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निशा भगत सुसाइड केस में बड़ा एक्शन! SIT करेगी जांच; थानेदार की भूमिका भी सवालों के घेरे में
Nisha Bhagat Suicide: झारखंड की आदिवासी नेत्री निशा भगत की मौत के मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई है। जानिए पूरा मामला।
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Nisha Bhagat Suicide: झारखंड की आदिवासी नेत्री निशा भगत की खुदकुशी के मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित कर दी गई है। एसआईटी पता लगाएगी की निशा भगत ने खुदकुशी क्यों की, उन्हें किसने परेशान किया था, जिसकी वजह से वह आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो गईं। पिठौरिया थाना प्रभारी को इस जांच से अलग रखा गया है, जिसे काफी अहम फैसला माना जा रहा है। वहीं, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी घटना का संज्ञान लेते हुए झारखंड सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगने की बात कही है।
निशा भगत की मौत के बाद से ही आदिवासी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में आक्रोश है। घटना से पहले उनके फेसबुक लाइव वीडियो में लगाए गए आरोपों ने पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
SIT करेगी निशा भगत मौत मामले की जांच
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने SIT का गठन कर जांच का दायरा बढ़ाया है। जांच में घटना से पहले की परिस्थितियों, निशा भगत की शिकायतों, सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी। पिठौरिया थाना प्रभारी को जांच से अलग रखने का फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि निशा भगत ने अपने फेसबुक लाइव में पुलिस और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। ऐसे में जांच को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए यह कदम अहम माना जा रहा है।
ST आयोग ने लिया संज्ञान
निशा भगत की मौत के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी गंभीरता दिखाई है। आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने मामले का संज्ञान लेते हुए झारखंड सरकार के संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगने की बात कही है। आयोग यह जानने का प्रयास करेगा कि किन परिस्थितियों में निशा भगत की मौत हुई और घटना से पहले उन्होंने जिन परेशानियों का जिक्र किया था, उन पर प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की गई थी। आयोग का कहना है कि आदिवासी समाज के अधिकारों, सुरक्षा और सम्मान की रक्षा करना उसकी प्राथमिकता है। मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी जुटाकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पिता की शिकायत पर FIR, इन लोगों के नाम आए सामने
निशा भगत की मौत के मामले में उनके पिता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की और आदिवासी नेत्री ज्योत्सना केरकेट्टा को नामजद आरोपी बनाया गया है। पिता ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी को मानसिक और सामाजिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। उन्हें कथित तौर पर झूठे मुकदमों में फंसाने और सोशल मीडिया के जरिए उनकी छवि खराब करने का प्रयास किया गया। शिकायत में पिठौरिया थाना प्रभारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
फेसबुक लाइव में बयां किया था अपना दर्द
गौरतलब है कि 6 नवंबर को निशा भगत ने फेसबुक लाइव के जरिए अपनी परेशानी जाहिर की थी। इस दौरान उन्होंने जमीन से जुड़े विवादों, कथित प्रताड़ना और पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने अपनी सुरक्षा और शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर भी सवाल उठाए थे। बताया गया कि उन्होंने पिठौरिया थाना प्रभारी से फोन पर संपर्क कर अपनी जान देने की बात कही थी। इसके कुछ समय बाद उनके घर पर उनकी मौत की खबर सामने आई। घटना के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग
निशा भगत की मौत के बाद झारखंड में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी हलचल तेज है। कई संगठनों और नेताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। कुछ नेताओं और संगठनों की ओर से CBI जांच की मांग भी उठाई गई है। अब SIT की जांच और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सक्रियता के बीच सबकी नजर पुलिस की अगली कार्रवाई पर है। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि निशा भगत की मौत से पहले की परिस्थितियां क्या थीं और उनके द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।


