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झारखंड के इस गांव में लोग नहीं मानते सरकारी पहचान, बोले- ‘हम ईसा से पहले से हैं’, SIR में वोटर लिस्ट से दूरी
Jharkhand SIR: झारखंड के खूंटी जिले के बरबंदा गांव के मुंडा आदिवासी समुदाय ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया है। ग्रामीण सरकारी दस्तावेजों व योजनाओं से दूरी बनाकर अपनी पारंपरिक पहचान और जीवनशैली को प्राथमिकता दे रहे हैं।
Jharkhand News
Jharkhand SIR: झारखंड के खूंटी जिले (Khunti District) के जंगलों के बीच बसा एक छोटा सा मुंडा आदिवासी (Munda Tribal) गांव इन दिनों चर्चा में है। यहां के लोग सरकारी दस्तावेजों (Government Documents) और पहचान पत्रों (Identity Documents) को जरूरी नहीं मानते हैं। यही वजह है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण (Electoral Roll Revision) यानी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR - Special Intensive Revision) में भी गांव के कई लोगों ने हिस्सा लेने से इनकार कर दिया है।
यह विरोध किसी प्रदर्शन या नारेबाजी के जरिए नहीं हो रहा है, बल्कि ग्रामीणों ने सरकारी व्यवस्था (Government System) से दूरी बनाकर अपनी पारंपरिक पहचान (Traditional Identity) को प्राथमिकता देने का फैसला किया है।
खुद को ‘एसी समुदाय’ बताते हैं ग्रामीण
खूंटी जिले के बरबंदा गांव (Barbanda Village) में रहने वाले मुंडा समुदाय (Munda Community) के लोग खुद को ‘एसी समुदाय’ (AC Community) कहते हैं। उनके अनुसार ‘एसी’ का मतलब ‘एंटे क्रिस्टम’ (Ante Christum) है, जिसका अर्थ होता है ‘ईसा मसीह के जन्म से पहले’।
ग्रामीण अपने नामों के आगे ‘एसी’ लगाते हैं। उनका मानना है कि वे इस धरती के सबसे पुराने निवासियों में शामिल हैं और उनकी पहचान आधुनिक नागरिकता (Modern Citizenship) और सरकारी दस्तावेजों से भी पुरानी है।
गांव के निवासी एसी मंगरा मुंडा (AC Mangra Munda) ने कहा कि उन्हें किसी दस्तावेज की जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि वे ईसा मसीह के जन्म से पहले से मौजूद हैं, इसलिए अपने नाम के आगे एसी लगाते हैं।
आधार कार्ड और सरकारी योजनाओं से भी दूरी
बरबंदा गांव के लोगों ने बताया कि वे आधार कार्ड (Aadhaar Card) या अन्य सरकारी पहचान पत्र नहीं बनवाते हैं। इसके अलावा वे राशन जैसी सरकारी सुविधाओं (Government Benefits) का भी लाभ नहीं लेते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि वे प्रकृति के नियमों (Laws of Nature) के अनुसार जीवन जीना पसंद करते हैं और अपनी पुरानी परंपराओं (Traditions) को ही अपनी असली पहचान मानते हैं।
जंगलों के बीच आज भी पारंपरिक जीवन
जंगलों से घिरे इस गांव में मिट्टी के घर (Mud Houses) बने हुए हैं, जिनकी छतें मिट्टी की खपरैल (Clay Tiled Roofs) से ढकी हैं। यहां के लोगों का मुख्य काम खेती (Agriculture) है।
ग्रामीण धान (Rice), बाजरा (Millets), उड़द (Black Gram) और अलग-अलग सब्जियों (Vegetables) की खेती करते हैं। गांव में आधुनिक सुविधाओं (Modern Facilities) का इस्तेमाल बहुत कम दिखाई देता है।
यहां खाना बनाने के लिए गैस चूल्हे (Cooking Gas) और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों (Electronic Gadgets) का उपयोग भी लगभग नहीं होता। लोग आज भी अपनी पारंपरिक जीवनशैली (Traditional Lifestyle) के अनुसार रहते हैं।
कपड़ों और रीति-रिवाजों में भी दिखती है अलग पहचान
बरबंदा गांव के पुरुष पारंपरिक सफेद धोती (White Dhoti), शर्ट या कुर्ता पहनते हैं और सिर पर पारंपरिक टोपी या कपड़ा लगाते हैं। वहीं महिलाएं सफेद साड़ी (White Saree) पहनती हैं।
समुदाय के लोगों का कहना है कि वे न तो धूम्रपान (Smoking) करते हैं और न ही स्थानीय चावल से बनने वाली शराब ‘हड़िया’ (Hariya) का सेवन करते हैं।
SIR में फॉर्म भरने से ग्रामीणों का इनकार
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR - Special Intensive Revision) के तहत चुनाव अधिकारियों (Election Officials) की टीम गांव पहुंची, लेकिन ग्रामीणों ने गणना फॉर्म (Enumeration Form) जमा करने से इनकार कर दिया।
बूथ लेवल अधिकारी (BLO - Booth Level Officer) दुलारी होरो (Dulari Horo) ने बताया कि ग्रामीण कहते हैं कि वे प्रकृति के नियमों के अनुसार जीवन जीते हैं। अधिकारियों ने कई बार ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे अपनी बात पर कायम हैं।
बच्चों की पढ़ाई जारी, लेकिन सरकारी सुविधाओं से दूरी
अधिकारियों के अनुसार गांव के बच्चे स्कूल (School) जाते हैं, लेकिन कई बच्चे मिड-डे मील (Mid Day Meal) नहीं खाते हैं। कई बच्चों का जन्म घर पर ही होता है और कुछ नवजात बच्चों का सरकारी रिकॉर्ड (Government Record) में पंजीकरण भी नहीं कराया गया है।
खूंटी सदर बीडीओ (Khunti Sadar BDO) ज्योति कुमारी (Jyoti Kumari) ने बताया कि बरबंदा गांव के 27 योग्य मतदाताओं (Eligible Voters) ने मतदाता सूची पुनरीक्षण में शामिल होने से इनकार किया है।
वहीं खूंटी प्रखंड (Khunti Block) के कम से कम 15 मतदान केंद्रों (Polling Booths) पर करीब 700 लोगों ने अभी तक गणना फॉर्म जमा नहीं किए हैं।
चुनाव आयोग ने दी चेतावनी, जारी रहेगा संवाद
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (Chief Electoral Officer) के रवि कुमार (K Ravi Kumar) ने कहा है कि प्रशासन समुदाय के लोगों से लगातार बातचीत करता रहेगा।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग इस प्रक्रिया में शामिल नहीं होंगे, उनके नाम भविष्य में मतदाता सूची (Voter List) से हट सकते हैं।
फिलहाल बरबंदा गांव के लोग अपनी पहचान सरकारी कागजों में नहीं, बल्कि अपनी परंपरा, पूर्वजों और जीवनशैली में देखते हैं। उनका मानना है कि उनकी पहचान आधुनिक राज्य व्यवस्था (Modern State System) और नागरिकता दस्तावेजों (Citizenship Documents) से भी पहले की है और वे उसी परंपरा के साथ जीवन जीना चाहते हैं।


