Jharkhand: झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ अपनों ने ही कर दिया खेल? RJD-माले पर गंभीर आरोप

Jharkhand News: झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की अप्रत्याशित हार के बाद पार्टी ने अपने सहयोगी दलों RJD और माले पर क्रॉस वोटिंग का गंभीर आरोप लगाया है।

Newstrack Network
Published on: 19 Jun 2026 8:46 AM IST
Jharkhand: झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ अपनों ने ही कर दिया खेल? RJD-माले पर गंभीर आरोप
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Jharkhand News: अभी कुछ ही दिन पहले दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में विपक्षी दलों के बड़े-बड़े दिग्गजों ने एक साथ बैठकर हाथ हवा में लहराए थे। 'इंडिया' गठबंधन की उस हाई-प्रोफाइल बैठक में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के युवा नेता तेजस्वी यादव समेत 20 से ज्यादा विपक्षी दलों के नेताओं ने मंच साझा किया था। वहां देश के सामने विपक्षी एकजुटता की बड़ी-बड़ी कसमें खाई गई थीं और मिलकर लड़ने का दावा किया गया था। लेकिन दिल्ली की उस बैठक की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के चुनाव में कांग्रेस के साथ एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित 'खेल' हो गया।

झारखंड विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल होने के बावजूद कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार प्रणव झा को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में एनडीए के समर्थन से मैदान में उतरे निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी ने बाजी मार ली, जबकि दूसरी सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के प्रत्याशी ने आसानी से जीत दर्ज की। इस अप्रत्याशित हार के तुरंत बाद बौखलाई कांग्रेस ने गठबंधन के अपने ही साथियों राजद और माले पर खुलेआम धोखा देने का संगीन आरोप मढ़ दिया है।

अपनों ने ही पीठ में घोंपा छुरा: कांग्रेस प्रभारी का बड़ा आरोप

इस करारी हार के बाद झारखंड कांग्रेस के प्रभारी के राजू का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने मीडिया के सामने आकर सीधे तौर पर अपनी ही सहयोगी पार्टियों राजद और वामपंथी दल माले को इस नाकामी के लिए जिम्मेदार ठहराया। के राजू ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि कांग्रेस प्रत्याशी को अपने ही साथियों से वह समर्थन और सहयोग नहीं मिला जिसकी उम्मीद की जा रही थी।

उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी जेएमएम ने तो ईमानदारी दिखाते हुए अपने 4 अतिरिक्त वोट कांग्रेस के पाले में डाले, लेकिन RJD और माले के विधायकों ने ऐन वक्त पर गद्दारी कर दी। कांग्रेस प्रभारी के अनुसार इन दोनों दलों के विधायकों ने गुप्त रूप से क्रॉस वोटिंग की, जिसके कारण कांग्रेस प्रत्याशी की हार तय हो गई। उन्होंने भारी निराशा जताते हुए कहा कि सत्ताधारी गठबंधन का इस तरह बिखर जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और वे इस पूरे घटनाक्रम से बुरी तरह आहत हैं। हालांकि इस गंभीर आरोप पर अभी तक राजद या माले की तरफ से कोई आधिकारिक सफाई सामने नहीं आई है।

कैसे बदला पूरा पासा

इस पूरे चुनावी ड्रामे के बीच सोशल मीडिया पर एक ऐसी तस्वीर तैर रही है जिसने झारखंड से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में कयासों का बाजार गर्म कर दिया है। चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बीजेपी के दिग्गज नेताओं की एक साथ बैठकर तसल्ली से चाय पीने की तस्वीर ने विपक्षी खेमे की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इस एक तस्वीर ने हेमंत सोरेन के पाला बदलकर एनडीए में शामिल होने की पुरानी अटकलों को एक बार फिर से जिंदा कर दिया है।

दूसरी तरफ, राजनीतिक विश्लेषकों का साफ मानना है कि प्रणव झा की इस दुर्गति के लिए खुद कांग्रेस का हद से ज्यादा आत्मविश्वास जिम्मेदार है। जहां एक तरफ बीजेपी और परिमल नथवानी की टीम एक-एक वोट की खातिर एड़ी-चोटी का जोर लगा रही थी, वहीं कांग्रेस के नेता जीत के प्रति पूरी तरह आश्वस्त होकर बैठे थे। झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता इरफान अंसारी ने तो मतदान के दौरान सरेआम दावा कर दिया था कि उनके पाले में कुल 61 वोट आ रहे हैं। लेकिन जैसे ही नतीजों का बक्सा खुला, उनके सारे बड़े-बड़े दावे हवा में उड़ गए।

आसानी से जीत सकती थी कांग्रेस

अगर झारखंड विधानसभा के भीतर के पूरे गणित को समझें, तो कुल 81 सदस्यों वाली इस विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट अपने नाम करने के लिए पहली वरीयता के कम से कम 28 वोटों की दरकार थी। अंतिम नतीजों में जेएमएम के बैद्यनाथ राम को कुल 30 वोट मिले और वे शान से जीते। वहीं, निर्दलीय परिमल नथवानी ने ठीक 28 वोट हासिल करके अपनी सीट पक्की कर ली। इसके विपरीत कांग्रेस के प्रणव झा महज 20 वोटों पर ही सिमट कर रह गए। इस दौरान तीन वोट अमान्य भी घोषित किए गए। जेएमएम के नेतृत्व वाले इस पूरे सत्तारूढ़ गठबंधन के पास अपने कुल 56 विधायक मौजूद थे। अगर गठबंधन के भीतर यह भितरघात और क्रॉस-वोटिंग नहीं हुई होती, तो कांग्रेस और जेएमएम दोनों के उम्मीदवार बिना किसी परेशानी के यह चुनाव जीत जाते। इस हार ने अब 'इंडिया' गठबंधन की अंदरूनी एकजुटता पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।

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