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Maternity leave के लिए मांगे 50 हजार, टीचर को आखिरी महीने तक करनी पड़ी ड्यूटी...गर्भ में बच्चे की मौत!
Jharkhand Maternity leave Case: झारखंड के पलामू में एक शिक्षिका ने मातृत्व अवकाश में देरी और रिश्वत मांगने का आरोप लगाया है। मामले में शिशु की मौत के बाद जांच शुरू हो गई है।
Jharkhand News
Jharkhand Maternity leave Case: झारखंड के पलामू (Palamu) जिले में एक महिला टीचर (Woman Teacher) ने अपने ही विभाग के सीनियर अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित शिक्षिका भारती पांडेय (Bharti Pandey) तरहसी स्थित सिलदलिया प्लस-2 हाई स्कूल में तैनात हैं। इसके साथ ही वह चैनपुर के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में भी प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर अपनी सेवाएं दे रही हैं।
गर्भवती भारती पांडेय का आरोप है कि उन्हें समय पर मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) नहीं दिया गया। इसके कारण उन्हें गर्भावस्था के आखिरी महीने तक स्कूल में ड्यूटी करनी पड़ी। बाद में स्कूल में ही उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने बताया कि गर्भ में ही शिशु की मौत हो चुकी है।
मातृत्व अवकाश के बदले 50 हजार रुपये मांगने का आरोप
पीड़ित परिवार का आरोप है कि भारती पांडेय ने 3 जुलाई को मातृत्व अवकाश के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी यानी डीईओ (DEO) कार्यालय में आवेदन दिया था। परिवार का आरोप है कि छुट्टी मंजूर करने के बदले 50 हजार रुपये की रिश्वत (Bribe) मांगी गई। परिवार का कहना है कि रकम नहीं देने के कारण मातृत्व अवकाश मंजूर नहीं किया गया। इसके बाद गर्भावस्था के अंतिम चरण में भी शिक्षिका को लगातार स्कूल और कार्यालय के चक्कर लगाने पड़े।
स्कूल में अचानक शुरू हुई प्रसव पीड़ा
परिजनों के मुताबिक, मातृत्व अवकाश नहीं मिलने के कारण भारती पांडेय नियमित रूप से स्कूल जाती रहीं। इसी दौरान स्कूल परिसर में अचानक उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। इसके बाद उन्हें आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो चुकी है। इस घटना के बाद परिवार ने शिक्षा विभाग (Education Department) पर गंभीर लापरवाही और मानसिक प्रताड़ना (Mental Harassment) का आरोप लगाया है।
पुलिसकर्मी पति ने की एफआईआर दर्ज करने की मांग
पीड़ित शिक्षिका के पति मुकेश कुमार तिवारी (Mukesh Kumar Tiwari) पुलिस विभाग में कार्यरत हैं। उन्होंने पलामू के शहर थाना, मेदिनीनगर में लिखित शिकायत दी है। शिकायत में जिला शिक्षा पदाधिकारी संदीप कुमार (Sandeep Kumar) और उनके कार्यालय के दो कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी यानी एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बिना रिश्वत लिए मातृत्व अवकाश स्वीकृत नहीं किया गया। परिवार का कहना है कि इसी वजह से यह दुखद स्थिति पैदा हुई।
डीसी से शिकायत के बाद भी नहीं मिली राहत
परिवार का कहना है कि इस मामले की शिकायत पलामू के उपायुक्त यानी डीसी (DC) से भी की गई थी। आरोप है कि उपायुक्त की ओर से शिक्षा विभाग को आवश्यक निर्देश दिए जाने के बावजूद समय पर मातृत्व अवकाश स्वीकृत नहीं किया गया।
परिवार का दावा है कि अगर समय पर भारती पांडेय को छुट्टी मिल जाती तो शायद यह दुखद घटना टाली जा सकती थी।
डीसी बोले- चाइल्ड केयर लीव का आवेदन दिया गया था
पलामू के उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत (Dilip Pratap Singh Shekhawat) ने बताया कि मामला सामने आने के बाद तीन सदस्यीय जांच टीम (Three-Member Inquiry Team) गठित की गई थी। डीसी के मुताबिक, जांच रिपोर्ट में सामने आया कि शिक्षिका ने चाइल्ड केयर लीव (Child Care Leave) के लिए आवेदन दिया था। उस आवेदन में मातृत्व अवकाश का जिक्र नहीं किया गया था। इसी वजह से प्रशासन को मातृत्व अवकाश से जुड़ी जानकारी नहीं थी।
रिश्वत मांगने के आरोपों की भी जांच
दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने बताया कि शिक्षिका से पैसे की मांग किए जाने के आरोपों की भी जांच की जा रही है। इस मामले में संबंधित क्लर्क (Clerk) को निलंबित कर दिया गया है।
डीसी ने कहा कि विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद अगर जिला शिक्षा पदाधिकारी की भी लापरवाही या किसी तरह की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
बाबूलाल मरांडी ने निष्पक्ष जांच की मांग की
झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी (Babulal Marandi) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट कर इस घटना को बेहद गंभीर और अमानवीय बताया।
उन्होंने कहा कि अगर मातृत्व अवकाश के बदले रिश्वत मांगने के आरोप सही हैं तो यह सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बाबूलाल मरांडी ने पलामू के उपायुक्त और पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच (Fair Investigation) कराने की मांग की। उन्होंने दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई (Strict Legal Action) करने की भी मांग की है।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
फिलहाल इस पूरे मामले में मातृत्व अवकाश में देरी, रिश्वत मांगने के आरोप और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। एक ओर परिवार का आरोप है कि समय पर छुट्टी नहीं मिलने और कथित रिश्वत की मांग के कारण गर्भवती शिक्षिका को आखिरी महीने तक ड्यूटी करनी पड़ी, वहीं प्रशासन का कहना है कि शिक्षिका के आवेदन में मातृत्व अवकाश का उल्लेख नहीं था।
अब विस्तृत जांच रिपोर्ट के बाद ही यह साफ होगा कि इस मामले में किसकी लापरवाही थी और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।


