सिर्फ पैर टूटा था... 16 लाख का बिल बना दर्द, रांची के अस्पताल पर इलाज में लापरवाही का आरोप

Ranchi Hospital News: रांची के प्राइवेट अस्पताल में शर्मनाक लापरवाही! पैर के मामूली फ्रैक्चर के इलाज के नाम पर थमाया 16 लाख का भारी-भरकम बिल, फिर भी गई 18 साल के मासूम की जान। सीएम हेमंत सोरेन के कड़े एक्शन से मचा सियासी भूचाल।

Harsh Sharma
Published on: 5 July 2026 12:30 PM IST
सिर्फ पैर टूटा था... 16 लाख का बिल बना दर्द, रांची के अस्पताल पर इलाज में लापरवाही का आरोप
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Ranchi Hospital News: झारखंड की राजधानी रांची से एक ऐसा दिल दहला देने वाला और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे राज्य के चिकित्सा सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एक हंसता-खेलता 18 साल का लड़का सड़क हादसे में घायल होकर अस्पताल पहुंचता है। घर वालों को लगता है कि पैर में मामूली फ्रैक्चर है, डॉक्टर इलाज करेंगे और उनका बेटा ठीक होकर घर लौट आएगा। लेकिन किसे पता था कि उस नामी प्राइवेट अस्पताल की चौखट उनके बेटे के लिए मौत का कुआं साबित होगी। इलाज के नाम पर दिन-रात नोट छापे गए, करीब 16 लाख रुपये का भारी-भरकम बिल थमा दिया गया और अंत में परिवार को मिली तो सिर्फ अपने जवान बेटे की लाश। इस खौफनाक कांड के बाद पूरे रांची में बवाल मच गया है और मुख्यमंत्री को खुद इस मामले में कूदना पड़ा है।

पैर का फ्रैक्चर बना काल, बिल देखकर उड़े होश

इस दर्दनाक दास्तान की शुरुआत 24 मई को हुई थी, जब 18 साल का राजू कुमार रंजन सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था। उसे इलाज के लिए रांची के एक बड़े नामी प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिजनों का सीधा और साफ आरोप है कि राजू को सिर्फ पैर में फ्रैक्चर था। लेकिन अस्पताल की घोर लापरवाही के कारण इलाज के दौरान उसके पूरे शरीर में इन्फेक्शन यानी संक्रमण फैल गया, जिससे उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। हद तो तब हो गई जब अस्पताल ने इलाज के नाम पर करीब 16 से 18 लाख रुपये का ऐसा बिल थमाया जिसे देखकर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। इसमें से 10 लाख रुपये बीमा कंपनी से मिले और बाकी पैसे परिजनों ने अपनी गाढ़ी कमाई से चुकाए। जब ढाई लाख रुपये बकाया रह गए, तो अस्पताल अड़ गया, जिसके बाद अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा हुआ और इसी बीच मासूम राजू ने दम तोड़ दिया।

अस्पताल की अजीब दलील और मुकरती हुई कहानी

जब यह मामला सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक गरमाया, तो अस्पताल प्रबंधन ने अपनी खाल बचाने के लिए अजीबोगरीब दलीलें देना शुरू कर दिया। अस्पताल ने परिजनों के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए एक नई कहानी सामने रख दी। अस्पताल का दावा है कि मरीज सिर्फ पैर के फ्रैक्चर से पीड़ित नहीं था, बल्कि उसके सिर में गंभीर चोट थी, रीढ़ की हड्डी टूटी हुई थी और दोनों फेफड़े भी बुरी तरह डैमेज थे। डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने राजू की जान बचाने के लिए चार दिन पहले ही उसका पैर काटने की सलाह दी थी, लेकिन घरवालों ने इसकी इजाजत नहीं दी। अब सवाल यह उठता है कि अगर इतनी गंभीर चोटें थीं, तो परिवार को पहले अंधेरे में क्यों रखा गया?

हेमंत सोरेन का कड़ा एक्शन और शुरू हुआ सियासी भूचाल

इस घटना के बाद झारखंड की राजनीति में भूचाल आ गया है। बीजेपी विधायक सीता सोरेन ने सोशल मीडिया पर इस अस्पताल को ‘लूट का अड्डा’ बताते हुए इसका लाइसेंस तुरंत रद्द करने और दोषियों को जेल भेजने की मांग की है। वहीं चौतरफा घिरने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। सीएम के निर्देश पर जिला प्रशासन ने चार सदस्यीय स्पेशल जांच टीम का गठन कर दिया है, जिसमें बड़े डॉक्टरों को शामिल किया गया है। सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि टीम ने अस्पताल के सारे मेडिकल रिकॉर्ड और ट्रीटमेंट की प्रक्रिया को जब्त कर जांच शुरू कर दी है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने भी साफ कहा है कि जो भी दोषी होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। अब देखना यह है कि इस जांच के बाद इस 'कातिल' अस्पताल पर क्या कार्रवाई होती है।

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Harsh Sharma is a Content Writer at Newstrack.com.

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