JSSC CGL में CID का बड़ा खुलासा! अफसर बन चुके 4 अभ्यर्थी गिरफ्तार, पेपर लीक नेटवर्क से कनेक्शन

JSSC CGL Irregularities: जेएसएससी सीजीएल अनियमितता मामले में सीआईडी की एसआईटी ने अफसर बन चुके 4 सफल अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया है। जांच में पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े होने का आरोप सामने आया है।

Aditya Kumar Verma
Published on: 29 Aug 2026 12:06 PM IST
JSSC CGL Irregularities | 4 Appointed ASOs Arrested
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JSSC CGL Irregularities: जेएसएससी सीजीएल में कथित अनियमितता (Irregularities) के मामले में सीआईडी (CID) की एसआईटी (SIT) ने चार सफल अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया है। ये चारों परीक्षा पास करने के बाद अफसर बन चुके थे। गिरफ्तारी के बाद सभी को सीआईडी की विशेष अदालत में पेश किया गया।

गिरफ्तार किए गए अभ्यर्थियों में धनबाद निवासी दीपक कुमार, बीसीसीएल कॉलोनी दुग्धा निवासी उमेश कुमार राय, धनबाद के राजगंज निवासी विजय कुमार तिवारी और धनबाद के सुदामाडीह निवासी आनंद कुमार सिंह शामिल हैं। चारों को 30 दिसंबर 2025 को नियुक्ति पत्र मिला था। इसके बाद सभी बतौर एएसओ (ASO) अलग-अलग विभागों में तैनात थे।

मिथिलेश सिंह के नेटवर्क से जुड़े होने का आरोप

सीआईडी को जानकारी मिली है कि चारों सफल अभ्यर्थी बेवल (Bewael) के लिए काम करने वाले मिथिलेश सिंह (Mithilesh Singh) के नेटवर्क से जुड़े हुए थे। जांच एजेंसी के मुताबिक, इन अभ्यर्थियों ने गलत तरीके से परीक्षा पास की थी।

आरोप है कि परीक्षा पास करने के बाद भी वे सिर्फ नौकरी तक सीमित नहीं रहे, बल्कि खुद एजेंट की भूमिका निभाते हुए कई दूसरे अभ्यर्थियों का संपर्क पेपर लीक (Paper Leak) कराने वाले नेटवर्क से करवाते थे।

CID की जांच में पूर्व में गिरफ्तार अभय तिवारी (Abhay Tiwari) के बयान से भी इस नेटवर्क को लेकर जानकारी सामने आई थी। अभय तिवारी ने खुलासा किया था कि उसे और कई अन्य लोगों को बोकारो में राजेश सिंह के आवास पर ले जाया गया था। वहां उसे और दूसरे अभ्यर्थियों को प्रश्न और उत्तर रटवाए गए थे। इस दौरान मिथिलेश सिंह भी मौके पर मौजूद था।

सीआईडी की टीम अब मिथिलेश सिंह की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। उसकी तलाश दिल्ली, उत्तर प्रदेश समेत कई शहरों में की जा रही है।

CGL में हुए थे बहाल

जांच में यह भी सामने आया है कि मिथिलेश सिंह के नेटवर्क के जरिए अभय तिवारी, उसके भाई अक्षय तिवारी और उसकी पत्नी सुषमा कुमारी भी सीजीएल (CGL) में बहाल हुए थे।

सीआईडी एसआईटी की पूछताछ में अभय तिवारी ने टीडीपीएल (TDPL) से जुड़े मिथिलेश सिंह और उमाशंकर प्रमाणिक की मिलीभगत से सीजीएल का पेपर उपलब्ध कराने की बात स्वीकार की थी।

बेवल को मिला था CGL परीक्षा संचालन का जिम्मा

जेएसएससी सीजीएल परीक्षा के संचालन की जिम्मेदारी कोलकाता की कंपनी बेवल (Bewael) को दी गई थी। बेवल के स्थानीय प्रतिनिधि के तौर पर सोमांश प्रकाश (Somansh Prakash) कामकाज देखता था।

सोमांश प्रकाश मां चामुंडेश्वरी (Maa Chamundeshwari) नाम की कंपनी चलाता है। सीजीएल परीक्षा में बेवल एजेंसी की भूमिका की जांच के दौरान सामने आया कि कंपनी ने परीक्षा से जुड़ा अपना काम मां चामुंडेश्वरी को सबलेट (Sublet) कर दिया था।

इसके बाद परीक्षा के आयोजन में सोमांश प्रकाश की अहम भूमिका सामने आई थी। इसी कड़ी में जांच एजेंसी परीक्षा में कथित अनियमितता से जुड़े पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।

सोमांश और राहुल पांच दिन की रिमांड पर

दिल्ली से गुरुवार को गिरफ्तार किए गए सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार (Rahul Kumar) को सीआईडी की एसआईटी ने पांच दिनों की रिमांड (Remand) पर लिया है।

प्रारंभिक पूछताछ में सोमांश प्रकाश ने भी सीजीएल परीक्षा में अनियमितता की बात कबूल की है। सोमांश दिल्ली के बुराड़ी के संत नगर के पर्वतीय अंचल का रहने वाला है। वहीं उसका सहयोगी राहुल कुमार उसका रूममेट रह चुका है।

सीआईडी अब गिरफ्तार किए गए चारों सफल अभ्यर्थियों के साथ-साथ सोमांश प्रकाश, राहुल कुमार और जांच में सामने आए दूसरे लोगों की भूमिका को जोड़कर कथित पेपर लीक नेटवर्क की पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसी मिथिलेश सिंह की तलाश में भी लगातार छापेमारी कर रही है।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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