जामताड़ा को पीछे छोड़ रहे ये जिले! साइबर ठगी में चौंकाने वाला रिकॉर्ड

Cyber Crime News: साइबर अपराध की सूची में झारखंड के देवघर, दुमका, गिरिडीह और धनबाद के साथ बिहार के नवादा, नालंदा और पटना का नाम शामिल है। जानें फर्जी सिम और ठगी की रकम निकालने में कौन किस स्थान पर है।

Shalni Kumari
Published on: 18 Oct 2026 11:27 AM IST
Bihar Cyber Crime
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Cyber Fraud

Cyber Crime in Jharkhand and Bihar: साइबर ठगी (Cyber Fraud) का नाम आते ही कभी झारखंड के जामताड़ा की चर्चा सबसे पहले होती थी, लेकिन अब इस अपराध का नेटवर्क कई दूसरे जिलों तक फैल चुका है। साइबर अपराध (Cyber Crime), फर्जी सिम कार्ड (Fake SIM Cards) और ठगी की रकम निकालने के तरीकों को लेकर सामने आए आंकड़ों में झारखंड और बिहार के कई जिलों के नाम शामिल हैं। झारखंड का देवघर साइबर अपराध के मामलों में देशभर में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है, जबकि बिहार का नवादा दूसरे नंबर पर है। वहीं, दुमका, गिरिडीह और धनबाद भी अलग-अलग श्रेणियों में शीर्ष 15 जिलों की सूची में जगह बना चुके हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि साइबर ठगी का नेटवर्क अब केवल कुछ चुनिंदा इलाकों तक सीमित नहीं रह गया है।

साइबर अपराध के मामलों में देवघर तीसरे स्थान पर

अगस्त 2026 में केंद्र सरकार की प्रगति समीक्षा बैठक (PRAGATI Review Meeting) के दौरान जारी की गई सूची में साइबर अपराध से जुड़े विभिन्न मानकों के आधार पर देश के 15 प्रमुख जिलों की पहचान की गई। इसमें साइबर अपराध के मामलों की संख्या, धोखाधड़ी में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल सिम कार्ड जारी करने, किराए पर बैंक खाते उपलब्ध कराने और ठगी की रकम निकालने जैसे पहलुओं को आधार बनाया गया।

साइबर अपराध के मामलों में बिहार का नवादा जिला देश में दूसरे स्थान पर है, जबकि झारखंड का देवघर तीसरे पायदान पर पहुंच गया है। बिहार के नालंदा को चौथा और पटना को नौवां स्थान मिला है। झारखंड का दुमका भी इस सूची में शामिल है और देशभर में 14वें स्थान पर दर्ज किया गया है।

इन आंकड़ों के साथ झारखंड और बिहार के कई जिलों में सक्रिय साइबर अपराध के नेटवर्क पर ध्यान केंद्रित हुआ है। हालांकि, अलग-अलग श्रेणियों की रैंकिंग अपराध के अलग-अलग पहलुओं पर आधारित है, इसलिए इन्हें एक ही तरह के अपराध की सूची नहीं माना जाना चाहिए।

फर्जी सिम कार्ड के मामले में गिरिडीह भी सूची में

साइबर ठगी को अंजाम देने के लिए अपराधी अक्सर ऐसे मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करते हैं, जिनकी पहचान तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए मुश्किल हो जाता है। फर्जी दस्तावेजों या दूसरे लोगों की पहचान के आधार पर सिम कार्ड जारी कराना इस नेटवर्क का एक अहम हिस्सा है।

सिम कार्ड जारी करने से जुड़े मामलों में बिहार का नालंदा जिला देश में दूसरे स्थान पर है, जबकि अरवल चौथे नंबर पर दर्ज किया गया है। झारखंड के गिरिडीह जिले को इस श्रेणी में दसवां स्थान मिला है।

फर्जी सिम कार्ड के जरिए अपराधियों को अपनी वास्तविक पहचान छिपाने और पीड़ितों से संपर्क करने में मदद मिल सकती है। यही वजह है कि सिम कार्ड जारी करने की प्रक्रिया में पहचान का सत्यापन (Identity Verification) साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

