राशन की दुकान पर लगने वाली लाइन खत्म...? झारखंड में अब ATM से निकलेगा गेहूं-चावल!

Jharkhand Grain ATM: झारखंड के रांची, जमशेदपुर और धनबाद में Grain ATM शुरू करने की तैयारी है। जानें मशीन से गेहूं-चावल कैसे मिलेगा, राशन कार्डधारियों को क्या फायदे होंगे और देश में सबसे पहले Grain ATM कहां लगाया गया था।

Shalni Kumari
Published on: 4 Oct 2026 12:16 PM IST
Grain ATM in Ranchi
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Jharkhand Grain ATM  

Jharkhand Grain ATM: झारखंड में राशन वितरण व्यवस्था को आधुनिक बनाने की तैयारी की जा रही है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राशन लेने के लिए उचित मूल्य की दुकानों पर लगने वाली लंबी कतारों से लोगों को राहत देने के उद्देश्य से राज्य सरकार Grain ATM शुरू करने जा रही है। इसके लिए रांची, जमशेदपुर और धनबाद का चयन किया गया है। इन तीनों शहरों में पहले पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर मशीनें लगाई जाएंगी। योजना सफल रहने पर इसे राज्य के दूसरे इलाकों में भी विस्तार दिया जा सकता है।

बैंक ATM की तरह मशीन से निकलेगा अनाज

Grain ATM के जरिए राशन कार्डधारियों को दुकान पर जाकर घंटों इंतजार करने के बजाय मशीन से अनाज लेने की सुविधा मिलेगी। इसे सामान्य बैंक एटीएम की तरह समझा जा सकता है, लेकिन इसमें पैसे की जगह गेहूं और चावल जैसे खाद्यान्न निकलेंगे। इसके लिए लाभुक को मशीन पर अपना राशन कार्ड नंबर या निर्धारित पहचान संबंधी जानकारी दर्ज करनी होगी। इसके बाद आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिए उसकी पहचान की जा सकती है। पहचान और पात्रता की पुष्टि होने पर मशीन डिजिटल रिकॉर्ड में उपलब्ध राशन की मात्रा के अनुसार अनाज निकालकर देगी। मशीन में लगे तौल उपकरण से अनाज की निर्धारित मात्रा मापी जाएगी और वितरण का रिकॉर्ड भी डिजिटल रूप से दर्ज होगा।

राशन लेने के लिए नहीं लगानी होगी लंबी कतार

इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा राशन वितरण में लगने वाले समय को कम करना और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है। आमतौर पर राशन की दुकानों पर लाभुकों को निर्धारित समय पर पहुंचना पड़ता है और कई बार भीड़ के कारण इंतजार करना पड़ता है। मशीन के माध्यम से राशन मिलने पर इस परेशानी में कमी आ सकती है। यदि मशीनों को चौबीस घंटे संचालित किया जाता है, तो कामकाजी लोग भी अपनी सुविधा के अनुसार राशन ले सकेंगे। इसके अलावा, मशीन से तय मात्रा में अनाज मिलने के कारण कम वजन देने और वितरण में गड़बड़ी की आशंका भी कम हो सकती है। डिजिटल रिकॉर्ड रहने से प्रशासन के लिए यह निगरानी करना आसान होगा कि किस लाभुक को कितना राशन दिया गया है।

बिजली, इंटरनेट और बायोमेट्रिक सत्यापन बन सकते हैं चुनौती

हालांकि, इस व्यवस्था के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। मशीन के संचालन के लिए बिजली और इंटरनेट की नियमित उपलब्धता जरूरी होगी। नेटवर्क बाधित होने या तकनीकी खराबी आने पर राशन वितरण रुक सकता है। बुजुर्गों और दिव्यांगों को बायोमेट्रिक सत्यापन में परेशानी हो सकती है। कई बार उंगलियों के निशान स्पष्ट नहीं आने पर आधार आधारित पहचान पूरी नहीं हो पाती। ऐसी स्थिति में वैकल्पिक सत्यापन और सहायता की व्यवस्था जरूरी होगी। इसके साथ ही मशीनों में अनाज की नियमित आपूर्ति, रखरखाव और सुरक्षा पर भी ध्यान देना होगा। इसलिए Grain ATM के साथ राशन दुकानों या सहायता केंद्रों की व्यवस्था बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा, ताकि तकनीकी दिक्कत आने पर किसी लाभुक को उसके हिस्से के राशन से वंचित न रहना पड़े।

2021 में हरियाणा में लगा था देश का पहला Grain ATM

भारत में Grain ATM का प्रयोग झारखंड से पहले भी हो चुका है। देश का पहला Grain ATM वर्ष 2021 में हरियाणा के गुरुग्राम जिले के फर्रुखनगर में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लगाया गया था। इसे वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (WFP) की तकनीक के आधार पर विकसित किया गया था। इसके बाद दूसरे राज्यों में भी इस तरह की मशीनों का इस्तेमाल शुरू हुआ। मेघालय में अगस्त 2023 में स्वचालित अनाज वितरण मशीन की शुरुआत की गई। उत्तर प्रदेश के वाराणसी और गोरखपुर में भी Annapurti Grain ATM लगाए जाने की जानकारी सामने आई।

ओडिशा में शुरू हुआ था देश का पहला 24 घंटे चलने वाला Grain ATM

ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में 9 अगस्त 2024 को देश का पहला 24 घंटे उपलब्ध रहने वाला Annapurti Grain ATM शुरू किया गया। इस मशीन को ओडिशा सरकार और वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के सहयोग से शुरू किया गया था। इस तरह हरियाणा में देश के पहले Grain ATM का पायलट प्रयोग हुआ, जबकि 24 घंटे राशन उपलब्ध कराने वाली Annapurti मशीन की शुरुआत ओडिशा से हुई।

रांची, जमशेदपुर और धनबाद में इन जगहों पर लगेंगी मशीनें

झारखंड में प्रस्तावित पायलट प्रोजेक्ट के लिए रांची, जमशेदपुर और धनबाद को चुना गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, रांची में कचहरी चौक के पास टाउन सर्किल कार्यालय में मशीन लगाने की योजना है। जमशेदपुर में प्रखंड कार्यालय परिसर स्थित पुराने राज्य खाद्य निगम के गोदाम और धनबाद में नए डीसी कार्यालय के पास बरवा (पश्चिम) स्कूल में मशीन स्थापित करने का प्रस्ताव है। इन स्थानों पर मशीन लगाने से पहले जरूरी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था की जानी है। हालांकि, मशीनों की स्थापना की अंतिम तारीख, संचालन की शुरुआत, लाभुकों के चयन और एक बार में मिलने वाले अनाज की मात्रा को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।

सफल रहा प्रयोग तो दूसरे जिलों तक बढ़ सकती है सुविधा

झारखंड में Grain ATM की शुरुआत को PDS व्यवस्था में तकनीकी बदलाव की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। यदि पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो इससे राशन वितरण में पारदर्शिता बढ़ाने, समय बचाने और लाभुकों को अधिक सुविधाजनक सेवा देने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि मशीनें कितनी नियमित रूप से काम करती हैं और ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के सभी पात्र लाभुकों तक यह सुविधा किस तरह पहुंचाई जाती है।

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