्वानुमान लगाया गया था कि झारखंड में महागठबंधन टूटने की संभावना बन रही है। और यह पूर्वानुमान तकरीबन 15 से 20 दिन पहले किया गया था और अब देखा जये तो यह... वास्तविक घटनाओं से यह पूरी तरह मेल खा रहा है।
बिहार चुनाव 2025 की जीत के बाद अब आगे क्या ?
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में NDA की ज़बरदस्त जीत के बाद, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा के साथ मिलकर इस बार भी सत्ता की कमान अपने हाथ में थामी। अब आने वाले 5 से 6 महीनों में देश की राजनीति पर मीडिया और विश्लेषकों की कड़ी नजर होगी, विशेषकर नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी की रणनीति पर। इतना ही नहीं... मोदी और अमित शाह की रणनीति में मौन रहना भी एक महत्वपूर्ण हथियार साबित हो सकता है।
बीजेपी का चुनावी चाल
देखा जाए तो... बीजेपी न केवल चुनाव जीतने या हारने के मोड में रहती है, बल्कि भावनाओं का भी भरपूर इस्तेमाल करती है जिसे 'इमोशनल मोड' कहा जा सकता है। इसका अर्थ साफ़ है कि भारतीय जनता पार्टी अपनी राजनीतिक रणनीति में भावनात्मक परिस्थितियों और विपक्षी दलों की संवेदनाओं का भी लाभ उठाती है।
झारखंड में बीजेपी चलेगी ये चाल
झारखंड के संदर्भ में देखा जाए तो... शेखर ने हेमंत सोरेन और उनके दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) का उदाहरण सामने आया था। आपको बता दे, बिहार चुनाव 2025 में महागठबंधन ने JMM को उचित सीटें नहीं दीं। इस कारण से, हेमंत सोरेन और उनकी पार्टी इमोशनल मोड में आ गयी हैं। अब... बीजेपी इस स्थिति का राजनीतिक फायदा उठाने का पूरा प्रयास कर सकती है। उधर, असदुद्दीन ओवैसी और उनकी पार्टी AIMIM को महागठबंधन में शामिल नहीं किया गया। यदि उन्हें सीटें दी गई होती, तो बिहार में गठबंधन की स्थिति और मजबूत हो सकती थी। लेकिन, इस तरह के असंतोष और भावनात्मक स्थिति को भजपा अपनी रणनीति के लिए इस्तेमाल कर सकती है।
देखा जाए... तो राजनीति सिर्फ एक गणित या चुनावी आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि राजनीतिक दल और उनके नेता भी इंसान हैं, जिनकी भावनाओं और संवेदनाओं को समझना और उनका फायदा उठाना रणनीति का अहम भाग होता है।
आगामी महीनों में बीजेपी का रहेगा ये कदम
अब झारखंड में कांग्रेस और JMM की सरकार एक संवेदनशील स्थिति में आ गए हैं। दोनों पार्टियों का सहयोग बहुत आवश्यक है, लेकिन भावनात्मक असंतोष किसी भी वक़्त गठबंधन को कमजोर कर सकता है। इस बीच इस बात का स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि भाजपा आने वाले महीनों में झारखंड में सक्रिय होकर इस स्थिति का लाभ उठा सकती है।
देखा जाए तो... राजनीति को लेकर कई बार विश्लेषण सही साबित होते हैं, और कभी-कभी गलत। यदि पूर्वानुमानों की बात करें तो... साल 2014 और 2019 में कई राजनीतिक विश्लेषकों की भविष्यवाणी बिल्कुल सही थी, लेकिन साल 2024 में कुछ चुनावी नतीजे उनके अनुमान के विपरीत आए। यही कारण यह है कि राजनीति में खिलाड़ी यानी नेता किस तरह निर्णय लेते हैं, यह हमेशा पूर्वानुमान के अनुसार नहीं होता।
हालिया स्थिति...
बिहार और झारखंड की हालिया राजनीतिक घटनाओं से यह साफ़ हो गया है कि भाजपा सिर्फ चुनावी मोड में नहीं, बल्कि इमोशनल मोड में भी सक्रिय रहती है। इसका अर्थ यह है कि राजनीतिक दलों की भावनाओं, असंतोष और गठबंधनों की कमजोरियों का फायदा उठाकर बीजेपी अपने रणनीतिक हित साध सकती है।
वहीं, अगले कुछ महीनों में देश की राजनीति में कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण मोड़ देखने को मिल सकते हैं। विशेषकर झारखंड में, जहां हेमंत सोरेन की भावनात्मक स्थिति बीजेपी के लिए अवसर पैदा कर सकती है।
लेकिन इन सभी के बीच समझने वाली बात ये हैं कि 'राजनीति' केवल सत्ता पाने या चुनाव जीतने का खेल नहीं है बल्कि... यह भावनाओं, असंतोष और रणनीति का भी खेल है। भाजपा की इमोशनल मोड रणनीति इस बात का संकेत है कि पार्टी केवल चुनावी तैयारी में नहीं रहती, बल्कि विपक्षी दलों की भावनाओं और संवेदनाओं का राजनीतिक भरपूर फायदा भी उठाती है। झारखंड में हालिया घटनाएं और बिहार चुनाव 2025 का प्रभाव इसे स्पष्ट रूप से दर्शा रहा है।