ठगी के पैसों की निकासी में धनबाद और पटना का नाम

साइबर ठगी के बाद अपराधियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती पीड़ित से हासिल की गई रकम को निकालना या दूसरे खातों में स्थानांतरित करना होती है। इस प्रक्रिया में एटीएम (ATM Withdrawals), चेक (Cheque Transactions) और बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि पैसे के लेनदेन की कड़ियों को पहचानना कठिन हो जाए।

ठगी की रकम एटीएम के जरिए निकालने से जुड़े मामलों में झारखंड का धनबाद देश में 13वें स्थान पर है। वहीं, बिहार की राजधानी पटना दूसरे स्थान पर दर्ज की गई है। इस श्रेणी में कोलकाता पहले नंबर पर है।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि साइबर अपराध का नेटवर्क केवल लोगों को फोन करके या ऑनलाइन लिंक भेजकर ठगने तक सीमित नहीं है। ठगी के बाद रकम निकालने और उसे आगे पहुंचाने के लिए भी अलग-अलग स्तरों पर नेटवर्क काम कर सकता है।

किराए के बैंक खातों से छिपाई जाती है रकम की कड़ी

साइबर ठगी के मामलों में म्यूल अकाउंट (Mule Account) यानी ऐसे बैंक खाते भी जांच एजेंसियों के लिए चिंता का विषय हैं, जिनका इस्तेमाल धोखाधड़ी से हासिल रकम को प्राप्त करने और आगे भेजने के लिए किया जाता है। कई मामलों में खाताधारकों को कमीशन या अन्य लालच देकर उनके खाते इस्तेमाल किए जाते हैं।

किराए के बैंक खातों के जरिए अवैध रकम निकालने से जुड़ी श्रेणी में पटना देशभर में नौवें स्थान पर है। ऐसे खातों के इस्तेमाल से रकम कई खातों के बीच स्थानांतरित हो सकती है, जिससे वास्तविक लाभार्थी तक पहुंचने में जांच एजेंसियों को परेशानी होती है।

हालांकि, किसी जिले का इस तरह की सूची में शामिल होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वहां का हर बैंक खाताधारक या सिम कार्ड उपयोगकर्ता किसी अपराध में शामिल है। रैंकिंग संबंधित अपराध श्रेणी के उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित होती है।

फर्जी दस्तावेज साइबर अपराधियों का बड़ा हथियार

साइबर अपराधी अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी पहचान पत्रों (Fake Identity Documents) और दूसरे लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर सकते हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर सिम कार्ड हासिल करने या बैंक खाते खुलवाने के बाद ठगी की रकम को अलग-अलग माध्यमों से निकालने की कोशिश की जाती है।

इस पूरे नेटवर्क में सिम कार्ड जारी करने वाले लोगों, बैंक खातों का इस्तेमाल कराने वालों और रकम निकालने वाले व्यक्तियों की भूमिका की जांच करना जरूरी होता है। पुलिस और जांच एजेंसियों को मोबाइल नंबर, बैंक लेनदेन, एटीएम से निकासी और डिजिटल गतिविधियों के बीच संबंध स्थापित करने पड़ते हैं।

जांच में देरी होने या अलग-अलग राज्यों में फैले नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में मुश्किल आने पर अपराधियों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसलिए संदिग्ध लेनदेन की निगरानी, पहचान सत्यापन और राज्यों के बीच पुलिस समन्वय साइबर ठगी पर नियंत्रण के अहम उपाय हैं।

जामताड़ा के बाद नए इलाकों पर बढ़ी नजर

झारखंड का जामताड़ा लंबे समय से साइबर ठगी के मामलों को लेकर चर्चा में रहा है। अब देवघर, दुमका, गिरिडीह और धनबाद जैसे जिलों के अलग-अलग श्रेणियों में सामने आने से राज्य में साइबर अपराध के बदलते स्वरूप पर ध्यान गया है। बिहार के नवादा, नालंदा, पटना और अरवल के नाम भी इस सूची में शामिल हैं।

इन जिलों की रैंकिंग साइबर अपराध के विभिन्न पहलुओं को समझने का आधार देती है। हालांकि, केवल रैंकिंग के आधार पर किसी जिले में अपराधियों की संख्या, पूरे नेटवर्क के आकार या स्थानीय आबादी की संलिप्तता का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

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