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अंग्रेजी का डर भगाएगा चाईबासा का AI चश्मा, झारखंड के युवा का कमाल, रियल-टाइम हिंदी अनुवाद और रिकॉर्डिंग
AI Smart Glasses: झारखंड के चाईबासा निवासी पहल राठौर ने AI स्मार्ट ग्लास तैयार किया है, जो अंग्रेजी को रियल-टाइम में हिंदी में अनुवाद कर ऑडियो के जरिए सुनाता है और सुरक्षा के लिए रिकॉर्डिंग भी करता है।
Jharkhand News
AI Smart Glasses: तकनीकी नवाचार और स्टार्टअप की दुनिया अब केवल मेट्रो शहरों या बड़े शिक्षण संस्थानों की बपौती नहीं रही। झारखंड के सुदूर पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा शहर के एक युवा ने यह साबित कर दिखाया है कि अगर सोच में नयापन और इरादे पक्के हों, तो छोटे शहरों से भी वैश्विक स्तर के तकनीकी समाधान तलाशे जा सकते हैं। चाईबासा निवासी 25 वर्षीय पहल राठौर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित एक ऐसा 'स्मार्ट ग्लास' तैयार किया है, जो भाषा की बाधा को समाप्त करने के साथ-साथ व्यक्तिगत सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाएगा। यह चश्मा सामने वाले व्यक्ति द्वारा अंग्रेजी में कही जा रही बात को रियल-टाइम में हिंदी में अनुवाद कर पहनने वाले के कानों तक पहुंचाता है।
रियल-टाइम वॉयस ट्रांसलेशन: ऐसे काम करता है सिस्टम
थ्री-स्टेप लैंग्वेज प्रोसेसिंग: चश्मे में अत्याधुनिक स्पीच-टू-टेक्स्ट, न्यूरल मशीन ट्रांसलेशन (NMT) और टेक्स्ट-टू-स्पीच तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। जैसे ही कोई व्यक्ति अंग्रेजी में बातचीत शुरू करता है, चश्मे में लगे माइक्रोफोन आवाज को कैप्चर करते हैं, सिस्टम उसे तुरंत हिंदी में प्रोसेस करता है और इन-बिल्ट ऑडियो मॉड्यूल के जरिए उपयोगकर्ता को तुरंत अनुवादित आवाज सुनाई देती है।
बाजार में मौजूद अन्य चश्मों से अलग: बाजार में अब तक केवल कैमरा या म्यूजिक प्लेबैक वाले स्मार्ट ग्लासेस (जैसे रे-बैन मेटा) मौजूद हैं। अनुवाद के लिए लोगों को मोबाइल ऐप्स का सहारा लेना पड़ता है। पहल का यह आविष्कार बिना मोबाइल निकाले, हैंड्स-फ्री तरीके से दोनों सुविधाओं (कैमरा और लाइव ट्रांसलेशन) को एक ही फ्रेम में समाहित करता है।
सुरक्षा का पहिया: दुर्घटना और जरूरी पलों की ऑन-द-स्पॉट रिकॉर्डिंग
चश्मे में उच्च गुणवत्ता वाला सोनी (Sony) कैमरा सेंसर लगाया गया है, जो यूजर के देखने के दायरे (Field of View) के अनुसार आसपास की गतिविधियों को कैप्चर कर सकता है।
सड़क हादसों, अप्रत्याशित विवादों या जरूरी शैक्षणिक व्याख्यानों के दौरान यह कैमरा बिना किसी अतिरिक्त उपकरण के तत्काल विजुअल साक्ष्य और फुटेज सुरक्षित रखने में सक्षम है।
हार्डवेयर की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए इसमें ताइवान से आयातित हाई-परफॉर्मेंस चिपसेट और भारत में ही निर्मित मजबूत व ड्यूरेबल फ्रेम का उपयोग किया गया है।
2012 के विचार से 2026 के प्रोटोटाइप तक का सफर
पहल बताते हैं कि इस स्मार्ट चश्मे का शुरुआती विचार उनके मन में वर्ष 2012 में आया था, जब गूगल ग्लास के पेटेंट ने दुनिया भर का ध्यान आकर्षित किया था। हालांकि, उस समय हार्डवेयर और भाषा मॉडल्स की सीमित क्षमताओं के चलते इस पर आगे काम नहीं हो सका। हाल के वर्षों में लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLM), उन्नत नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) और कॉम्पैक्ट चिपसेट के तेजी से विकास ने उन्हें दोबारा प्रेरित किया। उन्होंने लगभग एक साल की कड़ी मेहनत के बाद इसका पूरी तरह काम करने वाला वर्किंग प्रोटोटाइप तैयार कर लिया।
पेटेंट और इनक्यूबेशन की प्रक्रिया अंतिम चरण में
बौद्धिक संपदा सुरक्षा: उपकरण के तकनीकी आर्किटेक्चर, सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन और डिवाइस डिजाइन के लिए पेटेंट आवेदन की प्रक्रिया चल रही है।
संस्थानों से संपर्क: उत्पाद को बड़े पैमाने पर व्यावसायिक रूप से लॉन्च करने के लिए आईआईटी बॉम्बे के 'सोसाइटी फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप' (SINE) और इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) के 'आई-वेंचर्स' (I-Venture) जैसे प्रतिष्ठित इनक्यूबेशन सेंटरों में मेंटरशिप और सीड फंडिंग के लिए आवेदन किया गया है।
यूजर वैलिडेशन: वर्तमान में यह चश्मा फील्ड टेस्टिंग और यूजर वैलिडेशन के दौर से गुजर रहा है, ताकि रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को दूर कर इसे जल्द से जल्द किफायती दरों पर बाजार में उतारा जा सके।


