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सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा की रफ्तार धीमी, 86% स्कूल स्मार्ट क्लास से दूर; ICT लैब भी नाकाफी
Digital Education in Jharkhand: झारखंड के सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा की धीमी रफ्तार सामने आई है। 86% स्कूलों में स्मार्ट क्लास और 64% में ICT लैब नहीं है।
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Digital Education in Jharkhand: झारखंड में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार योजनाओं और लक्ष्यों की बात कर रही है, लेकिन सरकारी स्कूलों की तस्वीर इन दावों से अलग कहानी बता रही है। सवाल यह है कि जब स्मार्ट क्लास और ICT लैब को आधुनिक शिक्षा की बुनियाद माना जा रहा है, तो राज्य के इतने बड़े हिस्से के स्कूल अब भी इन सुविधाओं से दूर क्यों हैं? स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की PGI 2.0 जिला स्तरीय रिपोर्ट ने डिजिटल शिक्षा की जमीनी स्थिति पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
44 हजार से ज्यादा स्कूलों में सिर्फ 6,223 में स्मार्ट क्लास
रिपोर्ट के अनुसार झारखंड के कुल 44,378 सरकारी स्कूलों में केवल 6,223 स्कूलों में स्मार्ट क्लास की सुविधा उपलब्ध है। यानी महज 14.02 फीसदी स्कूल ही स्मार्ट क्लास से जुड़े हैं। करीब 86 फीसदी सरकारी स्कूलों में अभी स्मार्ट क्लास की सुविधा नहीं है।
यह स्थिति ऐसे समय में है जब शिक्षा में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल को लेकर लगातार जोर दिया जा रहा है। सरकार ने वर्ष 2026-27 तक राज्य में स्मार्ट क्लास की कवरेज बढ़ाकर 48.4 फीसदी करने का लक्ष्य रखा है। मौजूदा 14.02 फीसदी कवरेज को देखते हुए यह लक्ष्य हासिल करना बड़ी चुनौती है।
रामगढ़ आगे, पलामू और लातेहार सबसे पीछे
स्मार्ट क्लास की सुविधा के मामले में रामगढ़ 22.9 फीसदी कवरेज के साथ राज्य में सबसे आगे है। इसके बाद बोकारो में 21.8 फीसदी और कोडरमा में 19.5 फीसदी स्कूल स्मार्ट क्लास से जुड़े हैं। पूर्वी सिंहभूम में यह आंकड़ा 19 फीसदी है।
दूसरी ओर पलामू और लातेहार की स्थिति काफी कमजोर है। पलामू में केवल 9.2 फीसदी और लातेहार में 8.9 फीसदी स्कूलों में स्मार्ट क्लास की सुविधा है। चतरा में 10.6 फीसदी, सरायकेला-खरसावां में 10.4 फीसदी और पश्चिमी सिंहभूम में 10.8 फीसदी स्कूल स्मार्ट क्लास से जुड़े हैं।
रिपोर्ट में स्मार्ट क्लास को कम प्रदर्शन वाले महत्वपूर्ण संकेतकों में शामिल किया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि डिजिटल शिक्षा को लेकर लक्ष्य तय करने के बावजूद बड़ी संख्या में स्कूलों तक बुनियादी डिजिटल सुविधाएं पहुंचाने की रफ्तार इतनी धीमी क्यों है।
ICT लैब की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली
डिजिटल शिक्षा का दूसरा अहम आधार ICT लैब है, लेकिन यहां भी तस्वीर बहुत उत्साहजनक नहीं है। उच्च प्राथमिक और उससे ऊपर की कक्षाओं वाले 15,212 सरकारी स्कूलों में सिर्फ 5,536 स्कूलों में ICT लैब उपलब्ध है। यानी केवल 36.39 फीसदी स्कूल ही इससे जुड़े हैं, जबकि करीब 64 फीसदी स्कूल अभी इस सुविधा से वंचित हैं।
ICT लैब के मामले में गढ़वा 62.9 फीसदी कवरेज के साथ राज्य में सबसे आगे है। रामगढ़ में 58.5 फीसदी, लोहरदगा में 53.6 फीसदी, देवघर में 53.2 फीसदी और कोडरमा में 50.6 फीसदी स्कूलों में ICT लैब की सुविधा है। पूर्वी सिंहभूम में यह आंकड़ा 40.7 फीसदी है।
पलामू में डिजिटल शिक्षा की सबसे कमजोर तस्वीर
ICT लैब के मामले में पलामू की स्थिति सबसे कमजोर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जिले के सिर्फ 25.5 फीसदी सरकारी स्कूलों में ICT लैब उपलब्ध है। यानी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को अब भी डिजिटल संसाधनों से जुड़ी शिक्षा का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहा है।
PGI 2.0 के अनुसार वर्ष 2026-27 तक राज्य में ICT लैब कवरेज को बढ़ाकर 61.60 फीसदी करने का लक्ष्य है। लेकिन मौजूदा 36.39 फीसदी कवरेज और तय लक्ष्य के बीच का अंतर बताता है कि सरकार के सामने डिजिटल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को तेजी से मजबूत करने की बड़ी चुनौती है।
लक्ष्य बड़े, लेकिन स्कूलों तक पहुंच धीमी
रिपोर्ट की सबसे बड़ी चिंता यही है कि डिजिटल शिक्षा को लेकर सरकार के लक्ष्य और स्कूलों की मौजूदा स्थिति के बीच काफी अंतर दिखाई देता है। स्मार्ट क्लास और ICT लैब जैसी सुविधाएं कुछ जिलों में बेहतर स्थिति में हैं, लेकिन कई जिलों में इनकी पहुंच बेहद सीमित है।
ऐसे में केवल लक्ष्य तय करना पर्याप्त नहीं होगा। सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को वास्तव में मजबूत करने के लिए सुविधाओं की तेज उपलब्धता, जिलों के बीच असमानता कम करने और कमजोर प्रदर्शन वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। वरना डिजिटल शिक्षा का लाभ कुछ स्कूलों तक सीमित रह जाएगा और सरकारी स्कूलों के लाखों विद्यार्थियों के बीच डिजिटल संसाधनों की खाई बनी रहेगी।


