Jharakhand News: रांची का सरकारी स्कूल बना चर्चा का विषय, सिर्फ 2 छात्र, 2 शिक्षक और रोज बनता है मिड-डे मील

Jharakhand News: रांची के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में सिर्फ 2 छात्र, 2 शिक्षक और रोज बनता है मिड-डे मील, शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल।

Newstrack Network
Published on: 11 July 2026 12:23 PM IST (Updated on: 11 July 2026 12:23 PM IST)
Jharakhand News: रांची का सरकारी स्कूल बना चर्चा का विषय, सिर्फ 2 छात्र, 2 शिक्षक और रोज बनता है मिड-डे मील
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Jharkhand News: झारखंड (Jharkhand) की राजधानी रांची (Ranchi) के थड़पखना (Thadpakhna) स्थित राजकीयकृत प्राथमिक विद्यालय हिंदी (Government Primary School Hindi) इन दिनों अपनी अनोखी स्थिति को लेकर चर्चा में है। इस सरकारी प्राथमिक विद्यालय (Government Primary School) में पूरे स्कूल में केवल दो बच्चे ही पढ़ाई कर रहे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन दो बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल में दो सरकारी शिक्षक नियमित रूप से तैनात हैं। इतना ही नहीं, स्कूल में हाजिरी से लेकर मिड-डे मील (Mid-Day Meal) तक की पूरी व्यवस्था हर दिन सामान्य तरीके से संचालित हो रही है।

पूरे स्कूल में सिर्फ दो छात्र

इस विद्यालय में पढ़ने वाले दो छात्र प्रीति कुमारी (Preeti Kumari) और अर्जुन कुमार (Arjun Kumar) हैं। प्रीति कुमारी कक्षा चार में पढ़ाई कर रही हैं, जबकि अर्जुन कुमार कक्षा एक के छात्र हैं। पूरे विद्यालय में यही दो बच्चे नियमित रूप से स्कूल आते हैं। इन दोनों छात्रों को पढ़ाने के लिए दोनों शिक्षक प्रतिदिन समय पर स्कूल पहुंचते हैं और नियमित रूप से कक्षाएं संचालित करते हैं।

दो बच्चों के लिए रोज बनता है मिड-डे मील

भले ही विद्यालय में छात्रों की संख्या बेहद कम हो, लेकिन सरकारी योजनाओं और नियमों का पालन पूरी तरह किया जा रहा है। स्कूल के रजिस्टर में दोनों बच्चों की प्रतिदिन उपस्थिति दर्ज होती है। शिक्षकों की हाजिरी भी नियमित रूप से लगाई जाती है।सरकार की मिड-डे मील योजना (Mid-Day Meal Scheme) के तहत दोनों बच्चों के लिए हर दिन ताजा और पौष्टिक भोजन तैयार किया जाता है। यानी केवल दो बच्चों के लिए भी रसोइया अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा के साथ निभा रहा है।

सवालों पर शिक्षकों ने साधी चुप्पी

जब मीडिया और स्थानीय लोगों ने स्कूल में सिर्फ दो बच्चों के होने को लेकर वहां मौजूद दोनों शिक्षकों से सवाल किए, तो उन्होंने इस मामले पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। शिक्षकों की चुप्पी के बीच यह पूरा मामला राज्य की शिक्षा व्यवस्था और उस पर होने वाले खर्च को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है।एक ओर सरकार बच्चों को बेहतर शिक्षा, आधुनिक सुविधाएं और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए बड़े स्तर पर बजट खर्च कर रही है, वहीं राजधानी में स्थित इस विद्यालय में छात्रों की इतनी कम संख्या चिंता का विषय बन गई है।

पड़ताल में सामने आई स्कूल खाली होने की वजह

मामले की पड़ताल में यह बात सामने आई कि यह एक प्राथमिक विद्यालय है, जहां केवल पांचवीं कक्षा तक ही पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध है। थड़पखना और आसपास के इलाके में कई अन्य सरकारी और निजी स्कूल मौजूद हैं, जहां दसवीं से लेकर प्लस टू तक पढ़ाई की व्यवस्था हैस्थानीय अभिभावकों का मानना है कि बच्चों को बार-बार स्कूल बदलने की परेशानी से बचाने के लिए उन्हें शुरुआत से ही ऐसे स्कूलों में दाखिला दिलाना बेहतर है, जहां आगे की पढ़ाई भी लगातार हो सके। यही वजह है कि अधिकांश अभिभावकों ने इस प्राथमिक विद्यालय की बजाय दूसरे बड़े स्कूलों को चुना। इसके चलते यह सरकारी विद्यालय लगभग खाली हो गया और आज यहां केवल दो बच्चे ही शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

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